टिहरी। शुक्रवार की सुबह भद्रकाली तिराहे से आगे एक डंपर अनियंत्रित होकर 20 मीटर नीचे खेत में जा गिरा। इस हादसे में वाहन चालक और एक महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मौके पर पहंुची पुलिस ने मृतकों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार टिहरी जनपद में शुक्रवार सुबह भद्रकाली तिराहे के पास एक डंपर हादसे का शिकार हो गया। डंपर अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गिर गया। हादसे में चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हादसे के दौरान सड़क पर लगे 2 कंक्रीट के डिवाइडर सीधे सड़क के बायी ओर नीचे झोपड़ी में रह रही महिला के ऊपर जा गिरे। जिससे महिला की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम एवं स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। एसडीआरएफ टीम द्वारा मौके पर तत्काल रेस्क्यू करते हुए डिवाइडर के नीचे दबी महिला को निकालकर एम्बुलेंस के माध्यम से हॉस्पिटल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
वाहन चालक को टीम के पहुंचने से पहले ही अस्पताल पहुंचा दिया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे भी मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान चालक फारुख बहादरपुर लक्सर हरिद्वार निवासी और महिला कौशल्या ( उम्र 42 वर्ष) पत्नी सुरेश निवासी बावाडी शिवपुरी के रूप में हुई। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अनियंत्रित होकर खेत में गिरा डंपर, एक महिला और चालक की दर्दनाक मौत
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टिहरी झील में अंतरराष्ट्रीय खेलों का भव्य समापन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को टिहरी झील में आयोजित इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप-2025 और चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप-2025 के भव्य समापन समारोह में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने भारत और 22 देशों से आए 300 से अधिक खिलाड़ियों से संवाद कर उनके उत्साह और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने टिहरी झील को अंतरराष्ट्रीय साहसिक खेलों के मानचित्र पर स्थापित किया है।
समारोह में मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और खेल प्रेमियों का स्वागत किया और टीएचडीसी, एशियन कायकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन तथा उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन सहित सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टिहरी झील अब केवल ऊर्जा उत्पादन या जल प्रबंधन का केंद्र नहीं रह गई है, बल्कि पर्यटन, साहसिक खेल और स्थानीय आजीविका के लिए नया अवसर बन चुकी है।
धामी ने खेलों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह युवाओं के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में भारत ने ओलंपिक और एशियाई खेलों में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है और 2030 में अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा।
मुख्यमंत्री ने 38वें राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड की सफलता का भी उल्लेख किया, जिसमें राज्य ने 103 पदक जीतकर 7वाँ स्थान प्राप्त किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में शीघ्र स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान लागू किया जाएगा, जिसके तहत आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियाँ स्थापित होंगी, जिनमें हर वर्ष 920 अंतरराष्ट्रीय एथलीट और 1000 अन्य खिलाड़ियों को प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही हल्द्वानी में खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना भी की जा रही है।
धामी ने नई खेल नीति के तहत खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों, निःशुल्क प्रशिक्षण, छात्रवृत्तियाँ और खेल प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने विजयी खिलाड़ियों को बधाई दी और खेल भावना को हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया कि वे निरंतर मेहनत करते रहें और राज्य तथा केंद्र सरकार उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करती रहेगी।
