Category: गैरसैंण

  • सदन में मुख्यमंत्री की हाइट पर हुई टिप्पणी, धामी ने भी शायराना अंदाज में दिया जवाब

    गैरसैंण: उत्तराखंड बजट सत्र के पांचवें दिन जब दोपहर सवा 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त हुआ तो मद 7 के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर धामी अपना वक्तव रखने सदन में पहुंचे। जैसे ही वो बोलने के लिए खड़े हुए कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने कांग्रेस को पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी की याद दिलवा दी। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सदन में अपने बयानों से ही नहीं अपने एक्सप्रेशन और हरफनमौला अंदाज से भी विपक्ष के साथ आम जनता का भी दिल लूट लेते हैं। ऐसा ही कुछ वाकिया आज तब देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रश्नकाल के बाद सदन में पहुंचे।
    सदन में पुष्कर सिंह धामी गैरसैंण बजट सत्र के पांचवें दिन मद 7 के तहत विविध वक्तव्य रखने के लिए आए। जिसमें वो उत्तराखंड सरकार की ओर से गुड गवर्नेंस में हासिल की गई उपलब्धि को लेकर अपना वक्तव्य रखने के लिए खड़े हुए और बोलने लगे। तभी सामने विपक्ष की ओर से आवाज आई की थोड़ा तेज बोलिए, आवाज नहीं आ रही है।
    इस पर सीएम धामी बोले कि ‘मेरी लंबाई ज्यादा है तो क्या करूं.’ इतने में विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूड़ी भी बोलीं कि ‘माइक लंबे करने पड़ेंगे…’ इसके बाद सामने से कांग्रेस विधायक बहुत सारी टिप्पणियां करने लगे और मुख्यमंत्री से मजाक करने लगे। इस पर मुख्यमंत्री धामी ने अपने चिर परिचित अंदाज में मुस्कुराते हुए कांग्रेस विधायकों को बोले कि वो तिवारी जी क्या कहते थे ध्यान है? ‘यूं तो यहां आने वाला हर कोई शक्त मेरे से बढ़ा है, लेकिन मेरा कद भी कुछ कम नहीं। ‘
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की इन पंक्तियों को सदन में जब दोहराया और कांग्रेस के नेताओं से पूछा की याद है या नहीं, तो धामी की हाजिर जवाबी को देख कर सदन में हर कोई स्तब्ध रह गया।
    वहीं, सामने विपक्ष से जो टिप्पणी कर रहे थे, उनमें यशपाल आर्य, काजी निजामुद्दीन, हरीश धामी, विक्रम नेगी, इंजीनियर रवि बहादुर, भुवन कापड़ी सभी के चेहरे पर सीएम धामी के इस शायराना अंदाज के बाद मुस्कुराहट थी। इसके बाद आगे गुड गवर्नेंस की अपनी उपलब्धि के बारे में वक्तव्य रखा।
    उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य को हाल के सालों में वित्तीय प्रबंधन, राजकोषीय अनुशासन और गुड गवर्नेंस के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी राज्य के रूप में मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले नीति आयोग की ओर से प्रकाशित मार्च 2026 में राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2026 का दूसरा संस्करण जारी किया गया, जो राज्यों के वित्तीय प्रदर्शन का आकलन करता है।
    उसमें दोबारे उत्तराखंड के वित्तीय प्रबंधन को सराहा गया है।इस रिपोर्ट में उत्तराखंड को उत्तरपूर्वी हिमालय राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान मिला हुआ है। यह रैंकिंग मुख्यतः राजस्व रैंकिंग, व्यव की गुणवत्ता, डेफसेट मेनेजमेंट और ऋण प्रबंधन में सुधार का द्योतक है. इसके अलावा अरुण जेटली फाइनेंशियल मैनेजमेंट की रिपोर्ट में उत्तराखंड को विशेष दर्जा प्राप्त हिमालय राज्यों में अरुणाचल के बाद दूसरा स्थान मिला है।
    उन्होंने कहा कि महालेखाकार से मिले रिपोर्ट के अनुसार भी हमने पीआरबीएम में निर्देशित मानकों का पालन किया है। रेवन्यू सरप्लस के स्टेटस को मैंटेन रखा है। हमारा फिजिकल डेफिसेट जीएसडीपी की निर्धारित सीमा के अंतर्गत है।

  • विधानसभा के बजट सत्र का आज चौथा दिन, विपक्ष तमाम सवालों सो सरकार को घेरने की तैयारी

