Category: रुद्रप्रयाग

  • तुंगनाथ-चोपता में मौसम का कहर, आँधी-तूफान में फँसे लोगों का रेस्क्यू

    रूद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थल तुंगनाथ-चोपता क्षेत्र में अचानक बदले मौसम ने भारी तबाही मचा दी। तेज आँधी, तूफान और प्रतिकूल मौसम के चलते क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्रियों और स्थानीय लोगों के फँसने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, राहत एवं बचाव एजेंसियों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
    जानकारी के अनुसार, जिला आपातकालीन परिचालन केन्द्र रुद्रप्रयाग को शुक्रवार सायं 04रू17 बजे डायल 112 के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि तुंगनाथ-चोपता क्षेत्र में अचानक आए तेज तूफान और खराब मौसम के कारण कई लोग रास्तों में फँस गए हैं। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तत्काल डीडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा 108 एम्बुलेंस सेवा की टीमों को मौके के लिए रवाना किया गया।
    दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और लगातार बिगड़ते मौसम के बीच राहत एवं बचाव दलों ने साहस और तत्परता का परिचय देते हुए रेस्क्यू अभियान चलाया। डीडीआरएफ टीम ने एक घायल व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर विभागीय वाहन के माध्यम से 108 एम्बुलेंस तक पहुँचाया, जिसके बाद घायल को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ भेजा गया। इस दर्दनाक घटना में एक यात्री की मौत की सूचना भी सामने आई है, हालांकि प्रशासन द्वारा मृतक की आधिकारिक पुष्टि एवं विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
    अचानक बदले मौसम और तेज हवाओं के चलते तुंगनाथ-चोपता क्षेत्र में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना रहा। कई यात्री सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। वहीं प्रशासन और रेस्क्यू टीमों की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने यात्रियों एवं पर्यटकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
    गौरतलब है कि इन दिनों तुंगनाथ-चोपता क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। ऐसे में अचानक बदलते मौसम ने एक बार फिर पहाड़ों में सतर्कता और सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।

  • केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की कठिन परीक्षा

    रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा अपने चरम पर है, लेकिन बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच 19 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर व्यवस्थाएं दबाव में नजर आने लगी हैं। यात्रा मार्ग के कई हिस्सों में लग रहे लंबे जाम और अव्यवस्थाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे यात्रा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं तुंगनाथ धाम में यात्रियों के बीच मारपीट के वीडियो सामने आने से भी व्यवस्थाओं पर चर्चा तेज हो गई है।
    जानकारी के अनुसार भीमबली, लिनचोली, जंगलचट्टी सहित कई संवेदनशील स्थानों पर मार्ग अत्यंत संकरा होने के कारण यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। एक ओर हजारों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर घोड़ा-खच्चर, पालकी एवं स्थानीय सेवा प्रदाताओं की आवाजाही से कई स्थानों पर भीड़ का दबाव बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप श्रद्धालुओं को घंटों तक जाम में फंसकर आगे बढ़ने का इंतजार करना पड़ रहा है।
    वायरल वीडियो में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक-दूसरे के पीछे लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। विशेष रूप से भीमबली और लिनचोली क्षेत्र में स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है, जहां मार्ग की सीमित चौड़ाई के कारण आवाजाही बार-बार बाधित हो रही है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को उठानी पड़ रही है।
    यात्रियों का कहना है कि मार्ग के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्थाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं। पहाड़ी कटाव वाले क्षेत्रों और गहरी खाइयों के समीप पर्याप्त बैरिकेडिंग एवं सुरक्षा प्रबंधों का अभाव दिखाई देता है। लगातार बढ़ रही भीड़ के बीच संकरे रास्तों पर किसी भी प्रकार की आपात स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।
    श्रद्धालुओं द्वारा यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि भीड़ नियंत्रण और यात्री प्रबंधन के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं सुरक्षा कर्मियों की तैनाती नहीं दिखाई दे रही है। कई यात्रियों ने लंबे इंतजार, थकान, ऑक्सीजन की कमी तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायतें भी सामने रखी हैं।
    चारधाम यात्रा के चरम सीजन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते भीड़ प्रबंधन, मार्ग सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और निगरानी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
    स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाए, मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए तथा पैदल मार्ग पर प्रभावी भीड़ नियंत्रण तंत्र लागू कर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
    फिलहाल केदारनाथ पैदल मार्ग पर बढ़ती भीड़, लगते जाम और सामने आ रही अव्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कदमों और यात्रा प्रबंधन को बेहतर बनाने के प्रयासों पर टिकी हैं।
    वहीं, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने बताया कि केदारनाथ पैदल मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। तीर्थ यात्रियों को पैदल मार्ग पर संकरे जगहों पर लाइन बनाकर चलने को कहा जा रहा है। साथ ही हर समय बारिश पर भी नजर बनाए जाने को कहा है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ यात्रा मार्ग के साथ ही तुंगनाथ धाम यात्रा में भी मारपीट के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिन पर कार्यवाही की जा रही है।

