Category: नैनीताल

  • नन्दा सुनन्दा देवी महोत्सव मेला जनपद वासियों की आस्था का प्रतीक

    नैनीताल । सरोवर नगरी नैनीताल में 124 वें नन्दा सुनन्दा देवी महोत्सव मेला जो आगामी 16 से 23 सितंबर तक भव्य रूप से आयोजित किया जायेगा। उसकी व्यापक स्तर पर तैयारी की जाने के उद्देश्य से जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल ने अधिकारियों , कर्मचारियों, एवं श्री राम सेवक सभा के सदस्यों, व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों एवं होटल एसोसिएशन समेत तमाम बुद्धि जीवी गणमान्य नागरिक के साथ बैठक आयोजित की।
    जिसमें जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि नंदा सुनन्दा देवी महोत्सव मेला जनपद वासियों की आस्था का प्रतीक है।
    जिलाधिकारी ने कहा कि 124 वां नंदा देवी मेला जनपद की पहचान है। इसे भव्यता के साथ संपन्न कराने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूर्ण करें।

    आगामी 16 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक नैनीताल मुख्यालय में आयोजित होने वाले 124 वें नंदा देवी मेला महोत्सव को भव्य, दिव्य और स्थानीय परम्परा एवं लोक संस्कृति के अनुरूप संपन्न कराने के उद्देश्य से बुधवार को जिला कार्यालय सभागार नैनीताल में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में पूर्व तैयारियों को लेकर विस्तृत बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में विधायक नैनीताल सरिता आर्या, राम सेवा समिति, मंदिर समिति एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि,विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
    इस मेले में हमारी संस्कृति, लोक कला और परम्परा की झलक स्पष्ट रूप से दिखनी चाहिए। मेले के दौरान आयोजित होने वाले सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थानीय लोक परंपरा पर आधारित होंगे। मेले में स्थानीय व उत्तराखंड की लोक संस्कृति से जुड़े लोक कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
    उन्होंने कहा कि मेले के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा मेले में स्टालों का आवंटन किया जाएगा। इसमें हाउस ऑफ हिमालया ब्रांड, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के उत्पादों के विशेष स्टाल लगाए जाएंगे।

    जिलाधिकारी ने मेले को प्लास्टिक मुक्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कहीं पर भी प्लास्टिक का उपयोग नही होना चाहिए। मेले को भव्य बनाने हेतु पूरे नगर को विद्युत लाइटों से जगमगाया जाएगा। ठंडी सड़क क्षेत्र में विशेष प्रकाश व्यवस्था के लिए नगर पालिका को निर्देशित किया गया। उन्होंने कहा कि समय से पूर्व यह कार्य कर लिया जाय। इसके अतिरिक्त जहॉं जहॉं स्ट्रीट लाइट लगाई जानी है लगा ली जाय।

    बैठक में मेले की विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा कर संबंधित विभागों निर्देश दिए गए। अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को पंडाल, टेंट निर्माण, स्टालों व मंच निर्माण सहित सभी व्यवस्थाओं के लिए पारदर्शी टेंडरिंग प्रक्रिया समय पर पूर्ण करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए।उन्होंने कहा कि समय रहते यह कार्य कर लिए जाय ताकि बाद में किसी भी प्रकार की समस्या न हो । उन्होंने कहा कि श्री रामसभा स्थल,मंदिर परिसर से बाहर व मेला स्थल की सभी व्यवस्थाओं को बेहतर रखा जाय इस हेतु उपजिलाधिकारी व ईओ नगर पालिका श्री राम सेवा समिति के साथ समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करें।
    जिलाधिकारी ने कहा कि डोला जिन-जिन मार्गों से होकर जाता है, उन मार्गों का लोकनिर्माण विभाग, नगर पालिका एवं सिंचाई विभाग संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण कर मार्ग मरम्मत कर लें। लोकनिर्माण विभाग को मेले से पूर्व लोअर मॉल रोड को सुचारू करने के भी निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए।
    उन्होंने ग्रामीण निर्माण विभाग को डीएसए मैदान में जलभराव की समस्या के समाधान हेतु तथा मेला क्षेत्र में कीचड़ न हो इसके लिए कंक्रीट डालने के निर्देश दिए गए।