    चमोली: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 का आज चौथा दिन है। आज भी सदन की कार्यवाही महत्वपूर्ण रहने वाली है। दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से होगी, जिसमें विधायक अपने-अपने क्षेत्रों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछेंगे।
    प्रश्नकाल के बाद सदन में राज्य के बजट पर सामान्य चर्चा जारी होगी। सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी-अपनी राय रखेंगे। विपक्ष जहां बजट में की गई घोषणाओं और प्रावधानों को लेकर सरकार से सवाल पूछेगा, वहीं सत्ता पक्ष इसे राज्य के विकास के लिए संतुलित और दूरदर्शी बजट बताएगा।
    बजट पर चर्चा के दौरान प्रदेश के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पर्यटन और कृषि जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी बात होने की संभावना है। कई विधायक अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को भी सदन में उठाकर सरकार का ध्यान उन समस्याओं की ओर दिलाने की कोशिश करेंगे।
    बजट पर सामान्य चर्चा के बाद सदन में नियम 58 के तहत लिए गए विषयों पर भी चर्चा होगी। नियम 58 के तहत ऐसे मामलों को सदन में उठाया जाता है जो जनहित से जुड़े और महत्वपूर्ण होते हैं। इन मुद्दों पर विधायक सरकार से जवाब मांगते हैं और संबंधित विभागों की ओर से स्थिति स्पष्ट की जाती है।
    कार्यसूची के अनुसार आज विभागवार बजट पर चर्चा नहीं होगी। विभागवार बजट पर विस्तृत चर्चा संभवतः कल से शुरू की जाएगी। विभागवार चर्चा के दौरान अलग-अलग विभागों के बजट प्रावधानों, योजनाओं और कार्यों को लेकर विधायक अपनी बात रखते हैं और जरूरत पड़ने पर सरकार से स्पष्टीकरण भी मांगते हैं।
    गैरसैंण में चल रहा यह बजट सत्र राज्य की आगामी वित्तीय योजनाओं और विकास की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में सत्र के चौथे दिन भी सदन में बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। साथ ही नियम 58 के तहत उठाए गए मुद्दों पर भी सरकार का जवाब महत्वपूर्ण रहेगा।

     

     

  • शिक्षा की आड़ में राष्ट्र विरोधी गतिविधियां नहीं पनपने देंगे,मदरसों की आड़ में आतंक की फैक्ट्री नहीं चलने देंगे- सीएम धामी

    गैरसैंण: बुधवार को बजट सत्र के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विपक्षी दल कांग्रेस पर जमकर भड़के। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ नेता हमें मदरसा विरोधी कहते हैं। सीएम धामी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने मुस्लिम वोट बैंक के लालच में अन्य अल्पसंख्यकों की अनदेखी की। उन्होंने भू कानून लाने का औचित्य भी बताया।
    सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदाय को हमेशा अपनी राजनीति का टूलकिट समझा है। उनको हमेशा वोट बैंक बनाकर रखा। अल्पसंख्यक समुदाय उनके टूलकिट तक ही सीमित रहा और उनका हाथ थामे रहा। हमारी सरकार चाहती है कि अल्पसंख्यक सिर्फ टूलकिट नहीं रहे बल्कि उनके हाथ में अच्छी किताब हो।
    इसके साथ ही सीएम धामी ने मदरसा अधिनियम पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में कांग्रेस सरकार के समय में उत्तराखंड मदरसा अधिनियम लागू किया गया था। कांग्रेस का मानना था कि अल्पसंख्यक समाज में सिर्फ मुस्लिम ही हैं। उन्होंने बाकी अल्पसंख्यकों को इससे दूर रखने का प्रयास किया। हमारी सरकार ने इसमें सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध और जैन को भी नए कानून के अंतर्गत समान अधिकार देने का काम किया है। वोट बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण ने देवभूमि की जिस पहचान को कलंकित किया था, हमने उस कलंक को मिटाने का काम किया है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिपक्ष के कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि हमारी सरकार को हमको मदरसा शब्द से परेशानी है। इसलिए हम अवैध मदरसों पर कार्रवाई करते हैं। यदि किसी मदरसे की आड़ में आतंक की फैक्ट्री चलाई जाएगी, यदि कहीं भी शिक्षा की आड़ में राष्ट्र विरोधी गतिविधियां सिखाई जाएंगी, तो हां हमें परेशानी होगी। हम ऐसे किसी भी राष्ट्र विरोधी तत्व को देवभूमि उत्तराखंड में संकल्प लेकर पनपने नहीं देंगे।
    अपने भाषण में काफी आक्रामक नजर आए सीएम धामी ने कहा कि हम जन-जन के विकास और विश्वास की राजनीति करते हैं। कांग्रेस विश्वासघात और वोट बैंक की राजनीति करती है। आज पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से उत्तराखंड के अंदर 2 लाख करोड़ से भी ज्यादा की विकास योजनाओं पर काम किया जा रहा है। हमारी सरकार उत्तराखंड के समग्र विकास जनता के कल्याण और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रही है। हमार संकल्प विकल्प रहित संकल्प है. ये संकल्प इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच समन्वय स्थापित करने का।हमारा विकल्प रहित संकल्प है उत्तराखंड को विश्व की पर्यटन और आध्यात्मिक राजधानी बनाने का हमारा संकल्प है मातृशक्ति के सशक्तिकरण का।
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है कि प्रदेश के बाहर से आकर लोग कह रहे हैं कि हम बड़ा उद्योग स्थापित करेंगे, कोई कह रहा है इंस्टीट्यूशन बनाएंगे, कोई कहता है सामाजिक काम करेंगे। कोई कहता है अस्पताल बनाएंगे। कोई स्थानीय लोगों को रोजगार देने के नाम पर बड़ी-बड़ी जमीनें खरीद रहे थे. ऐसे लोग बड़ी-बड़ी जमीनें खरीद रहे थे। उनका प्रयोजन कुछ और होता था। इसलिए हमने राज्य के अंदर सख्त भू कानून लागू किया। हमने ऑपरेशन कालनेमि चलाकर उन असामाजिक तत्वों और जिहादियों पर सख्त कार्रवाई की है, जिन्होंने छद्म वेश धारण करके सनातन धर्म के पालन के लिए धार्मिक यात्रा पर आने वाले लोगों से ठगी की है। नाम बदलकर, वेश बदलकर, अपनी पहचान छिपाकर वो लोगों को भरमाने का काम करते हैं। हमने ऐसे विधर्मियों और घुसपैठियों को देवभूमि उत्तराखंड में बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम उन्हें वहीं वापस भेज देंगे, जहां से वो आए हुए हैं।

