Category: उधम सिंह नगर

  • धर्मांतरण मामलों पर एसएसपी अजय गणपति के निर्देश पर कार्रवाई तेज

    खटीमा। उधम सिंह नगर जिले में कथित धर्मांतरण के तीन अलग-अलग मामले सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में उधम सिंह नगर पुलिस ने मामलों को गंभीरता से लेते हुए तीनों प्रकरणों में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं।
    पुलिस प्रशासन का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति भय, दबाव, धोखाधड़ी, झूठे प्रलोभन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
    पहले मामले में एक वादी ने कोतवाली खटीमा में तहरीर देकर आरोप लगाया कि तीन लोगों द्वारा प्रार्थना सभाओं का आयोजन कर हिंदू धर्म के विरुद्ध दुष्प्रचार किया जा रहा था। शिकायत में कहा गया कि लोगों को बीमारी ठीक करने का झांसा दिया गया और आर्थिक सहायता का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया गया।
    पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    दूसरे प्रकरण में थाना नानकमत्ता क्षेत्र के एक व्यक्ति ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि गांव में चर्चनुमा ढांचा बनाकर धर्म का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, धर्म परिवर्तन के बदले पांच लाख रुपये देने का प्रलोभन दिया गया और परिवार को डराने-धमकाने का प्रयास भी किया गया।
    इस मामले में पुलिस ने उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गतिविधियों में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
    तीसरे मामले में आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति द्वारा थारू समाज के लोगों को गुमराह करते हुए हिंदू धर्म के प्रति नफरत फैलाने का प्रयास किया जा रहा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, सामाजिक भेदभाव समाप्त करने के नाम पर लोगों को झूठे प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था।
    इस मामले में भी कोतवाली खटीमा में अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने कहा है कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
    एसएसपी अजय गणपति ने तीनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी का पर्यवेक्षण पुलिस उपाधीक्षक विभव सैनी द्वारा किया जाएगा। टीम में संबंधित मामलों के विवेचक, थाना प्रभारी और एसओजी की सर्विलांस टीम को शामिल किया गया है।
    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी सभी मामलों की निष्पक्ष जांच करेगी और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
    उधम सिंह नगर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा भय, दबाव, धोखाधड़ी या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया जाता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।
    पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखना और सामाजिक सौहार्द कायम रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी प्रशासन को देने की अपील भी की गई है।

  • खनन माफियाओं का आतंक, वन दारोगा को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश

    उधम सिंह नगर जिले के सितारगंज क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर हमले का गंभीर मामला सामने आया है। रनसाली वन रेंज के आरक्षित क्षेत्र में गश्त के दौरान खनन गतिविधियों को रोकने का प्रयास कर रहे वन अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि आरोपियों ने वन दारोगा को ट्रैक्टर से टक्कर मारने की भी कोशिश की। घटना के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
    जानकारी के अनुसार, वन दारोगा नंद किशोर पांडे, वन आरक्षी शक्ति सिंह और वन बीट अधिकारी भूपेंद्र कुमार आरक्षित वन क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे। जब टीम कैलाश नदी के किनारे पहुंची, तब वहां तीन ट्रैक्टर-ट्रालियों में उपखनिज सामग्री भरी जा रही थी। वन अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन वे वैध कागजात नहीं दिखा सके।
    बताया गया कि इसके बाद आरोपी ट्रैक्टर-ट्रालियों को लेकर वहां से निकलने लगे। वन विभाग की टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिस पर साधुनगर निवासी राजकुमार सहित अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर अभद्रता और हाथापाई शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान वन दारोगा को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास भी किया गया। वन कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिसका वीडियो मौके पर मौजूद कर्मियों ने रिकॉर्ड किया।
    वन दारोगा की तहरीर के आधार पर सितारगंज पुलिस ने राजकुमार समेत तीन व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है। फिलहाल, कैलाश नदी क्षेत्र में हुई इस घटना ने अवैध खनन को लेकर प्रशासन की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

     