    मेले के दौरान नगर में सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद रखने और मोबाइल टॉयलेट की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश नगर पालिका को दिए गए। पेयजल विभाग को पेयजल आपूर्ति सुचारू रखने, टैंकर एवं स्टैंड पोस्ट की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
    बैठक में अवगत कराया कि मेले के दौरान स्वास्थ्य शिविर भी लगाया जाएगा, जिसमें आयुष्मान कार्ड भी बनाए जाएंगे।

    विद्युत विभाग को झूलते तारों को ठीक करने तथा वन विभाग को मार्गों में आने वाले पेड़ों की लोपिंग करने के निर्देश दिए गए।

    मेले के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में चर्चा करते हुए पुलिस विभाग को शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था के साथ सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रखा जाय।
    मेले के दौरान परिवहन विभाग को यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ ही आने वाले यात्रियों, श्रद्धालुओं हेतु रोडवेज की अतिरिक्त बसों की व्यवस्था व पार्किंग व्यवस्था करने को कहा गया।

    बैठक में निर्णय लिया गया कि मुख्य मेले के दिन नैनीताल मुख्यालय की समस्त ठेका मदिरा की दुकानें बंद रहेंगी।
    बैठक में मेले के दौरान प्रतिदिन होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के संबंध में सूचना, संस्कृति, पर्यटन विभाग को आवश्यक निर्देश दिए गए।

    बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डे, पुलिस अधीक्षक (यातायात) जगदीश चंद्र, अपर जिलाधिकारी शौरभ असवाल, सचिव जिला विकास प्राधिकरण मनीष कुमार, उप जिलाधिकारी नवाजिश खालिक, पुलिस उपाधीक्षक शशिकांत सेमवाल, सांसद प्रतिनिधि गोपाल रावत, श्री राम सेवा समिति के अध्यक्ष मनोज शाह, सचिव जगदीप बवाड़ी,प्रबंधक विमल चौधरी, होटल एसोशिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट, व्यापार संघ के अध्यक्ष मारुति नंदन शाह,सचिव शिव शंकर, डीएसए सचिव मनोज जोशी, दयाकिशन पोखरिया, अधिशासी अभियंता लोकनिर्माण,पेयजल, जल संस्थान, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका,पर्यटन विकास अधिकारी, सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • आगामी एक अगस्त से माल रोड क्षेत्र में वाहनों का हॉर्न बजाना पूर्णतया बन्द रहेगा। जिलाधिकारी ने बैठक कर दिए निर्देश

    नैनीताल। सरोवर नगरी तल्लीताल से मल्लीताल जाने वाले माल रोड से गुजरने वाले यानी आवाजाही वाले वाहन चालकों को एक अगस्त से हॉर्न बजाना भारी पड़ सकता है। जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा इस मार्ग में हॉर्न बजाना पूर्णतया बन्द कर दिया जाएगा। जिसके लिए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बैठक कर आला अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिशा निर्देश जारी किए। यहाँ बताते चलें

    उत्तराखंड हाईकोर्ट के पारित आदेशों के अनुपालन तथा नैनीताल नगर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं पर्यटक-अनुकूल बनाए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने उत्तराखण्ड मोटरयान नियमावली, 2011 के नियम-187 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए तल्लीताल डांठ से मल्लीताल रिक्शा स्टैंड तक सम्पूर्ण मॉल रोड क्षेत्र में वाहनों द्वारा हॉर्न (ध्वनि संकेतकों) के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के आदेश पूर्व में जारी किया गए थे। उक्त जारी आदेशों का शतप्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराए जाने हेतु आवश्यक तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में जिला कार्यालय सभागार नैनीताल में सम्पन्न हुई।