     

  • बजट सत्र के दूसरे दिन गैरसैंण में कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस ने वाटर कैनन से रोका

    गैरसैंण : उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत सहित कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता विधानसभा कूच के लिए निकले। भराड़ीसैंण विधानसभा के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्थायी राजधानी गैरसैंण, प्रदेश में कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया।
    इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।
    इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, हरक सिंह रावत और गणेश गोदियाल समेत कई नेता पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स पर चढ़कर वहीं धरने पर बैठ गए। करीब तीन घंटे तक दिवालीखाल क्षेत्र स्थायी राजधानी गैरसैंण और अंकिता को न्याय दो जैसे नारों से गूंजता रहा।
    हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड और गैरसैंण के विकास के लिए जो रोडमैप तैयार किया गया था, वह आगे नहीं बढ़ पाया है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पानी की बौछारें कर तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है।
    हरक सिंह रावत ने कहा कि अब भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता को आवाज उठानी होगी। प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने भी सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
    सत्र के पहले दिन यूकेडी के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में आई कमी को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मंगलवार को सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इसके बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच दिवालीखाल बैरियर पर लंबे समय तक धक्का-मुक्की होती रही। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा।
    प्रदर्शन के दौरान बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, नगर पंचायत अध्यक्ष गैरसैंण मोहन भंडारी, ब्लॉक प्रमुख द्वाराहाट डॉ. आरती कीरोला, नगर पंचायत अध्यक्ष थराली सुनीता रावत सहित कई कांग्रेसी नेता मौजूद रहे।
    विधानसभा कूच के दौरान दिवालीखाल में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने वाटर कैनन वाहन पर चढ़कर कानून व्यवस्था संभाली। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान धक्का-मुक्की में कई पुलिसकर्मी चोटिल भी हुए। इस बीच कुछ कांग्रेसी नेता वाहन से छिपकर भराड़ीसैंण पहुंच गए। मुख्य चेकिंग गेट पर सुरक्षा कर्मियों को संदेह होने पर वाहन की तलाशी ली गई। वाहन में अधिकृत पास नहीं था और कांग्रेस के झंडे भी मिले। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर दिवालीखाल बैरियर पर ले जाया गया।

     

  • CAG रिपोर्ट में नमामी गंगे योजना को लेकर बड़े खुलासे

    गैरसैंण: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में पेश हुई CAG रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने नमामि गंगे योजना और गंगा के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए।
    गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में चल रहे बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में पेश हुई CAG की रिपोर्ट को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट उत्तराखंड में गंगा की स्थिति और नमामि गंगे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को इस पर जवाब देना होगा।
    काजी निजामुद्दीन ने कहा CAG रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की प्रयोगशालाएं मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कई प्रयोगशालाएं मान्यता प्राप्त भी नहीं हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता की जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हरिद्वार में गंगा का पानी बी श्रेणी का पाया गया है, जो सीधे पीने योग्य नहीं माना जाता। ऐसे में यह चिंता का विषय है कि जिस गंगा जल को करोड़ों लोग आस्था के रूप में देखते हैं, उसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर स्थिति सामने आ रही है।
    कांग्रेस विधायक ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट राष्ट्रीय हरित अधिकरण के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसके अलावा 18 एसटीपी की कमी बताई गई है। कई एसटीपी बंद पड़े हुए हैं।
    उन्होंने कहा CAG की रिपोर्ट को पढ़ने से साफ दिखाई देता है कि नमामि गंगे योजना का उत्तराखंड में हाल ठीक नहीं है। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
    काजी निजामुद्दीन ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस गंगा जल को स्वच्छ रखने के लिए इतना पैसा खर्च किया जा रहा है, अगर वही गंगा जल लोगों को शुद्ध रूप में नहीं मिल पा रहा है तो सरकार को जवाब देना चाहिए कि आखिर वह कर क्या रही है?।
    उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि क्या सरकार केवल हिंदू-मुस्लिम की राजनीति और मजार तोड़ने के लिए बनी है या फिर जनता और आस्था से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीरता से काम करेगी। काजी निजामुद्दीन ने कहा गंगा करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र है। अगर गंगा जल की स्थिति खराब है तो इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है और सरकार को इस पर सदन और जनता के सामने जवाब देना होगा।