  • किसान सुखवंत सिंह की मौत पर विपक्ष का हमला

    उधम सिंह नगर जिले के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या को लेकर विपक्ष लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर है। सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मामले में बड़ा बयान दिया। उन्होंने इसे केवल आत्महत्या नहीं बल्कि पुलिस-प्रशासन की प्रताड़ना और सत्ता के अहंकार का प्रमाण बताया।
    नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय देहरादून पहुंचे और कहा कि एक मजबूर किसान को अपनी जान देनी पड़ी। यह घटना हमें समझाती है कि जब प्रशासन अपने दायित्वों से हट जाता है और न्याय के सभी दरवाजे बंद कर देता है, तो इंसान कितना लाचार हो सकता है।
    आर्य ने बताया कि सुखवंत सिंह ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बनाया था। वीडियो में उन्होंने स्पष्ट किया कि उधम सिंह नगर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और थाना इंचार्ज तक ने उनकी फरियाद नहीं सुनी। जिन लोगों ने उन्हें लगातार प्रताड़ित किया, पुलिस ने उनके शिकायती पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की। यही बेबसी सुखवंत सिंह को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का कारण बनी।
    नेता प्रतिपक्ष ने कहा, यह स्पष्ट है कि अब भू-माफियाओं और शराब माफियाओं के खिलाफ भी सरकार का गठजोड़ बन गया है। पुलिस अपने दायित्वों से हटकर इन तत्वों के हाथों में खेल रही है। कांग्रेस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और पूरी मजबूती के साथ किसान के परिवार के साथ खड़ी है।
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में कमिश्नर कुमाऊँ को मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन विपक्ष इसे सिर्फ लीपापोती बता रहा है। यशपाल आर्य ने न्यायिक जांच कराने और दोषी पुलिस अधिकारियों पर हत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
    बता दें कि सुखवंत सिंह अपनी पत्नी और बेटे के साथ नैनीताल जिले के काठगोदाम क्षेत्र में घूमने गए थे। तीनों एक होटल में रुके हुए थे। पत्नी और बेटे के बाहर जाने के बाद सुखवंत सिंह ने कमरे में आत्महत्या कर ली।
    सुखवंत सिंह के पिता, तेजा सिंह ने बताया कि उनकी जमीन किसी फैक्ट्री प्रोजेक्ट में गई थी, जिसकी एवज में उन्हें चार करोड़ 70 लाख रुपये मिले थे। इसके बदले उन्होंने सात एकड़ जमीन लेने की योजना बनाई, लेकिन प्रॉपर्टी डीलरों ने उनके साथ धोखाधड़ी की। तेजा सिंह का आरोप है कि प्रॉपर्टी डीलरों ने उनके नाम पर फर्जी बेनामा कर दिया और पुलिस ने उनकी शिकायत गंभीरता से नहीं ली।
    इस घटना के बाद कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है, जबकि कुल 26 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

  • उत्तराखंड के पहाड़ों में बन रही थी MDMA ड्रग्स बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ , देश भर में हो रही थी सप्लाई, सरगना अरेस्ट

    आज पुरे देश में युवाओ को नशे ने अपने आगोश में ले लिया है। जिसके चलते देश के कई राज्यो के युवओ का भविष्य अंधकार में चला गया है । वही नशे के इस काले बाजार के हाथ उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में भी पसार लिए है ।राज्य में केवल न सिर्फ अवैध नशे की तस्करी हो रही है, बल्कि प्रदेश के सीमांत जिले में ऐसी ड्रग्स भी बनाई जा रही है और साथ ही जिसकी सप्लाई पूरे देश में की जा रही थी । नशे के कारोबार के एक मामले का उत्तराखंड पुलिस ने खुलासा किया, साथ ही गिरोह के सरगना को भी गिरफ्तार कर लिया है । उत्तराखंड डीजीपी दीपम सेठ ने खुद MDMA ड्रग्स बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया ।