समारोह में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक किशोर उपाध्याय, जिलाधिकारी, टीएचडीसी के सीएमडी सीपन गर्ग, देश-विदेश से आए खिलाड़ी और स्थानीय जनता उपस्थित रही। -
राज्यपाल ने किया चिंतन शिविर का शुभारंभ
वीरचंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी में भारत में कृषि–पारिस्थितिकी–पर्यटन: अवसर, चुनौतियाँ और आगे की राह विषय पर दो दिवसीय चिंतन शिविर का शुभारंभ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने दीप प्रज्वलित कर किया।
राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड, जहाँ प्रकृति और पुरुषार्थ का अद्भुत संगम है, वहाँ इस प्रकार का आयोजन न केवल एक शैक्षणिक विमर्श है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला प्रयास भी है। यह विषय अपनी जड़ों में कृषि, आत्मा में पर्यावरण और हृदय में पर्यटन की संस्कृति को समेटे हुए है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सतत विकास का साधन बन चुका है। उन्होंने कहा कि इको-टूरिज्म और कृषि-पर्यटन (एग्री-इको-टूरिज्म) की पहलें न केवल पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति की रक्षा सुनिश्चित करती हैं, बल्कि किसानों और स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भरता व आजीविका के नए अवसर प्रदान कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की जड़ें कृषि में हैं और लगभग 45 प्रतिशत आबादी आज भी इससे जुड़ी है। कृषि हमारे ग्रामीण समाज की आत्मा है और पर्यावरण उसकी सांस। दोनों का संगम ही एग्री-इको-टूरिज्म का सार है,राज्यपाल ने कहा। उन्होंने इसे ऐसा मॉडल बताया जो किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की क्षमता रखता है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों की अपार संभावनाएँ हैं, परंतु इको-टूरिज्म अभी प्रारंभिक अवस्था में है। इस दिशा में केंद्र सरकार की ग्रामीण पर्यटन नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक विविधता, जैविक खेती, पर्वतीय कृषि प्रणाली और पारंपरिक ग्राम्य जीवन इस क्षेत्र के लिए इसे एक आदर्श राज्य बनाते हैं।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को बधाई देते हुए कहा कि भरसार विश्वविद्यालय नवाचार और उद्यमिता की दिशा में अग्रसर है, जो विद्यार्थियों को इको-टूरिज्म और कौशल विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षित कर रहा है। उन्होंने आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या और डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा द्वारा प्रारंभ किए गए एग्री-टूरिज्म प्रबंधन डिप्लोमा कार्यक्रमों को भी प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने भरसार, गैरसैंण, पौड़ी, प्रतापनगर और मैलचौरी महाविद्यालयों की 2722.64 लाख रुपये की योजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण/जीर्णोद्धार किया तथा रानीचौरी भरसार महाविद्यालय के अधिष्ठाता कार्यालय के सभागार और कक्षा भवन का भी लोकार्पण किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया।
कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, प्रतापनगर विधायक विक्रम नेगी, सचिव रविनाथ रमन, जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल, एसएसपी आयुष अग्रवाल, सीडीओ वरुणा अग्रवाल, तथा विभिन्न महाविद्यालयों के डीन और प्रोफेसर उपस्थित रहे। -
सीएम धामी ने मकानों पर नंबर प्लेट लगाने के आदेश किए रद्द
टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी में मकानों पर नंबर प्लेट लगाने को लेकर जारी आदेशों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने जिला पंचायतराज अधिकारियों द्वारा जारी इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन जैसे कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों पर नंबर प्लेट लगाने का कार्य एक बाहरी व्यक्ति को देने से संबंधित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इन पत्रों को लेकर आम जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में नाराजगी देखी जा रही थी।
मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश सरकार की योजनाएं जनहित, पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप ही लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य में स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