     

  • विधानसभा सत्र के दूसरे दिन विपक्षी विधायकों ने अपने विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा की पहाड़ियों पर बैठकर प्रदर्शन किया

    गैरसैण। उत्तराखंड बजट विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्रवाई शुरू हो गई। सदन में आज कई विधायकों को संशोधन के लिए प्रस्तुत किया जाना है । इस दौरान विधायकों के विकास कार्यों से जुड़े जो प्रश्न लगे हुए हैं उनके जवाब भी सरकार को देने हैं।
    उत्तराखंड का बजट सत्र का दूसरा दिन शुरू होने से पहले विपक्षी विधायकों ने अपने विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा की पहाड़ियों पर बैठकर प्रदर्शन किया और उसे दौरान विधायक अपने-अपनी शक्तियां लेकर बैठे हुए थे। विधायकों का कहना था कि प्रदेश की सट्टा रोड सरकार बजट सत्र को मात्र चार या पांच दिन में निर्मित आने की बात कर रही है जबकि यह बजट सत्र मात्रा लगभग 30 दिन चलना चाहिए था अगर 30 दिन नहीं चला सकते तो कम से 21 दिन का तो होना ही चाहिए था लेकिन सरकार ने जो बजट सत्र का टाइम 9 तारीख से लेकर 13 तारीख तक रखा है सरकार की वर्तमान हालात से लग रहा है कि बजट जो है 13 से पहले ही विधानसभा सत्र को समाप्त कर देगी और उसे हालत में प्रदेश के जुड़ी हुई समस्याओं का विधायक जो है अपने सदन में नहीं उठा पाएंगे। विपक्षी विधायकों का कहना था कि जब वह सदन के अंदर अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को नहीं उठा पाएंगे तो उनका निराकरण कैसे होगा सरकार जनता की समस्याओं को सुनने के लिए तैयार नहीं है इसीलिए वह सत्र की समय सीमा लगातार घटती जा रही है।
    कैबिनेट मंत्री सौरभ बहू बने कहा कि विपक्ष सरकार पर सत्र ना चलने लगातार आरोप लगा रहा है सरकार सत्र चलाने के लिए पूरी तैयारी के साथ तैयार है वह अगर सदन में इस बात की चर्चा करते हैं कि सत्र की अवधि बढ़ाई जाए तो सरकार को कोई एतराज नहीं होगा लेकिन वह सत्र के अंदर इस तरह का कोई मुद्दा नहीं उठाते हैं और विधानसभा के बाहर बैठकर केवल राजनीति करने का काम कर रहे हैं।
    संसदीय कार्य मंत्री सुबोध निहाल का कहना है कि प्रदेश सरकार विपक्ष प्रत्येक सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और वह प्रत्येक बात उनकी सुनने के लिए सदर में बैठी हुई है विपक्षी विधायकों को सदन में अपने-अपने सवाल जो उन्होंने उठाए हैं निर्धारित किए हैं उनका सब का जवाब दिया जाएगा जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रदेश सरकार सदन में धारा 310 के अंतर्गत चर्चा करने की तैयारी कर रही है तो उन्होंने कहा सरकार किसी भी सवाल से किसी भी तरह नहीं भाग रही है वह सदन में हर तरह की चर्चा करने के लिए तैयार है।

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    गैरसैण। विधानसभा के बाहर जब विपक्षी सांसद सत्य लेकर प्रदर्शन कर रहे थे उसी समय विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी और संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल पहुंच गए और विधानसभा अध्यक्ष संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्षी विधायकों के साथ जमकर हंसी मजाक की और हंसी मजाक करने के बाद सभी विधायकों को सदन के अंदर चलने का अनुरोध किया। उन्होंने विधायकों से कहा कि आपकी जो भी समस्या है जो भी आपको अपनी बात कहनी है वह सदन के अंदर उठाएं सरकार पूरी तरीके से उनका सवाल उठाने में सहयोग करेगी और उनके प्रश्नों का पूर्ण रूप से जवाब देगी।
    विधानसभा अध्यक्ष व संसदीय कार्य मंत्री के अनुरोध के कुछ करने के कुछ देर बाद ही कांग्रेस के विपक्षी विधायक सदन के अंदर चले गए । जब विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री विपक्षी विधायकों के साथ हंसी मजाक कर रहे थे उसे समय ऐसा लग रहा था कि दोनों दोनों दलों के बीच जिस तरीके की कटुता नजर आ रही है लेकिन वह इस हंसी मजाक से स्पष्ट रूप से कटुता आए कि उनके विश्व कठौता नहीं है लेकिन अपनी-अपनी नीतियों को लेकर आमने-सामने जरूर नजर आ रहे हैं।

  • वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए उत्तराखंड का बजट पेश

    गैरसैंण: उत्तराखंड विधानसभा बजट सत्र गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा में चल रहा है. जिसके तहत आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026–27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपए का बजट सदन में पेश किया। बजट में नई योजनाओं, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है। धामी सरकार ने इसे संतुलन  मॉडल पर आधारित बजट करार दिया है।
    सरकार ने बजट को संतुलन  मॉडल पर आधारित बताया है। इसमें समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता, तेज विकास, नई सोच, उन्नत गांव शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति और न्यायपूर्ण व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। खास बात ये है कि बजट में विकास की दिशा को केदार और मानस थीम के तहत तय किया गया है। जिसमें कौशल विकास, इकोलॉजी संरक्षण, धरोहर संरक्षण, अवसंरचना निर्माण के साथ रिवर्स माइग्रेशन पर फोकस किया गया है।
    उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साल 2026-27 का बजट सदन में पेश किया। इस बार राज्य का कुल बजट आकार ₹1,11,703.21 यानी 1 लाख 11 हजार 703 करोड़ रुपए का रखा गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 10.41 फीसदी ज्यादा है. सरकार ने इस बजट को विकास, रोजगार, पर्यटन और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित बताया है।
    सरकार ने इस बजट में विभिन्न विभागों की पूंजीगत योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण धनराशि का प्रावधान किया है। शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए ₹542.84 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग के लिए ₹146.30 करोड़ और तकनीकी शिक्षा विभाग के लिए ₹98.50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
    समावेशी विकास:
    सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में समग्र रूप से लगभग ₹1327.73 करोड़,
    अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना हेतु ₹600 करोड़,
    सक्षम आंगनबाडी एंड पोषण 2.0 योजना हेतु समग्र रूप से लगभग ₹598.33 करोड़,
    ईडब्ल्यूएस आवासों हेतु अनुदान के अंतर्गत ₹25 करोड़,
    राज्य खाद्यान्न योजना के अंतर्गत ₹25 करोड़,
    प्रधानमंत्री पोषण मिशन हेतु समग्र रूप से लगभग ₹149.45 करोड़,
    मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना हेतु ₹30 करोड़,
    मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना हेतु ₹15 करोड़,
    राज्य में प्रसूता के लिए ईजा-बोई शगुन योजना हेतु समग्र रूप से लगभग ₹14.13 करोड़,
    मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना हेतु लगभग ₹13.44 करोड़,
    मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना हेतु ₹15.00 करोड़,
    मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि ₹8.00 करोड़,
    स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए ₹195.46 करोड़ और चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए ₹126.37 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं।
     बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पेयजल विभाग को ₹1,827.91 करोड़, ग्रामीण विकास विभाग को ₹1,642.20 करोड़ और शहरी विकास विभाग को ₹1,401.85 करोड़ का प्रावधान दिया गया है।
    ऊर्जा विभाग के लिए ₹1,609.43 करोड़ और लोक निर्माण विभाग के लिए ₹2,501.91 करोड़ का बजट रखा गया है, जिससे सड़क और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास को गति मिलेगी।
     सरकार की नई योजनाओं की घोषणा ,
    संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान हेतु ₹28 करोड़,
    खनन सर्विलांस योजना के अंतर्गत ₹24.50 करोड़,
    विद्यालयी शिक्षा विभाग के अन्तर्गत छात्रवृति हेतु ₹15 करोड़,
    उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत छात्रवृति हेतु ₹15.00 करोड़,
    खेल विभाग के अंतर्गत छात्रवृति हेतु लगभग ₹13.50 करोड़,
    उद्यमिता, कौशल एवं नवाचार योजना के अन्तर्गत लगभग ₹7.11 करोड़,
    राजकीय महाविद्यालयों में ई-ग्रंथालय की स्थापना हेतु ₹7.00 करोड़,
    लैब ऑन व्हील्स योजना के लिए ₹4.00 करोड़,
    राज्य डॉटा सेंटर सुदृढ़ीकरण के लिए समग्र रूप से ₹65.00 करोड़,
    सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना के अन्तर्गत लगभग ₹47.50 करोड़,
    पहाड़ी शहर में नगर निकायों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने हेतु ₹30.00 करोड़,
    साइबर सिक्योरटी के क्रियान्वयन हेतु ₹15.00 करोड़,
    इमरजिंग टेक्नोलॉजी एवं AI (COE) के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹11.50 करोड़,
    शहरी क्षेत्रों में पैदल मार्ग अवसंरचना के अन्तर्गत ₹10.00 करोड़,
    विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अन्तर्गत ₹6.71 करोड़,
    पैक्स के कम्प्यूटरीकरण हेतु लगभग ₹5.67 करोड़,
    जनपदों में केंद्रीकृत रिकॉर्ड रूम के अन्तर्गत ₹10.00 करोड़,
    यूनीफार्म सिविल कोड के अन्तर्गत रुपये ₹5 करोड़,
    कुंभ मेले के लिए अवस्थापना विकास के लिए भारत सरकार से ₹1,027 करोड़ के अनुदान का प्रस्ताव रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन के लिए ₹705.25 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
    सरकार का संतुलन मॉडल
    पशुपालन विभाग के अंतर्गत स्वरोजगार परक व लाभार्थीपरक योजना हेतु लगभग ₹42.02 करोड़,
    समग्र रूप से मिशन एप्पल के लिए ₹42.00 करोड़,
    ट्राउट प्रोत्साहन योजना हेतु लगभग ₹39.90 करोड़,
    उच्च मूल्य वाले फलों (कीवी, ड्रेगन फ्रूट आदि) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगभग ₹30.70 करोड़,