    बैठक में जिलाधिकारी ने आगामी एक अगस्त से तल्लीताल डांठ से मल्लीताल रिक्शा स्टैंड तक वाहनों में हॉर्न के उपयोग पर पूर्णतः प्रतिबंधित लगाए जाने हेतु पुलिस, परिवहन, राजस्व, विकास प्राधिकरण एवं नगर पालिका द्वारा की जा रही तैयातियों की विस्तार से समीक्षा की।
    जिलाधिकारी ने कहा कि स्थानीय आम नागरिकों के साथ ही आने वाले पर्यटकों व बाहरी लोगों को इसकी पूर्व से जानकारी हो इस हेतु बृहद तौर पर प्रचार-प्रसार किया जाय। नो हॉर्न से संबंधित डिस्प्ले व साइन बोर्ड, फ्लैक्सी विभिन्न स्थानों में लगाए जाए। साथ ही आने वाले लोगों को यहॉं की स्वच्छता बनाए रखने पर्यावरण व झील संरक्षण हेतु भी प्रेरित किए जाने हेतु जगह जगह बोर्ड लगाते हुए जागरूक किया जाय।
    जिलाधिकारी ने कहा कि मॉल रोड में शतप्रतिशत नो हॉर्न जॉन लागू कराए जाने हेतु स्थानीय संगठनों का भी महत्वपूर्ण सहयोग आवश्यकीय है इस हेतु उन्होंने उपजिलाधिकारी पुलिस क्षेत्राधिकारी एवं सम्भागीय परिवहन अधिकारी को शीघ्र ही स्थानीय व्यापार मंडल, टैक्सी एसोसिएशन बार संघ, व्यापार संघ, नाव संगठन,डीएसए के साथ ही विभिन्न संगठनों व नैनीताल स्थित विभिन्न संस्थानों के साथ बैठक कर उनका भी सहयोग लिया जाय व उन्हें इस संबंध में जागरूक भी किया जाय।

    जिलाधिकारी ने कहा कि इसका व्यापक प्रचार प्रसार करने हेतु वालिंटियर एनसीसी,एन एस एस,मेरा युवा भारत के वॉलिंटियर्स का भी सहयोग लिया जाय।

    जिलाधिकारी ने कहा कि आदेशों का शतप्रतिशत अनुपालन हो तथा उल्लघंन करने वालों पर नियमानुसार कार्यवाही कराए जाने हेतु मॉल रोड में एक सप्ताह के भीतर विभिन्न स्थानों में सीसी
    टीवी मैमरे लगाए जाय। इस सबंध में जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी नैनीताल को तत्काल सर्वे कर सी सीटीवी लगाने के निर्देश दिए। ताकि निर्देशों का अनुपालन न करने पर तत्काल नियमानुसार कार्यवाही की जा सके।

    जिलाधिकारी ने कहा कि लोगों को जागरूक करने हेतु 24 जुलाई से 31 जुलाई तक एक बृहद अभियान भी चलाया जाए और लोगों को जागरूक किया जाय।

    जिलाधिकारी ने कहा कि नैनीताल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का प्रमुख पर्यटन स्थल है। मॉल रोड की पहचान शांत, प्राकृतिक एवं सौम्य वातावरण के लिए है। ऐसे में वाहनों के अनावश्यक हॉर्न से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित करता है। इस निर्णय का उद्देश्य नगर में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों को शांत एवं सुखद वातावरण उपलब्ध कराना है।

    उन्होंने पुनः सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे आदेश का पूर्ण अनुपालन करते हुए मॉल रोड क्षेत्र में हॉर्न का प्रयोग न करें तथा नैनीताल की प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय गरिमा बनाए रखने में अपना सहयोग करें।

    *जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक अगस्त, 2026 से आदेश का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध उत्तराखण्ड मोटरयान नियमावली एवं अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत नियमानुसार दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    बैठक में पुलिस अधीक्षक (यातायात) जगदीश चंद्र, सम्भागीय परिवहन अधिकारी अरविन्द पाण्डे, सचिव जिला विकास प्राधिकरण मनीष कुमार, उपजिलाधिकारी नवाजिश खलीक, पुलिस क्षेत्राधिकारी रविकांत सेमवाल आदि उपस्थित रहे।