  • हिमालय और दक्षिण भारत की संस्कृति का अद्भुत संगम

    रूद्रप्रयाग। सनातन संस्कृति की अखंडता और भारत की आध्यात्मिक एकता का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब तमिलनाडु से भगवान मुरुगन (कार्तिकेय स्वामी) की दुर्लभ पंचधातु प्रतिमा उत्तराखंड के प्राचीन कार्तिक स्वामी मंदिर में भेंट की गई। यह ऐतिहासिक पहल तमिलनाडु के प्रसिद्ध मुरुगन भक्त एवं शोधकर्ता जेएसके गोपी द्वारा की गई, जिसने हिमालय और दक्षिण भारत के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है।
    भगवान कार्तिकेय की दिव्य उपासना पर वर्षों से शोध कर रहे जेएसके गोपी ने बताया कि उत्तराखंड स्थित कार्तिक स्वामी धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भगवान मुरुगन की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा एक दिव्य केंद्र है। मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय का हिमालय -2से तमिलनाडु के प्रसिद्ध पलानी मुरुगन मंदिर तक गहरा आध्यात्मिक संबंध रहा है।
    इसी आध्यात्मिक अनुभूति और साधना के दौरान प्राप्त प्रेरणा के बाद जेएसके गोपी ने भगवान मुरुगन की दुर्लभ पंचधातु प्रतिमा कार्तिक स्वामी मंदिर को समर्पित की। यह प्रतिमा धार्मिक आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड और तमिलनाडु के सांस्कृतिक मिलन का जीवंत प्रतीक बन गई है।
    विशेष आकर्षण का केंद्र बनी यह प्रतिमा भगवान मुरुगन के पारंपरिक “वेल” (भाला) धारण किए स्वरूप में नहीं, बल्कि दुर्लभ “आशीर्वाद मुद्रा” (आशीर्वादा कोलम) में स्थापित की गई है। यह स्वरूप करुणा, शांति, कृपा और मानव कल्याण का प्रतीक माना जाता है, जिसने श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक भाव से जोड़ दिया।
    यह आयोजन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस व्यापक विजन को भी मजबूती देता है, जिसके तहत राज्य सरकार भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने और विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
    मान्यता है कि भगवान मुरुगन ने हिमालय स्थित कार्तिक स्वामी धाम से तमिलनाडु तक आध्यात्मिक यात्रा की थी। अब वर्षों बाद भगवान मुरुगन की प्रतिमा का तमिलनाडु से पुनः उत्तराखंड पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए किसी दिव्य संयोग से कम नहीं माना जा रहा। इस आयोजन ने दो महान आध्यात्मिक परंपराओं को एक सूत्र में पिरोते हुए “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त संदेश दिया है।
    इस अवसर पर जेएसके गोपी की मुलाकात उत्तराखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रविशंकर से भी हुई, जो कार्तिक स्वामी मंदिर के विकास और उत्तराखंड-तमिलनाडु सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं कार्तिकेय मंदिर समिति के अध्यक्ष विक्रम नेगी ने इस पहल का श्रद्धापूर्वक स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