मुख्यमंत्री धामी ने दोहराया कि 10 रुपये करोड़ तक की सरकारी अधिप्राप्तियों में स्थानीय लोगों को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने संबंधी सरकार के आदेशों का सभी विभागों को सख्ती से पालन करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि शासन का लक्ष्य न केवल योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि प्रदेश के लोगों को रोजगार और अवसरों में प्राथमिकता मिले। -
नकल विरोधी कानून के तहत एसआईटी की टिहरी में कार्रवाई
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने टिहरी कलेक्ट्रेट परिसर में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस संवाद का उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी शंकाओं और सुझावों को जानना और विवेचना को और अधिक पारदर्शी व तथ्यपरक बनाना था।
एसआईटी टीम के समक्ष बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी उपस्थित हुए। इस दौरान परीक्षाओं में आए अनुभवों, समस्याओं व संभावित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों ने अपनी शंकाएं मौखिक व लिखित रूप में टीम के समक्ष रखीं।
एसआईटी द्वारा इन सभी शंकाओं व सुझावों को लिपिबद्ध कर दस्तावेजीकृत किया गया, जिनका मूल्यांकन कर इन्हें आयोग और जांच निगरानी कर रहे माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
संवाद के दौरान कई छात्र-छात्राओं ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुधारात्मक, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के सुझाव दिए। इनमें परीक्षा केंद्रों में सख्त सुरक्षा मानक लागू करना, परीक्षा से पूर्व अभ्यर्थियों की सघन चेकिंग/फ्रिस्किंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध, पेपर की छपाई, ट्रांसपोर्ट व स्टोरेज की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना शामिल थे।
अभ्यर्थियों ने कहा कि पिछले वर्षों में जब इन मानकों को अपनाया गया था, तब परीक्षाएं अपेक्षाकृत निष्पक्ष व पारदर्शी रहीं। ऐसे सुरक्षा उपायों को भविष्य की सभी परीक्षाओं में भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रश्नपत्रों के फोटो वायरल होने के मामले में थाना रायपुर में उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अध्यादेश 2023 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई है।
एसआईटी द्वारा एकत्र की गई सभी सूचनाएं और सुझावों को संकलित कर उच्च स्तरीय समीक्षा के लिए भेजा जाएगा। टीम ने भरोसा दिलाया कि जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन पर न्यायसंगत और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। -
टिहरी के कलस्टर विद्यालयों में शीघ्र शुरू होंगे निर्माण कार्य
टिहरी जनपद में कलस्टर विद्यालय योजना के अंतर्गत चिन्हित पांच राजकीय इंटर कॉलेजों में शीघ्र ही भवन निर्माण एवं अन्य अवस्थापना कार्य शुरू किये जायेंगे। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इन विद्यालयों में निर्माण कार्यों को कार्यदायी संस्था द्वारा आंगणित रूपये 10 करोड़ 65 लाख की धनराशि को मंजूरी दे दी है।
सूबे में विद्यालयी शिक्षा को और उन्नत बनाने और एक ही कैम्पस में कक्षा-6 से लेकर कक्षा-12 तक के छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा व सुविधा उपलब्ध करने के दृष्टिगत राज्य सरकार ने कलस्टर विद्यालयों की स्थापना का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत विभिन्न जनपदों में विद्यालयों का चयन कर उन्हें कलस्टर विद्यालयों में परिवर्तित किया जा रहा है। इसी क्रम में टिहरी जनपद में चयनित 5 कलस्टर विद्यालयों में विभिन्न निर्माण कार्यों हेतु कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के परियोजना खंड ऋषिकेश द्वारा रूपये 10 करोड़ 65 लाख का आंगणन तैयार किया है। जिसमें राजकीय इंटर कॉलेज नागदेव पथल्ड में भवन व अन्य अवस्थापना कार्ये हेतु रूपये 1 करोड़ 94 लाख, राजकीय इंटर कॉलेज बंगियाल में रूपये 2 करोड़ 26 लाख, राजकीय इंटर कॉलेज काण्डीखाल 2 करोड़ 26 लाख, राजकीय इंटर कॉलेज चाका (क्वीली) रूपये 1 करोड़ 90 लाख तथा राजकीय इंटर कॉलेज केशरधार नैचोली हेतु रूपये 2 करोड़ 55 लाख की धनराशि के आंगणन तैयार किये हैं। जिसे विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा अनुमोदन दे दिया गया है। शीघ्र ही इन विद्यालयों में निर्माण कार्य के लिये धनराशि अवमुक्त कर दी जायेगी। योजना के अंतर्गत चयनित इन पांचों विद्यालयों को कलस्टर विद्यालय में विकसित किया जायेगा, इसके लिये इन विद्यालयों में कक्षा-कक्ष, कम्प्यूटर कक्ष, प्रधानाचार्य कक्ष, कार्यलय कक्ष, स्टॉफ कक्ष, विभिन्न प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय आदि का निर्माण किया जायेगा साथ ही पुराने भवन की वृहद मरम्मत व अन्य सुविधाएं जुटाई जायेगी, ताकि एक ही विद्यालय में छात्र-छात्राओं को सभी विषयों के अध्यापक, प्रयोगशालाएं, कम्प्यूटर लैब, खेल व अन्य गतिविधियां और विभिन्न सरकारी योजनाओं का आसानी से लाभ मिल सकेगा।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि कलस्टर विद्यालय योजना के तहत टिहरी जनपद में प्रथम चरण में पांच विद्यालयों का चयन किया गया है। इन चयनित विद्यालयों में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिये कार्यदायी संस्था के तैयार रूपये 10 करोड़ 65 लाख के आंगणन को मंजूरी दे दी गई है। शीघ्र ही विद्यालयों में निर्माण कार्य हेतु धनराशि अवमुक्त कर दी जायेगी। -
टिहरी में फिर 1952 की प्राचीन रामलीला जीवंत होने से गढ़वाल की संस्कृति पुनर्जीवित होगी – अभिनव थापर
नई टिहरी में ” नवयुवक श्री रामकृष्ण लीला समिति 1952, टिहरी (पंजी.) ” द्वारा टिहरी की 1952 की ऐतिहासिक रामलीला को 2025 में पुनः आरंभ किया गया। कल भीषण बारिश और तूफान के बाद दिन तक यह मैदान ” दरिया ” था किंतु राम-भक्तों के जज्बे ने हर तंत्र का प्रयोग कर रामलीला मैदान सूखा दिया। समिति ने जंगलों से पिरूल काटकर, गीले मैदान पर ” कालीन ” की तरह बिछा दिया और असंभव सी रामलीला को संभव कर दिया। जानदार मंचन – शानदार तकनीक के साथ नई टिहरी की रामलीला, देहरादून की भाँति एक नया अध्याय लिख रही है। पंचम दिवस में केवट लीला व राम भरत मिलाप का मंचन हुआ जिसमें राम, सीता, भरत , केवट व अन्य कलाकारों ने जबरदस्त अभिनय से रामलीला में जान डाल दी।
मुख्य अतिथि देहरादून की रामलीला समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि रामलीला को पुनः 2025 में गढ़वाल के ऐतिहासिक क्रेंद्र टिहरी में आरंभ होने से रामलीला का पुरानी टिहरी का 1952 का इतिहास फिर से पुनः सजीव हो गया है, जिससे गढ़वाल की संस्कृति पुनर्जीवित होने में सहायक होगी। इससे रामलीला की प्रथा द्वारा गढ़वाल की संस्कृति का प्रसार जन-जन तक प्रसार होगा।
नवयुवक अभिनय श्री रामकृष्ण लीला समिति 1952, टिहरी (पंजी) के अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल मोनू ने कहा कि रामलीला को वर्षों बाद नई टिहरी में आधुनिक रूप से जीवंत करने की मुख्य प्रेरणा हमको देहरादून की भव्य रामलीला में भाग लेने से आयी। देहरादून रामलीला समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर का हमको निरन्तर सहयोग मिलता रहा जिससे आज यह रामलीला नई तकनीक के साथ हम टिहरी के दर्शकों को सजीव दिखा पा रहे हैं।
रामलीला समिति, देहरादून द्वारा रामलीला की प्रथा को आगे बढ़ाने के लिए टिहरी की रामलीला समिति के सभी सदस्यों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
पंचम दिवस में देहरादून में गढ़वाल की 1952 की ऐतिहासिक रामलीला को पुनर्जीवित करने वाली ” श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून ” को सम्मानित किया गया और समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर को मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के रूप में THDC के अपर GM रविंद्र सिंह राणा व देहरादून रामलीला समिति के सदस्य दुर्गा भट्ट, शशि पैन्यूली, डॉ नितिन डंगवाल, सरिता जुयाल, गिरीश पैन्यूली, नीता बहुगुणा व अन्य उपस्थित रहे। रामलीला मंचन कार्यक्रम में अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल , सचिव अमित पंत , दुर्गा भट्ट, शशि पैन्यूली, निर्देशक अनुराग पंत , नगरपालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत , डॉ नितिन डंगवाल, सरिता जुयाल, गिरीश पैन्यूली, नीता बहुगुणा, महावीर उनियाल , कमल सिंह मेहर , गंगा भगत नेगी , अनुसूया नौटियाल , राजेन्द्र असवाल , मनोज राय , गोदियाल , महिपाल नेगी व सभी समिति के सदस्यों व अतिथियों ने भाग लिया।