  • वन हमारी सांस्कृतिक चेतना, पर्यावरणीय सुरक्षा और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार हैंः राज्यपाल

    नैनीताल। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने मंगलवार को लोक भवन नैनीताल में उत्तराखण्ड वन विभाग द्वारा आयोजित ‘प्रकृति के प्रहरी’ वनकर्मी सम्मान एवं पुस्तक विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए कहा कि वन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, पारिस्थितिक संतुलन और मानव सभ्यता के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति और मानव का अस्तित्व एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है तथा विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।
    राज्यपाल ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वनकर्मियों को सम्मानित किया। उन्होंने सम्मानित वनकर्मियों को प्रकृति का सच्चा प्रहरी बताते हुए कहा कि भीषण वनाग्नि, प्राकृतिक आपदाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में वनकर्मी अपनी जान की परवाह किए बिना वनों और वन्यजीवों की रक्षा में जुटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनका समर्पण, साहस और सेवा भाव उत्तराखण्ड की हरित चेतना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
    इस अवसर पर राज्यपाल ने ‘राजाजी में पूर्णिमा की वह रात’, कॉमन बर्डस ऑफ अल्मोडा एण्ड नैनीताल फरोम रूट से रिचीज तथा बिहाईव फैन्सिंग  पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि ये पुस्तकें प्रकृति, जैव-विविधता, आजीविका संवर्धन तथा नवाचार के विविध आयामों को सामने लाती हैं। राज्यपाल ने कहा कि ‘राजाजी में पूर्णिमा की वह रात’ पुस्तक प्रकृति और वन्यजीवन के साथ मानवीय संवेदनाओं एवं आध्यात्मिक जुड़ाव को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है तथा पाठकों में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता और आत्मीयता का भाव विकसित करेगी।
    राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वनों को सदैव देवतुल्य माना गया है। हमारी सनातन परम्परा अरण्य संस्कृति की परम्परा रही है और वेदों-उपनिषदों की रचना भी वनांचलों में हुई। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों ने वृक्षों को जीवनदाता माना है तथा मत्स्य पुराण में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान बताया गया है। यह प्रकृति संरक्षण के महत्व को रेखांकित करने वाला गहन जीवन-दर्शन है।
    राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच उत्तराखण्ड की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य का लगभग 71 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो इसकी समृद्ध प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है। उत्तराखण्ड के वन, ग्लेशियर और नदियाँ करोड़ों लोगों के जीवन का आधार हैं। उन्होंने चिपको आन्दोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि गौरा देवी और उनकी साथियों ने पूरी दुनिया को प्रकृति संरक्षण का प्रेरक संदेश दिया था, जो आज भी प्रासंगिक है।
    राज्यपाल ने कहा कि वनाग्नि और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक, नवाचार और जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ‘बिहाईव फैन्सिंग’ जैसी वैज्ञानिक पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के साथ-साथ मधुमक्खी पालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन सकती है।
    राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वन विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारम्भ ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण को जन-आन्दोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है तथा नई पीढ़ी में प्रकृति, जल और वृक्षों के प्रति प्रेम एवं उत्तरदायित्व की भावना विकसित करनी होगी।
    कार्यक्रम के प्रारम्भ में निदेशक, कार्बेट टाइगर रिजर्व डॉ. साकेत बडोला ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. विवेक पाण्डेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में वन एवं वन्यजीव संरक्षण विषयक वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया।
    इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक (कुमाऊँ) डॉ. तेजस्विनी अरविन्द पाटिल, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, सम्मानित वनकर्मी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