  • केदारनाथ पैदल मार्ग पर हुड़दंगियों पर रुद्रप्रयाग पुलिस का बड़ा एक्शन

    केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान पैदल मार्ग पर अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ रुद्रप्रयाग पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। लिंचोली क्षेत्र में वायरल हुए मारपीट के वीडियो का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 घोड़ा-खच्चर संचालकों को हिरासत में लिया है। साथ ही संबंधित व्यक्तियों के अश्व संचालन लाइसेंस निरस्त करने के लिए िरिपोर्ट भी संबंधित विभाग को भेज दी गई है।
    रुद्रप्रयाग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केदारनाथ यात्रा को हर हाल में सुरक्षित, व्यवस्थित और भयमुक्त बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। अब तक लगभग 9.5 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं और यात्रा सुचारू रूप से जारी है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर मारपीट, हुड़दंग और अराजक गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
    दरअसल, बीती 23 मई 2026 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें 4 से 5 लोग लाठी-डंडों के साथ आपस में मारपीट करते दिखाई दे रहे थे। बताया गया कि यह घटना केदारनाथ पैदल मार्ग के लिंचोली क्षेत्र की है। वायरल वीडियो से यात्रा मार्ग पर मौजूद श्रद्धालुओं में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग नीहारिका तोमर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कोतवाली सोनप्रयाग तथा पैदल यात्रा मार्ग की सभी चौकियों को आरोपियों की पहचान कर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए। चौकी प्रभारी गौरीकुण्ड द्वारा लगातार पूछताछ, वीडियो विश्लेषण और चिन्हीकरण के आधार पर गौरीकुण्ड घोड़ा पड़ाव क्षेत्र से 5 संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया गया।
    पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि घोड़ों के आपस में टकराने और लेन-देन के विवाद को लेकर कहासुनी हुई थी, जो बाद में मारपीट में बदल गई। पुलिस के अनुसार इस घटना से यात्रा मार्ग की शांति भंग हुई और श्रद्धालुओं में भय का माहौल उत्पन्न हुआ।
    गौरीकुण्ड पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत शांति भंग की कार्यवाही की है। साथ ही जिन लोगों ने इन व्यक्तियों को अपने यहां कार्य पर रखा था, उन्हें भी कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति को बिना पुलिस सत्यापन के रोजगार न दिया जाए।
    मारपीट में शामिल प्रथमपार्टी दिनेश शाहू पुत्र राधेश्याम शाहू निवासी पटरी, इन्द्रेश हॉस्पिटल के पीछे, थाना पटेल नगर देहरादून, जसपाल सिंह पुत्र सोहन सिंह निवासी रांवलेख, थाना ऊखीमठ, जनपद रुद्रप्रयाग एवं दूसरी पार्टी  अर्पित चन्द्रा पुत्र विनोद चन्द्रा निवासी ग्राम भनेड़ा, थाना कीरतपुर, जनपद बिजनौर, उत्तर प्रदेश, शैलेन्द्र सिंह पुत्र हीरा सिंह निवासी रामपुर, थाना सोनप्रयाग जनपद रुद्रप्रयाग, विशाल सिंह पुत्र रामकरण सिंह, मोहम्मद उवेश पुत्र मोहम्मद लियाकत, मोहम्मद फरदीन पुत्र मोहम्मद इलियास शामिल थे।
    पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने केदारनाथ यात्रा से जुड़े सभी व्यवसायियों, घोड़ा-खच्चर संचालकों और मजदूरों से अपील की है कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की मारपीट, अराजकता या ऐसा कृत्य न करें जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं यात्रा व्यवस्था प्रभावित हो। पुलिस ने चेतावनी दी है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्यवाही जारी रहेगी।

  • फर्जी हेली टिकट बेचने वाले ठगों पर ‘साइबर कॉम्बैट फोर्स’ का बड़ा प्रहार केदारनाथ यात्रा को “साइबर सेफ” बनाने में जुटी रुद्रप्रयाग पुलिस

    विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और साइबर अपराध मुक्त बनाने के लिए रुद्रप्रयाग पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है। पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग सुश्री नीहारिका तोमर के कुशल निर्देशन में जनपद की साइबर सेल टीम यात्रा शुरू होने से पहले ही लगातार सक्रिय रहकर साइबर ठगों के खिलाफ बड़ा अभियान चला रही है।
    विशेष रूप से हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग के नाम पर श्रद्धालुओं से ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ ‘साइबर कॉम्बैट फोर्स’ के माध्यम से व्यापक डिजिटल कार्रवाई की जा रही है। साइबर सेल ने सोशल मीडिया पर सक्रिय फर्जी अकाउंट, वेबसाइट और बैंक खातों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 347 फर्जी फेसबुक पेज, 19 फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट, 30 फर्जी वेबसाइट और 189 व्हाट्सएप अकाउंट व मोबाइल नंबरों को चिन्हित कर बंद और ब्लॉक कराया है।
    पुलिस के अनुसार केदारनाथ यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग के नाम पर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं से ठगी की 48 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर सेल ने ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 118 बैंक खातों पर होल्ड लगवाया है, जिससे पैसों के लेन-देन पर रोक लगाई जा सके।
    इस मामले में कोतवाली गुप्तकाशी और कोतवाली सोनप्रयाग में कुल 03 मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
    वर्ष 2026 में अब तक जनपद रुद्रप्रयाग में कुल 229 साइबर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 144 शिकायतों पर जांच और वैधानिक कार्रवाई तेजी से प्रचलित है। विभिन्न साइबर अपराधों से संबंधित अब तक 12 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
    साइबर सेल केवल अपराधियों पर कार्रवाई ही नहीं कर रही, बल्कि ठगी का शिकार हुए लोगों की रकम वापस दिलाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। त्वरित तकनीकी कार्रवाई के माध्यम से अब तक 03 मामलों में पीड़ितों की कुल 1,12,968 रुपये की धनराशि सफलतापूर्वक रिफंड कराई जा चुकी है।
    पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि केदारनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर टिकट की बुकिंग केवल आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट ीमसपलंजतं.पतबजब.बव.पद से ही करें। सोशल मीडिया पर लुभावने ऑफर देने वाले अज्ञात व्यक्तियों, फेसबुक-इंस्टाग्राम विज्ञापनों, व्हाट्सएप नंबरों और फत् कोड के माध्यम से किसी भी प्रकार का एडवांस भुगतान न करें। किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

  • बारिश से गौरीकुंड-सोनप्रयाग मार्ग पर तीन स्थानों पर लैंडस्लाइड

    रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर लगातार खराब हो रहे मौसम ने एक बार फिर यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीती रात हुई तेज बारिश के कारण सोनप्रयाग-गौरीकुंड मोटर मार्ग पर तीन स्थानों पर भारी भूस्खलन हो गया, जिससे यात्रा मार्ग अचानक बाधित हो गया। पहाड़ियों से लगातार मलबा और पत्थर गिरने के कारण क्षेत्र में खतरे की स्थिति बनी रही।
    सोनप्रयाग-गौरीकुंड मुख्य मार्ग पर मुनकटिया स्थान के पास भारी बारिश के कारण अचानक स्लाइडिंग होने से सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिससे बड़ी संख्या में यात्री मार्ग के दोनों ओर फंस गए। घटना की सूचना डीसीआर रुद्रप्रयाग द्वारा सीडीआरएफ को दी गई, जिसके बाद सीडीआरएफ टीम उपनिरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में सोनप्रयाग से तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने एहतियातन यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया और सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
    जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने पूरी रात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हालात की लगातार निगरानी की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता रहे और मार्ग को जल्द से जल्द सुचारु किया जाए।
    कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद प्रशासनिक टीमों ने महज 30 मिनट के भीतर पैदल यात्रियों के लिए मार्ग खोल दिया। पूरी रात राहत, निगरानी और सुरक्षा अभियान लगातार जारी रहा। जेसीबी मशीनों की सहायता से मलबा हटाकर यात्रा मार्ग को पुनः सुचारु कर दिया गया है। मौके पर पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य राहत एजेंसियों की टीमें लगातार तैनात रहीं और यात्रियों को सुरक्षित निकालने का कार्य करती रहीं। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और समन्वित प्रयासों से हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
    उपनिरीक्षक एसडीआरएफ आशीष डिमरी ने कहा कि एसडीआरएफ टीम ने सड़क के दूसरी ओर फंसे लगभग 10,450 यात्रियों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। इसके बाद जेसीबी मशीन की सहायता से मार्ग पर जमा मलबा हटाकर सड़क को पुनः वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु किया गया। रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद एसडीआरएफ टीम रात 12ः45 बजे सकुशल कैंप वापस पहुंची। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।