    राज्य में चाय विकास योजना के लिए लगभग रु 25.93 करोड़,
    सगंध पौधा केन्द्र को अनुदान एवं सगंध पौधों के कलस्टर विकास के लिए लगभग ₹24.75 करोड़,
    फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ के लिए ₹20 करोड़,
    प्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों को सहायता योजना के लिए ₹75 करोड़,
    मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए ₹60 करोड़,
    प्रमोशन ऑफ इंवेस्टमेंट, स्टार्टअप और इंटरप्रीनियोरशिप के लिए ₹30 करोड़,
    स्टार्ट अप वेंचर फंड के लिए ₹25 करोड़,
    मेगा इंडस्ट्रियल एवं मेगा टेक्सटाईल नीति के तहत अनुदान के लिए ₹25 करोड़,
    इको टूरिज्म गतिविधियों के लिए समग्र रूप से ₹18.50 करोड़,
    हरिद्वार गंगा कॉरिडोर परियोजना ₹10 करोड़,
    ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना ₹10 करोड़,
    सरयू एवं अन्य रिवर फ्रंट योजनाओं के लिए ₹10 करोड़,
     महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्भया फंड के लिए ₹112.02 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
    पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए अवस्थापना निर्माण के लिए ₹100 करोड़ रखे गए हैं।
    धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए हरिद्वार गंगा कॉरिडोर परियोजना और ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना के लिए ₹10-10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। साथ ही स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन के विकास के लिए ₹10 करोड़ का बजट रखा गया है। इसके साथ ही नंदा देवी राजजात यात्रा के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
    पीएमजीएसवाई योजना के अंतर्गत पूंजीगत मद में ₹1050 करोड़,
    गड्ढा मुक्त सड़क अभियान के लिए ₹400 करोड़,
    नागरिक उड्डयन विभाग के तहत समग्र रूप से पूंजीगत मद में लगभग ₹52.50 करोड़,
    विकसित भारत-जी राम जी हेतु समग्र रूप से लगभग ₹705.25 करोड़,
    ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत समग्र रूप से पूंजीगत मद में ₹1642.20 करोड़,
    वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के लिए ₹40 करोड़,
    शहरी निकायों के लिए समग्र रूप से रुपये ₹1814 करोड़ एवं पंचायती राज संस्थाओं हेतु ₹1491 करोड़,
    आवास विकास विभाग के अंतर्गत अवस्थापना सुविधाओं के विकास आदि हेतु ₹130 करोड़,
    नगरीय अवस्थापना के सुदृढ़ीकरण हेतु ₹60 करोड़,
    तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए साइबर सिक्योरिटी के क्रियान्वयन के लिए ₹15 करोड़ और इमरजिंग टेक्नोलॉजी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के लिए ₹10.50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
    इसके अलावा महक क्रांति योजना के लिए ₹10 करोड़, हाउस ऑफ हिमालयाज के लिए ₹5 करोड़ और उत्तराखंड एवं भारत दर्शन योजना के लिए ₹4.50 करोड़ का बजट रखा गया है। सरयू और अन्य रिवर फ्रंट योजनाओं के लिए ₹10 करोड़ का प्रावधान भी किया गया है।
     राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी का सुदृढ़ीकरण/आईटीडीए को अनुदान- 25 करोड़, राज्य डाटा सेंटर सुदृढीकरण के लिए 40 करोड़, एआई मिशन के क्रियान्वयन हेतु एसपीवी गठन के लिए 25 करोड़ व विज्ञान केंद्र चंपावत के लिए 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
    आर्थिक शक्ति:
    रिस्पना बिंदाल की एलिवेटेड यूटिलिटी शिफ्टिंग – ₹350 करोड़,
    टिहरी रिंग रोड परियोजना – ₹10 करोड़,
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना – ₹1050 करोड़,
    स्टार्ट अप वेंचर फंड हेतु – ₹25 करोड़,
    प्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों को सहायता योजना के लिए – ₹75 करोड़,
    मेगा इंडस्ट्रियल एवं मेगा टेक्सटाईल नीति के तहत अनुदान के लिए- रु 25.00 करोड़,
    इको टूरिज्म गतिविधियों के लिए समग्र रूप से – ₹18.50 करोड़,
    प्रमोशन ऑफ इंवेस्टमेंट, स्टार्टअप और इंटरप्रीनियोरशिप के लिए- ₹30 करोड़,
    मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए- ₹60 करोड़,
    आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ‘आपदा सखी’ योजना के लिए ₹2 करोड़ और रेस्क्यू सेंटर के लिए ₹19 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है। ग्राम स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्राम प्रहरी योजना के लिए ₹5 करोड़ रखे गए हैं।
    इसके साथ ही युवाओं और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर स्टेडियम निर्माण के लिए ₹10 करोड़ का प्रावधान किया गया है. नशा मुक्ति केंद्रों के लिए ₹4.50 करोड़ और पुस्तकालय निर्माण के लिए ₹5 करोड़ का बजट भी प्रस्तावित किया गया है।
    युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विदेश रोजगार प्रकोष्ठ के लिए ₹3.73 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के माध्यम से राज्य में पर्यटन, रोजगार, तकनीक और सामाजिक विकास को नई गति दी जाएगी।
    न्यायपूर्ण व्यवस्था:
    पुलिस आवास – ₹100 करोड़,
    इंडिया रिजर्व वाहिनी की स्थापना – ₹10 करोड़,
    स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स – ₹10 करोड़,
    आंतरिक सुरक्षा हेतु केन्द्रीय पुलिस बल आदि को भुगतान – ₹2.50 करोड़,
    जेलों का निर्माण / भूमि क्रय – ₹25 करोड़,
    कारागार हेतु आवासीय भवनों का निर्माण – ₹10 करोड़,
    उत्तराखंड न्यायिक एवं विधिक अकादमी – ₹6.96 करोड़,
    रेप एंड पॉक्सो एक्ट के लंबित प्रकरणों हेतु फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट – ₹3.42 करोड़,
  • बजट सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष का प्रदर्शन