  • नैनी झील में 1990 के दशक से महाशीर मछली वर्तमान में हो रही विकसित

    सरोवर नगरी नैनी झील में आयुक्त कुमाऊं/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने नैनीताल के तल्लीताल स्थित सैन्ट जॉसेफ स्वीमिंग हाउस के एरियेशन हाउस के समीप नैनीताल झील में स्थित मत्स्य केज में स्नोट्राउट मछली के संचय एवं संरक्षण हेतु आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

    इस अवसर पर कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने बताया । नैनी झील में 1990 के दशक से महाशीर मछली (ट्रोप्टिटोरा व स्नोट्राउट) विलुप्त हो चुकी थी। 2005 में प्रजाति ट्राउट मछली महाशीर के रिस्टॉक का संचय किया गया जो आज काफी अच्छी तरह विकसित हो चुकी है।

    दूसरी मछली की देसी प्रजाति स्नो ट्राउट भी विलुप्त हो चुकी थी जो प्रोफेसर डीएस रावत, वाइस चांसलर कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल तथा रजिस्टार कुमाऊं विश्वविद्यालय डॉ एमएस मंदरवाल, कुमाऊं विश्वविद्यालय के संरक्षण में जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एचसीएस बिष्ट

    के निर्देशन में नैनी झील में लगभग 35 साल बाद स्नो ट्राउट का पुनः संवर्धन एवं संचय किया जाना सुनिश्चित किया गया। यह मछली नैनी झील में पनप रही काई का भक्षण कर जल में नाइट्रोजन की मात्रा को संतुलित करेगी और ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाएगी। यह मछली नैनी झील में जल पारिस्थितिकी तंत्र को बायोलॉजिकल ठीक करने में मिल का पत्थर साबित होगी। परियोजना अन्वेषण प्रोफेसर एसएसबी के नेतृत्व में मछली के बीज का संचय ट्रीटमेंट प्लांट में पुन: उत्पादन करके इसकी अंगुलिकाओं को तैयार किया गया।

     

  • बाघ ने बनाया युवक को अपना निवाला,20 दिन के भीतर तीसरी घटना 

    सरोवर नगरी से दूर जनपद भीमताल में वन्यजीवों के हमला रुकने का नाम नहीं है। बाघ ने फिर एक युवक को निवाला बना दिया है। जंगल में उसका शव बरामद किया गया।

    भीमताल के ब्लॉक प्रमुख डॉ.हरीश बिष्ट ने बताया कि काठगोदाम से लगे भीमताल ब्लॉक विकास खंड के भदयूनी निवासी 32 वर्षीय कमल सिंह बिष्ट पुत्र इंद्र सिंह बिष्ट कल देर शाम से घर के पास से गायब हो गया था, परिजनों ने उसकी खोजबीन की। रात तक कोई जानकारी नहीं मिला। आज गांव के लोगों के साथ ही वन विभाग के लोगों ने खोजबीन शुरू की। आज सुबह जंगल में कमल का आधा खाया हुआ शव बरामद किया गया।

    इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मचा है। ब्लॉक प्रमुख डॉ.हरीश सिंह बिष्ट ने बताया कि बीते दिवस उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी से इस क्षेत्र में ग्रामीणों द्वारा बाघ देखे जाने को जानकारी दी। विभाग को ठोस कदम उठाने के लिए अनुरोध किया था। विभाग ने इस मामले में लापरवाही बरती। ब्लॉक प्रमुख डॉ.हरीश बिष्ट ने घटना स्थल पर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की। प्रमुख ने कड़े शब्दों में कहा वन विभाग लापरवाही बरत रहा है भीमताल 2 किलोमीटर की रेडियस में 20 दिन के भीतर आज तीसरी घटना हो चुकी हैं विभाग चैन की नींद सोया हुआ है विभाग के सुस्त पड़े अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए।