  • केदारनाथ धाम यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में, सुरक्षा व व्यवस्थाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    रुद्रप्रयाग: आगामी 22 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो रही विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां तेज कर दी हैं। शनिवार को जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समन्वय एवं समीक्षा बैठक में यात्रा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ टीम भावना में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
    बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग एवं लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित सड़कों की स्थिति की समीक्षा करते हुए भूस्खलन संभावित क्षेत्रों—सिरोबगड़, बांसवाड़ा, जवाड़ी बायपास एवं सिंकिंग जोन—में समयबद्ध उपचारात्मक कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।बदरीनाथ रोड को नई टनल से जोड़ने वाले पुल का निर्माण शीघ्र पूर्ण करने, आवश्यक स्थलों पर भूमि अधिग्रहण कर अतिक्रमण हटाने तथा हटाए गए मलबे के निस्तारण डंपिंग जोन चिन्हित करने को कहा गया है। 15 मार्च तक नालियों का निर्माण, सड़क किनारे झाड़ियों की कटाई, अनावश्यक सामग्री हटाने तथा रिटर्निंग वॉल, क्रैश बैरियर व डायवर्जन स्थलों पर स्पष्ट साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए।
    शटल सेवा एवं परिवहन व्यवस्था की समीक्षा के दौरान एआरटीओ से ग्रीन कार्ड एवं ट्रिप कार्ड की जानकारी ली गई। रात्रिकालीन संचालन में ओवरचार्जिंग, रोड सेफ्टी और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए टैक्सी यूनियनों के साथ समन्वय स्थापित कर समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए गए। गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, यात्री विश्राम गृह, सुरक्षा प्रबंध, वैली ब्रिज, मार्ग चौड़ीकरण, नेटवर्क कनेक्टिविटी, इमरजेंसी हेलिपैड, रैन शेल्टर एवं सफाई व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। जोखिमयुक्त पेड़ों की कटान तथा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी क्षेत्र में दुकानों की समस्याओं के समाधान पर भी चर्चा हुई।
    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस विभाग को यात्रा मार्गों एवं पड़ावों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। बाहरी जिलों से आने वाली पुलिस फोर्स के आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। केदारनाथ क्षेत्र की विषम मौसम परिस्थितियों को देखते हुए मेटल डिटेक्टर सहित सुरक्षा उपकरणों के लिए स्थायी स्थान चिन्हित करने पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग निहारिका तोमर सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
    जी-मैक्स प्रणाली के अंतर्गत मॉनिटरिंग कैमरा एक्सेस, रियल टाइम वेदर रिपोर्ट तथा घोड़ा-खच्चर एवं डंडी-कंडी संचालन के लिए स्मार्ट कार्ड व्यवस्था की जानकारी ली गई. कैमरा एक्सेस रखने वाले अधिकारियों की सूची व्यू-ओनली एवं कंट्रोल एक्सेस श्रेणी में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
    यात्रा प्रारंभ से पूर्व प्रभावी बैरिकेडिंग सुनिश्चित करने तथा बिना पंजीकरण वाले घोड़ा-खच्चरों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। ट्रैक रूट पर तीन चेक प्वाइंट स्थापित किए जाएंगे। बिना पंजीकरण पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत गुप्तकाशी से केदारनाथ तक 15 अस्पताल संचालित किए जाएंगे। गंभीर मरीजों को हेलीकॉप्टर एंबुलेंस के माध्यम से इवैक्यूएट करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के लिए 4-5 स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी। जिन पर टोकन संख्या, मंदिर बंद होने का समय, स्वच्छता संदेश, मौसम की जानकारी एवं मंदिर के लाइव दृश्य प्रदर्शित होंगे।