    गैरसैण। उत्तराखंड के बजट सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष के विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में विधानसभा गैर सेंड के बाहर प्रदर्शन किया तथा सरकार से विधानसभा सत्र को लगभग 30 दिन तक चलने की मांग की विपक्ष के नेताओं का कहना था की प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार संसदीय परंपराओं को तक पर रख रही है और बजट सत्र मात्र 5 दिन का चलाकर केवल खाना पूर्ति करने का काम कर रही है।
    नेता विपक्ष यशपाल आर्य का कहना था कि के संसदीय इतिहास में इस बजट सत्र में का यह कल दिन है कि जिस दिन राज्यपाल का अभी भाषण होता है वह सभी भाषण पर दो दिन तक चर्चा करने की परंपरा है लेकिन प्रदेश सरकार राज्यपाल के अभी भाषण के बाद ही प्रदेश का बजट रखने का जा रही है जिससे संसदीय परंपराओं का पूरी तरह उल्लंघन हो रहा है।
    विधानसभा में उप नेता भवन कापड़ी का कहना है की प्रदेश की सरकार के मुखिया के पास 40 विभाग हैं और वह अपने विभागों से जुड़े सवालों से बचने का प्रयास करते हैं और यदि उनके विभाग का सवाल लगाया जाता है तो वैसे विभाग का जवाब तक नहीं देते हैं जिससे जनता की समस्याओं को विपक्ष तो उठाता है लेकिन सरकार जो है उन पर जवाब देने से बचती है।

    गैरसैण। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू होते ही विपक्ष ने प्रदेश सरकार की संसदीय परंपराओं को तोड़ने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष एक तरफ हंगामा करता रहा वहीं राज्यपाल अपना अभी भूषण लगातार पढ़ते रहे। विपक्ष के विधायक राज्यपाल के अभी भाषण के दौरान गैलरी में आ रहा है और गैलरी में शक्तियां लेकर प्रदर्शन करते रहे। विपक्ष के प्रदर्शन से सरकार और सत्ता पक्ष के विधायक एहसजी नजर आए।

    गैरसैंण। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा के अंदर जाने से पहले विधानसभा के सीडीओ पर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी विधायकों के पास पहुंचे और उनके द्वारा विपक्षी विधायकों से सदन चलाने में सहयोग देने का अनुरोध किया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा विपक्ष से सहयोग मांगने के दौरान भी कुछ विधायक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी राज्य बजट को लेकर बड़ा उत्साह व्यक्त किया है। उन्होंने इसे एक “शानदार” बजट बताया, जो समाज के हर वर्ग की आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा। सीएम ने कहा कि इस बजट को तैयार करने के लिए विभिन्न हितधारकों, समूहों और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों से सुझाव लिए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बजट न केवल विकासोन्मुखी होगा, बल्कि समावेशी भी होगा, जिसमें हर तबके के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और सदन की अवधि पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सदन का एक-एक मिनट कीमती है क्योंकि इसमें जनता का पैसा और सरकारी संसाधन लगते हैं। सीएम धामी ने विपक्ष को चर्चा के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि जितनी अधिक चर्चा होगी, उतना ही बेहतर परिणाम सामने आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चर्चा में कोई कटौती नहीं की जाएगी और दोपहर 3 बजे बजट पेश होने के साथ ही इसकी पूरी तस्वीर सबके सामने साफ़ हो जाएगी