  • उत्तराखंड के सबसे बड़े घोटाले LUCC पर HC में सुनवाई

    नैनीताल: उत्तराखंड के सबसे बड़ी वित्तीय ठगी में से एक लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) चिटफंड घोटाले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने के मामले पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति शिद्धार्थ साह की खण्डपीठ ने अगली सुनवाई हेतु 18 मार्च यानी आज की तिथि नियत की है। साथ में कोर्ट ने अब तक की गयी जांच की रिपोर्ट्स 18 मार्च बुधवार 2026 तक कोर्ट में पेश करने को कहा है।
    पूर्व में कोर्ट ने चिटफंड कम्पनी एलयूसीसी के संचालकों द्वारा प्रदेश के नागरिकों को अपने स्थानीय एजेंटों के माध्यम 800 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाकर फरार होने और इस मामले की सीबीआई से जांच कराने संबंधी याचिका पर सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यह भी कहा था कि जिन लोगों का पैसा लेकर कम्पनी फरार हो चुकी है, वे लोग अपनी शिकायत सीबीआई को दे सकते हैं।
    वहीं राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। अभी तक शिकायतकर्ताओं द्वारा शिकायत करने पर कम्पनी और उसके संचालकों के ऊपर कई मामले दर्ज हो चुके हैं। अन्य की जांच चल रही है। इसका विरोध करते हुए 27 पीड़ितों की तरफ से कहा गया कि पुलिस ने अभी तक उनका मुकद्दमा दर्ज तक नहीं नहीं किया। जब तक मुकदमा दर्ज नहीं होगा, तब तक उनका डूबा हुआ पैसा वापस नहीं मिलेगा।
    इस पर कोर्ट ने उनसे कहा कि वे अपनी शिकायत सीबीआई को दें। साथ में धनराशि देने के प्रमाण पत्र भी उस शिकायत में संग्लन करें। इस मामले में देहरादून और ऋषिकेश समेत कई स्थानों के पीड़ितों की तरफ से जनहित और एक अन्य याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि इस मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए।
    गौरतलब है कि 28 नवंबर 2025 को एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) के 800 करोड़ के घोटाले में सीबीआई/एसीबी देहरादून ने 46 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था. सोसायटी के सदस्यों के खिलाफ प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में 18 मुकदमे दर्ज हैं। घोटाले में एक जून 2024 को तृप्ति नेगी की ओर से कोतवाली कोटद्वार, जिला पौड़ी गढ़वाल में दी लिखित शिकायत के आधार पहला मुकदमा दर्ज किया गया था।
    एयूलसीसी ने उत्तराखंड में 35 शाखाएं खोली थीं। जिसमें लोगों को कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर पैसा जमा कराया गया। विदेश में सोना, तेल, रिफाइनरी सहित अन्य क्षेत्रों में निवेश कर मुनाफे का भी लालच दिया गया। कुछ लोगों की निवेश की गई राशि परिपक्व होने के बावजूद उन्हें पैसा नहीं लौटाया गया। पूर्व में इस मामले में पुलिस कुछ लोगों को गिरफ्तार भी कर चुकी है।

  • गढ़वाल केंद्रीय विवि कुलपति नियुक्ति निरस्त मामला, हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

    नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति की नियुक्ति को निरस्त करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने सभी पक्षो को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
    मामले के अनुसार प्रोफेसर नवीन प्रकाश नौटियाल ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि कुलपति की नियुक्ति केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षकों तथा अन्य अकादमिक स्टाफ की नियुक्ति के लिए न्यूनतम अर्हताएं एवं उच्च शिक्षा में मानकों के अनुरक्षण के उपाय) विनियम, 2018 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के खिलाफ हुए हैं।
    यह यूजीसी विनियमों तथा विज्ञापन में निर्धारित स्वयं की पात्रता शर्तों के उल्लंघन में प्रोफेस प्रकाश सिंह की कुलपति के रूप में निरंतर बनी हुई जिनकी नियुक्ति मनमानी एवं अवैध है। यह मेरिट-आधारित नियुक्तियों की पवित्रता को क्षति पहुंचाती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लंघन करती है।
    उपर्युक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों के दृष्टिगत, याचिकाकर्ता के पास इस न्यायालय के समक्ष भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत वर्तमान याचिका प्रस्तुत करने के अतिरिक्त कोई अन्य वैकल्पिक, प्रभावी एवं पर्याप्त उपाय उपलब्ध नहीं है।
    याचिका में कहा गया कुलपति की नियुक्ति यूजीसी विनियम, 2018 की विनियम 7.3 के प्रतिकूल है। जिसमें विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में न्यूनतम दस वर्षों के अनुभव की अनिवार्यता निर्धारित की गई है। प्रोफेसर सिंह का भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में चेयर प्रोफेसर के रूप में अनुभव को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के समकक्ष नहीं माना जा सकता, क्योंकि IIPA न तो कोई विश्वविद्यालय है और न ही यूजीसी मानदंडों द्वारा शासित संस्था है।
    शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञापन में पात्रता को स्पष्ट रूप से “विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष” तक सीमित किया गया था। जिससे किसी भी प्रकार की समकक्षता या प्रतिस्थापन की कोई गुंजाइश नहीं रहती। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न निर्णयों में यह बार-बार प्रतिपादित किया गया है कि चयन समिति चयन प्रक्रिया के मध्य में किसी सार्वजनिक पद के लिए नियुक्ति की पात्रता शर्तों को परिवर्तित/शिथिल नहीं कर सकती।
    ऐसी मनमानी नियुक्तियाँ शैक्षणिक संस्थानों की निष्पक्षता एवं अखंडता में जनविश्वास को क्षीण करती हैं। संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती हैं। यह स्थापित विधि है कि किसी सार्वजनिक पद पर नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप ही की जानी चाहिए।

  • पिटकुल के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को निर्धारित नियमों के विपरीत : हाईकोर्ट

    उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल ने पिटकुल के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को निर्धारित नियमों के विपरीत बताते हुए रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने बुधवार को इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
    मुख्य अभियंता राजीव गुप्ता और अन्य की ओर से दायर याचिका में 10 सितंबर 2022 को जारी सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें प्रकाश चंद्र ध्यानी को पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार का आदेश दिया गया था।
    याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था, कि नियमित चयन प्रक्रिया लंबित होने के कारण, यह पदभार सबसे वरिष्ठ पात्र अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए था। उन्होंने दलील दी कि उत्तराखंड प्रबंध निदेशक एवं निदेशकों के चयन एवं नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारण नियम, 2021 के नियम 9-ए के तहत इस पद के लिए इंजीनियरिंग स्नातक की योग्यता अनिवार्य है। ये योग्यता कथित तौर पर प्रकाश चंद्र ध्यानी के पास नहीं है।
    याचिका स्वीकार करते हुए पीठ ने माना कि नियुक्ति में नियम 9-ए का उल्लंघन हुआ है। हाईकोर्ट ने कहा कि 2021 के नियमों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएं तब तक अनिवार्य हैं, जब तक कानूनी रूप से वैध छूट न दी जाए। इस मामले में उत्तराखंड सरकार यह स्पष्ट रूप से साबित करने में विफल रही, कि नियम 9-ए के तहत छूट का उचित उपयोग किया गया था।
    हाईकोर्ट नैनीताल ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस या तर्कसंगत आधार नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि किसी वैकल्पिक योग्यता को आवश्यक डिग्री के समकक्ष स्वीकार किया गया था। इसलिए नियुक्ति को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता है।
    आदेश में कहा गया है कि सरकार इस मामले पर पुनर्विचार करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन कोई भी नया निर्णय 2021 के नियमों के सख्त अनुपालन में होना चाहिए। इसमें कहा गया कि यदि दोबारा छूट दी जाती है, तो सरकार को वस्तुनिष्ठ और दस्तावेजी आधार प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही स्पष्ट करना होगा, कि योग्यता की समतुल्यता कैसे निर्धारित की गई।
    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने प्रतिवादी की योग्यता, नेतृत्व क्षमता या पद के लिए उपयुक्तता पर कोई टिप्पणी नहीं की है। फैसले में कहा गया कि नयी नियुक्ति होने तक उत्तराखंड सरकार कानून के अनुसार अंतरिम व्यवस्था कर सकती है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने पलटा उत्तराखंड HC का फैसला, दो न्यायिक अधिकारियों को राहत