     

     

     

     

     

  • भौंर पहुंचे सीएम धामी, आपदा पीड़ितों को दी सहायता

    लोक पर्व इगास के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को जनपद रुद्रप्रयाग की तहसील वसुकेदार के ग्राम भौंर पहुंचे। यहां उन्होंने हाल ही में आई आपदा से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और राहत व पुनर्निर्माण कार्यों की स्थलीय समीक्षा की।
    मुख्यमंत्री धामी ने आपदा में जान गंवाने वाले वन श्रमिक कुलदीप सिंह नेगी और सते सिंह के परिजनों को आर्थिक सहायता के रूप में पांच-पांच लाख रुपये के चेक प्रदान किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और राहत कार्यों के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। किसी भी पीड़ित को अकेला महसूस नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ग्राम भौंर में आपदा पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रभावितों को समयबद्ध राहत सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए।
    उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, बिजली, आवास और संचार व्यवस्था जैसी सभी क्षतिग्रस्त संरचनाओं का त्वरित पुनर्निर्माण किया जा रहा है ताकि लोगों का जीवन जल्द सामान्य हो सके।
    मुख्यमंत्री धामी ने आपदा प्रभावित परिवारों के साथ मध्यान्ह भोजन भी किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार हर कठिन घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक आपदा-संवेदनशील राज्य है, इसलिए सरकार ने आपदा प्रबंधन को सशक्त और प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष के अंतर्गत आपदा प्रभावितों के पुनर्वास हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने लोगों से धैर्य बनाए रखने और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।
    मुख्यमंत्री के आगमन पर ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे त्वरित राहत प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।
    इस अवसर पर विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, पुलिस उपाधीक्षक प्रबोध घिल्डियाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार, तहसील प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, पेयजल निगम के अधिकारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

     

    मुख्यमंत्री की घोषणाएं

    आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए स्थायी हेलीपैड निर्माण की घोषणा।

    ग्राम भौंर में आंगनवाड़ी केंद्र निर्माण की स्वीकृति।

    भौंर तक मोटर सड़क निर्माण हेतु एक करोड़ रुपये की धनराशि देने की घोषणा।

    छेनागाड़ के विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए योजना बनाने के निर्देश।

    आपदा में क्षतिग्रस्त वाहनों के मुआवजे की भी घोषणा।

  • मुख्य सचिव ने केदारनाथ धाम पहुंचकर किए बाबा केदार के दर्शन

    राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को पवित्र केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और धाम परिसर में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने धाम क्षेत्र में विभिन्न चरणों में चल रहे कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति एवं कार्य निष्पादन की गहन समीक्षा की।
    निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी प्रतीक जैन से सभी कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सौंदर्यबोध और धार्मिक आस्था का पूरा ध्यान रखा जाए।
    मुख्य सचिव ने कहा कि 23 अक्टूबर को बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं, ऐसे में धाम क्षेत्र में सुरक्षा, सामग्री संरक्षण और बर्फबारी की स्थिति में कार्यों के रखरखाव को लेकर पूरी तैयारी रखी जाए। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि अब से ही यात्रा सत्र 2026 की तैयारी प्रारंभ की जाए।
    उन्होंने कहा कि अगले यात्रा सीजन में यात्रियों को और बेहतर सुविधाएं देने के लिए बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच मजबूत समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
    मुख्य सचिव ने क्या कहा केदारनाथ धाम आज पूरे देश में पुनर्निर्माण और पुनरुत्थान का प्रतीक बन चुका है। हमारा उद्देश्य सिर्फ भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आस्था और सुविधा का संतुलन बनाना है, जिससे उन्हें एक पवित्र, सुरक्षित और दिव्य अनुभव मिल सके।
    इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे, मुख्य कार्याधिकारी मंदिर समिति विजय थपलियाल, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल शुक्ला, अधिशासी अभियंता डी.डी.एम. विनय झिंकवाण, एआरटीओ रुद्रप्रयाग धर्मेंद्र सिंह बिष्ट अन्य विभागीय अधिकारी भी रहे मौजूद।
    धाम में चल रहे कार्यों की सराहना करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यह परियोजना उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है और इसके सफल संचालन से श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ राज्य की पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर और सशक्त होगी।