  • भराड़ीसैंण विधानसभा भवन के मुख्य द्वार पर खड़े किए गए ढांचे से भवन का मुख्य भाग नहीं आ रहा नजर

    गैरसैंण: आज से गैरसैंण में विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। जिसके लिए मुख्यमंत्री समेत तमाम पक्ष-विपक्ष के विधायक गैरसैंण पहुंच चुके हैं। इस बार गैरसैंण में बजट सत्र के दौरान 1.11 लाख करोड़ रुपए का बजट सदन के पटल पर रखा जाएगा।
    ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैण में विधानसभा मंडप के मुख्य द्वार को बारिश के पानी से बचाने के लिए एक नया सुरक्षा ढांचा खड़ा किया गया है। जिसको लेकर यहां पंहुच रहे लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां विधानसभा के कर्मचारी मुख्य द्वार को पानी से बचाने के साथ ही विधानसभा के मुख्य भवन की शोभा और बढ़ने की बात कर रहे हैं। वहीं, इसे देखकर आमजन की प्रतिक्रिया कुछ और ही है।
    कुछ लोगों का कहना है कि नया ढांचा खड़ा करने से जहां मुख्य भवन का पारंपरिक डिजाइन प्रभावित हुआ है तो वहीं परिसर के सामने वाले मुख्य मैदान की चौड़ाई पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। परिसर मैदान के बीचों-बीच खड़े किए गए नए पिलरों की वजह से यहां पर से गुजरने वाले वाहनों से दुर्घटना का खतरा भी हो सकता है।
    भराड़ीसैंण विधानसभा के मुख्य भवन का पुराना डिजाइन आकर्षक और एक साथ नजर आता था। जिससे पूरी विधानसभा आकर्षक लगती थी, लेकिन नया ढांचा खड़ा करने से जहां परिसर के मुख्य भाग की मैदान की चौड़ाई घट गई है तो वहीं से विधानसभा भवन के मुख्य भाग का पूरा नजारा भी अब नहीं दिखाई दे रहा है।

  • गैरसैंण में राज्य आंदोलनकारियों का हंगामा

    उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में उत्तराखंड रजत जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में राज्य आंदोलनकारियों ने जमकर हंगामा किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत, क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल, विधायक सुरेश गड़िया, विधायक भरत चौधरी, विधायक प्रदीप बत्रा और जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत बिष्ट इस कार्यक्रम में मौजूद थे।
    आंदोलनकारियों का आरोप था कि जिस मंच पर मुख्यमंत्री और मंत्री बैठे, उन्हें वहां बैठने का उचित सम्मान नहीं दिया गया। केवल गले में शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करने का प्रयास किया गया, जिसे आंदोलनकारियों ने अपमानजनक बताया। विरोध स्वरूप उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा पहनाई गई माला और शॉल को वहीं मंच के सामने जमीन पर फेंक दिया।
    राज्य आंदोलनकारी भूपेंद्र रावत ने कहा, हमें बुलाया गया था, लेकिन बुलाकर अपमान किया गया। शहीद आंदोलनकारियों और अन्य आंदोलनकारियों का नाम तक नहीं लिया गया। मंच पर वही लोग बैठे, जिनकी बदौलत ये मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक बने। उन्होंने सवाल उठाया कि आज उत्तराखंड की सत्ता में बैठे इन नेताओं ने राज्य आंदोलन में क्या योगदान दिया और उनके परिवारों ने किस प्रकार बलिदान दिया।
    सुरेश कुमार बिष्ट ने कहा कि ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को लेकर आंदोलनकारियों का सपना था, लेकिन सरकार ने इसे केवल नेताओं की सैर-सपाटे का स्थल बना दिया। आज सम्मान समारोह आयोजित किया गया, लेकिन ऐसा सम्मान जैसे आंदोलनकारी कोई भेड़-बकरी हों।
    हरेंद्र कंडारी ने कहा कि प्रशासन ने उन्हें आमंत्रित तो किया, लेकिन मुख्यमंत्री के पास आंदोलनकारियों का सम्मान और उनकी बात सुनने का समय नहीं था। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य आंदोलन के दौरान 42 लोग शहीद हुए और आंदोलनकारियों ने पुलिस की लाठियों का सामना किया। आज हमें उचित सम्मान नहीं मिला, अगर यही रवैया रहा तो सरकार का अहंकार उन्हें डुबो देगा, हरेंद्र कंडारी ने चेतावनी दी। बता दें कि उत्तराखंड राज्य गठन के 25 साल पूरे होने पर प्रदेश सरकार 1 से 11 नवंबर तक रजत जयंती महोत्सव मना रही है। 9 नवंबर को देहरादून स्थित एफआरआई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए और आठ हजार करोड़ रुपए से अधिक की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसके अगले दिन गैरसैंण में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां राज्य आंदोलनकारियों ने अपने विरोध का स्वर मुखर किया।