    नैनीताल: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए दो न्यायिक अधिकारियों को उत्तराखंड न्यायिक सेवा छोड़कर दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी को केवल इसलिए आगे बढ़ने से नहीं रोका जा सकता कि उनके जाने से राज्य में पद खाली हो जाएंगे।
    मामले के अनुसार अनुभूति गोयल और एक अन्य याचिकाकर्ता वर्तमान में उत्तराखंड में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर तैनात थे। उन्होंने उत्तराखंड में नियुक्ति से पहले ही दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा-2023 के लिए आवेदन किया था। जब उन्होंने दिल्ली की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में सफलता प्राप्त कर ली, तो उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय से साक्षात्कार में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।
    उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2025 को उनकी अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट की ओर से दलील दी गई कि अधिकारियों के जाने से राज्य में जजों के पद रिक्त होंगे और लंबित मुकदमों पर इसका बुरा असर पड़ेगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बेहतर करियर चुनने से रोकना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत दिए गए पेशे के अधिकार और अन्य मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और यदि याचिकाकर्ताओं को अनुमति नहीं दी जाती है, तो यह उनके भीतर नकारात्मकता और कुंठा पैदा कर सकता है।
    पीठ ने कहा कि इन जजों के दिल्ली प्रदेश जाने से होने वाली रिक्तियों को नई भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से जल्द से जल्द भरा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल होने में हुई देरी के बावजूद याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता उनकी मूल मेरिट लिस्ट के अनुसार ही तय की जाएगी।
    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ताओं की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया पूरी करे ताकि, वे 13 फरवरी 2026 तक दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हो सकें। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि याचिकाकर्ताओं का हित राज्य की न्यायिक सेवा में रिक्तियों की चिंता से कहीं अधिक सर्वोपरि है।

     

     

     

     

  • स्कूल ट्रिप में हादसा, टेंपो खाई में पलटी

    उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भीमताल-हल्द्वानी रोड पर आज एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। बोहराकून के पास छात्रों से भरा टेंपो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर करीब 50 फीट खाई में जा गिरा। हादसे में ट्रैवलर में सवार लगभग 24-25 बच्चे घायल हो गए। घायलों को तत्काल रेस्क्यू कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, भीमताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
    जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद के एक निजी कॉलेज के छात्र भीमताल और नैनीताल घूमने आए थे। दिन भर कैंची धाम, नैनीताल और आसपास के पर्यटक स्थल देखने के बाद वे वापस गाजियाबाद लौट रहे थे। इसी दौरान टेंपो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में गिर गया।
    टेंपो चालक अमित कुमार ने बताया, हमारे पीछे एक कार आ रही थी, जिसमें कुछ युवक सवार थे। उन्हें दो बार पास दिया गया था, लेकिन वे बार-बार पास मांग रहे थे। गाड़ी पास देते वक्त टेंपो का टायर सड़क किनारे बाहर निकल गया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हुआ।
    हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर भीमताल पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग पहुंचे। उन्होंने घायलों को खाई से बाहर निकाल कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार में 3-4 बच्चों की चोटें गंभीर बताई जा रही हैं। पुलिस अब घायलों और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जानकारी जुटा रही है।
    स्थानीय अधिकारियों और पुलिस का कहना है कि सड़क का संकरापन और वाहन संचालन में सावधानी की कमी हादसे का मुख्य कारण रही है। टेंपो ट्रैवलर में अचानक नियंत्रण खो जाने के कारण यह दुर्घटना हुई।
    भीमताल पुलिस ने हादसे के बाद सभी वाहन चालकों से सड़क पर सतर्क और सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए रोड किनारे सुरक्षा व्यवस्था और यातायात संकेतों को मजबूत किया जाएगा।