    गिरोह का पर्दाफाश उत्तराखंड एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) और उधम सिंह नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने किया । जानकारी के अनुसार 31 मई 2025 को महाराष्ट्र पुलिस ने एमडीएमए ड्रग्स के साथ दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था । महाराष्ट्र पुलिस ने जब आरोपियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में नेपाल बॉर्डर पर थल क्षेत्र में मोनू गुप्ता और कुनाल कोहली नाम के व्यक्ति ने एमडीएमए ड्रग्स की फैक्ट्री लगा रखी है । वहीं से ड्रग्स तैयार कर मुंबई समेत पूरे देश में सप्लाई की जाती है ।
    महाराष्ट्र पुलिस ने ये जानकारी उत्तराखंड पुलिस के साथ साझा की । जिसके बाद 26 जून को उत्तराखंड पुलिस ने उस जगह पर छापा मारा, जहां पर एमडीएमए ड्रग्स बनाई जा रही थी । पुलिस को पॉल्ट्री फार्म से प्रिकर्सर कैमिकल्स मिला, जिसे ये ड्रग्स बनाई जाती है । हालांकि ड्र्ग्स बनाने वाले गिरोह का कोई भी सदस्य पुलिस के हाथ नहीं आया ।
    महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने पलीया नेपाल बार्डर से मोनू गुप्ता और उसके दो साथी भीम यादव व अमन कोहली को गिरफ्तार किया, जबकि कुनाल कोहली अपने साथी राहुल और विक्रम के साथ नेपाल फरार हो गया था ।

    उत्तराखंड पुलिस आरोपियों की तलाश में लगी हुई थी कि तभी 11 जुलाई को चंपावत पुलिस ने राहुल की पत्नी ईशा को पांच किलोग्राम एमडीएमए ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया । ईशा से पकड़ी गई ड्रग्स की इंटरनेशनल मार्केट में कीमत करीब दस करोड़ आंकी गई थी ।
    पूछताछ में ईशा ने बताया था कि उसके पति राहुल ने उसे इस ड्रग्स को नदी में फेंकने के लिए बोला था । क्योंकि उन्हें डर था कि पुलिस उन्हें पकड़ सकती है । हालांकि उससे पहले ही पुलिस ने ईशा को गिरफ्तार कर लिया था । वहीं राहुल और उसका साथी फरार था । ईशा की गिरफ्तारी के बाद राहुल भी पुलिस के हाथ आ गया था, लेकिन कुनाल कोहली पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहा था ।
    कुनाल कोहली की गिरफ्तार के लिए उत्तराखंड एसटीएफ लगातार प्रयास कर रही थी । इसके अवाला उत्तराखंड पुलिस की टीम एन्टी नारकोटिक्स ब्यूरो नेपाल पुलिस के संपर्क में भी थे । इसी बीच 14 जुलाई को मुखबिर की सूचना पर उत्तराखंड एसटीएफ और नानकमत्ता पुलिस ने आरोपी कुनाल को साहनी नर्सरी तिराहे नानकमत्ता से गिरफ्तार किया ।
    आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने प्रीकर्सर केमिकल मिला है, जिससे करीब 6 किलो एमडीएमए ड्रग्स बनाई जानी थी, जिसकी इंटरनेशनल बाजार में कीमत करीब 12 करोड़ रुपए होती । आरोपी कुनाल कोहली के खिलाफ उत्तराखंड के बनबसा थाने के अलावा महाराष्ट्र पुलिस ने ठाणे में मुकदमा दर्ज किया है ।

    बता दें कि एमडीएमए ड्रग्स की सप्लाई देश की बड़े-बड़े शहरों में की जाती है। इस ड्रग्स की सबसे ज्यादा मांग रेव पार्टी में होती है । मडीएमए ड्रग्स बहुत की खतरनाक ड्रग्स है, एमडीएमए ड्रग्स को लेने के बाद उत्तेजक के साथ मतिभ्रम वाली स्थिति हो जाती है ।

     

  • उधम सिंह नगर में बदमाशों और पुलिस के बीच मुठभेड़, एक आरोपी को लगी गोली, तीन गिरफ्तार