  • चारों धामों में दीपावली की भक्ति-उल्लास से गूंज उठी वादियां

    उत्तराखंड के चारधामों में इस वर्ष दीपावली पर्व भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम दीपों की जगमगाहट से आलोकित हो उठे। मंदिर परिसरों से लेकर धाम क्षेत्र तक दीपों और फैंसी लाइटों की छटा देखते ही बनती थी। तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने मां गंगा, यमुना, केदारनाथ और बदरीनाथ के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना कर दीपावली पर्व की आराधना की।
    गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में दीपावली की रात दीपों से मंदिर परिसर रोशन रहा। मां गंगा और मां यमुना की विशेष आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। अब 22 अक्टूबर को गंगोत्री धाम के कपाट सुबह 11:36 बजे बंद किए जाएंगे, जबकि यमुनोत्री धाम के कपाट 23 अक्टूबर को भैया दूज के दिन दोपहर 12:30 बजे बंद होंगे।
    कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव, और मां यमुना की डोली खरसाली गांव रवाना होगी। धामों के कपाट बंद होते ही जिले में तीर्थाटन गतिविधियों पर विराम लग जाता है, हालांकि स्थानीय कारोबारियों ने सर्दियों में भी यात्रा जारी रखने की मांग की है।
    बदरीनाथ धाम में इस बार दीपावली पर 11 हजार दीप जलाकर मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया। पूरे धाम को पुष्पों और रोशनी से सजाया गया। भक्तों ने भगवान बदरीविशाल की आराधना कर मंगल कामनाएं कीं। मंदिर समिति की ओर से विशेष आयोजन किए गए, जिनमें तीर्थपुरोहितों और प्रशासनिक अधिकारियों की भी सहभागिता रही।
    केदारनाथ धाम दीपों और फूलों से सजा रहा। मंदिर परिसर को 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया, वहीं विशेष लाइटिंग से पूरी घाटी रोशन रही। दीपावली की रात मंदिर प्रांगण में दीप जलाकर भाईचारे और शांति का संदेश दिया गया। प्रशासन, पुलिस और मंदिर समिति के अधिकारियों ने मंदिर के चारों ओर दीप जलाए और मिठाइयों का आदान-प्रदान कर पर्व की शुभकामनाएं दीं।
    केदारनाथ में आतिशबाजी नहीं की गई, बल्कि पारंपरिक दीप जलाकर पर्व मनाया गया।
    जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में भी दीपावली का पर्व पूरी भव्यता के साथ मनाया गया। तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, फाटा, गौरीकुंड, चोपता, मयाली और जखोली समेत अन्य स्थानों पर घरों को दीपों, रंगोली और फूलों की लड़ियों से सजाया गया। लोगों ने घरों में पकवान और मिठाइयों के साथ त्योहार का आनंद लिया।
    कपाट बंदी के बाद तीर्थाटन ठप हो जाता है, जिससे यात्रा व्यवसाय से जुड़े लोग प्रभावित होते हैं। स्थानीय कारोबारियों आशीष सेमवाल और विनय उनियाल ने मांग की है कि शीतकालीन प्रवास वाले स्थलों – खरसाली और मुखबा तक तीर्थयात्रा को बढ़ावा दिया जाए। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु गंगा और यमुना के दर्शन कर बर्फबारी का भी आनंद ले सकेंगे।