    उधमसिंह नगर जिले की रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने चेकिंग के दौरान पुलिस टीम से अभद्रता करने और तमंचा दिखाकर कार से फरार होने वाले तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग भी की. जवाबी कार्रवाई में पुलिस टीम द्वारा की गई फायरिंग में एक आरोपी घायल भी हुआ है। घायल का उपचार चल रहा है। जिसके बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

    पुलिस के मुताबिक, 10 जुलाई को रुद्रपुर कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक चंदन सिंह बिष्ट ने तहरीर देते हुए बताया कि 9 जुलाई देर रात गश्त के दौरान इन्द्रा चौक के पास एक क्रेटा कार में सवार कुछ युवकों ने पुलिस से गाली-गलौज करते हुए तमंचा दिखाकर धमकी दी। वाहन रोकने पर सरकारी वाहन को क्षतिग्रस्त कर फरार हो गए।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर टीम गठित की गई। टीम द्वारा सीसीटीवी फुटेज, वाहन नंबर, सर्विलांस और एसओजी की मदद से आरोपियों की पहचान कर उनके ठिकानों पर दबिश दी गई। इस दौरान 12 जुलाई को सूचना मिली कि आरोपी सफेद रंग की कार में बिलासपुर से रुद्रपुर आ रहे हैं। सूचना के आधार पर रामपुर रोड पर घेराबंदी की गई। संदिग्ध कार को रोकने का प्रयास करने पर आरोपियों ने वाहन तेजी से दौड़ाकर भगाने का प्रयास किया। पीछा करने पर आरोपी बारादरी के पास एक खेत में गाड़ी छोड़ भागने का प्रयास करने लगे तो टीम द्वारा आरोपियों को चारों ओर से घेर लिया गया।

    इस दौरान आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसमें पुलिस दल बाल बाल बचा। जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी। जिसके बाद तीनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया।

    पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम रिशु श्रीवास्तव निवासी हरदोई उत्तर प्रदेश, हाल किरायेदार पंतनगर रुद्रपुर (घायल), खुश नंदू निवासी गदरपुर और वीरेंद्र साहनी उर्फ विक्की निवासी रुद्रपुर उधम सिंह नगर बताया है। आरोपियों ने बताया कि वह उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं नई दिल्ली आदि स्थानों पर तमंचा दिखाकर लूट, स्नैचिंग आदि घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। घायल आरोपी रिशु का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है। सभी आरोपियों को संबंधित धाराओं में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा।

     

  • पुलिस की गिरफ्त में शातिर लुटेरी दुल्हन

    उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में पुलिस ने एक ऐसी शातिर महिला को गिरफ्तार किया है, जो कभी दुल्हन का किरदार निभाती तो कभी बिजनेसमैन बनकर लोगों का भरोसा जीतती है। कई बार तो यह महिला ब्रांड एंबेसडर बनकर भी लोगों को चूना लगा चुकी है. हालांकि अब ये महिला उधम सिंह नगर पुलिस की गिरफ्त में आ चुकी है। इस महिला ने दुल्हन बनकर भी कई लोगों को लूटा है।

    उधम सिंह नगर पुलिस ने जब इस महिला को गिरफ्तार किया, तब भी यह दुल्हन के रूप में थी। हाथों में चूड़ा और मेहंदी, माथे पर सिंदूर. महिला को देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि इसके अपराधों की लिस्ट इतनी लंबी है। उधम सिंह नगर पुलिस ने पूरा जाल बिछाकर इस महिला और उसके पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया है। उधम सिंह नगर एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने इस पूरे मामले का खुलासा किया।

    एसएसपी मिश्रा ने बताया कि यह महिला अलग-अलग पहचान से लोगों को ठगने का काम कर रही थी। काशीपुर की रहने वाली हिना रावत पर कई तरह के गंभीर आरोप है। इस महिला का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है।

    पुलिस की गिरफ्त में यह महिला पुलिस की गिरफ्त में शायद कभी न आती अगर रुद्रपुर के ही रहने वाले दीपक कक्कड़ यदि इसके जाल में न फंसते। दीपक कक्कड़ ने इस महिला की पुलिस को शिकायत की थी। उन्होंने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया था कि एक महिला उन्हें हाईकोर्ट की वकील बनकर मिली। दोनों के बीच बातचीत हुई, इसके बाद ही महिला ने पीड़ित को अपने प्रेम जाल में फंसाकर करीब पांच लाख रुपए हड़प लिए।

    आरोप है कि महिला ने दबाव बनाकर दीपक कक्कड़ से शादी भी करी और फिर उसी के घर में रहने लगी। घर में रहने के बाद महिला पूरे परिवार को प्रताड़ित करने लगी, पैसे की डिमांड और आत्महत्या जैसे मामलों में परिवार को फसाने की धमकी देने लगी। इसके बाद दीपक कक्कड़ के पास गए और महिला की शिकायत की।
    पुलिस ने शुरुवाती जांच में पकड़ा की महिला को लेकर दीपक कक्कड़ पुलिस को जानकारी दी थी, वो सभी पुलिस की जांच में फर्जी निकली। पुलिस ने तत्काल रुद्रपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करके आगे की जांच शुरू कर दी। गिरफ्तारी के दौरान महिला के पास से ₹50000 नगद और फर्जी आधार कार्ड बरामद किया गया। लेकिन रुद्रपुर पुलिस इस मामले में और भी आगे तक जांच करना चाहती थी और जांच में पुलिस को जो मालूम हुआ उसने सभी के होश उड़ा दिए।
    पुलिस ने बताया कि वह दीपक पर दबाव डालकर फिरौती की 50 हजार रुपये की रकम ले ही रही थी कि पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस ने ये भी जांच पाया कि महिला कभी अपना नाम हीना रावत बताती तो कभी निकिता तो अभी अंकिता और इसी तरह से वो ठगी का जाल बिछा कर लोगों को फसा रही थी।

    हीना कभी खुद को एक सफल बिजनेसमैन बताती थी तो कभी कुछ, हिना नए-नए बिजनेस में निवेश का झांसा या साझेदारी की पेशकश करके लोगों को अपने जाल में फंसाती थी। फिर आकर्षक व्यापारिक सौदों का लालच देकर उनसे मोटी रकम ऐंठ लेती थी, जिसके बाद वह गायब हो जाती थी।
    आरोपी महिला कभी खुद को नामी कंपनी की ब्रांड एंबेसडर के रूप में प्रस्तुत करती थी। वह ग्लैमर और ऊंचे संपर्कों का ढोंग करके लोगों को प्रभावित करती थी। इस पहचान का उपयोग करके वह उनसे विज्ञापन या इवेंट के नाम पर पैसे वसूलती थी, जिसके बाद वह संपर्क तोड़ देती थी।
    हिना रावत ठेकेदार बनकर भी लोगों को लूटती थी. वह सरकारी या निजी परियोजनाओं के लिए बड़े-बड़े कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का वादा करती थी। प्रोजेक्ट शुरू करने या टेंडर दिलाने के नाम पर वह सिक्योरिटी डिपॉजिट या अग्रिम भुगतान के रूप में मोटी रकम वसूल लेती थी।
    यह महिला खुद को हाईकोर्ट का एडवोकेट बताकर लोगों को ठगती थी। वह नामी वकीलों के नाम का इस्तेमाल करके कोर्ट के कामों को निपटाने का झांसा देती थी। इसके अलावा, वह बड़े-बड़े अपराधियों से साठगांठ करके उन्हें कानूनी पचड़ों से निकालने के नाम पर पैसे ऐंठती थी। वह आपराधिक मामलों में रियायत दिलाने या जमानत दिलवाने का झूठा आश्वासन देकर मोटी रकम वसूलती थी।
    हीना मैट्रिमोनियल साइटों पर खुद को अविवाहित और योग्य दुल्हन के रूप में पेश करती थी। वह लोगों को प्रेम जाल में फंसाकर शादी करती थी और फिर उन्हें बलात्कार के झूठे मुकदमे में फंसा कर मोटी रकम ऐंठती थी। अपनी पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिए हिना लगातार अलग-अलग मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल करती थी।