Category: हल्द्वानी

  • 4 जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा

    हल्द्वानी। विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष 4 जुलाई से शुरू होने जा रही है। यात्रा को लेकर कुमाऊं मंडल विकास निगम यानी केएमवीएन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार यात्रा का पहला दल दिल्ली से रवाना होकर टनकपुर पहुंचेगा और वहां से धारचूला होते हुए कैलाश मानसरोवर के लिए आगे बढ़ेगा। यात्रा के सफल संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर प्रशासन और केएमवीएन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
    आस्था, अध्यात्म और कठिन पर्वतीय सफर का संगम कही जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष 4 जुलाई से शुरू होने जा रही है। यात्रा को लेकर कुमाऊं मंडल विकास निगम यानी केएमवीएन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं और यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। केएमवीएन के अनुसार इस वर्ष कुल 10 दल कैलाश मानसरोवर यात्रा में शामिल होंगे। प्रत्येक दल में लगभग 50 श्रद्धालु रहेंगे, जिससे करीब 500 यात्री इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनेंगे। पहला दल 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होकर टनकपुर पहुंचेगा।
    इसके बाद 5 जुलाई को यात्रियों का जत्था पिथौरागढ़ होते हुए धारचूला के लिए रवाना होगा। यात्रा का पारंपरिक मार्ग टनकपुर, धारचूला, गुंजी और लिपुलेख दर्रे से होकर कैलाश मानसरोवर तक रहेगा। यह यात्रा 4 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त तक संचालित की जाएगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। केएमवीएन के अधिकारियों का कहना है कि यात्रा मार्ग पर सभी विश्राम स्थलों और अतिथि गृहों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
    कुमांऊ मंडल विकास निगम मनीष कुमार सिंह ने कहा कि 4 जुलाई को मानसरोवर यात्रा का पहला दल दिल्ली से टनकपुर पहुंचेगी। रात्रि विश्राम के बाद श्रद्धालु अगले पड़ाव पर पहुंचेंगे। 16 अगस्त तक ये यात्रा प्रस्तावित है। मानसरोवर यात्रा की गाइडलाइन के अनुसार यात्रियों के रुकने और भोजन से संबंधित सभी तैयारी कर ली गयी है। हल्द्वानी में लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस को यात्रियों के रुकने के लिए केएमवीएन को सौंप दिया है। इस बार यात्रा में 10 दल मानसरोवर यात्रा में जाएंगे। किसी भी चुनौती के लिए प्रशासन और केएमवीएन पूरी तरह तैयार है।
    यात्रा से लौटने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए हल्द्वानी स्थित लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस को भी केएमवीएन को हस्तांतरित कर दिया गया है। इस गेस्ट हाउस का जल्द ही नवीनीकरण और मेकओवर किया जाएगा, जिससे यात्रा पूरी कर लौटने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर आवास और विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। कुल मिलाकर, कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल संचालन के लिए केएमवीएन, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं, ताकि श्रद्धालुओं की यह आध्यात्मिक यात्रा सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार बन सके।

  • संविदा वनकर्मी की हत्या का खुलासा,आरोपी चौकीदार गिरफ्तार

    हल्द्वानी। पीपलपड़ाव जंगल क्षेत्र में संविदा वनकर्मी की हत्या का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी चौकीदार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के खुलासे के अनुसार  शराब के नशे में हुए विवाद के बाद आरोपी ने अपने साथी पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गयी कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली है।
    मामले का खुलासा करते हुए एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि 23 मई को भाखड़ा रेंज के प्लॉट संख्या-71 में एक व्यक्ति की हत्या की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही एसपी सिटी, सीओ हल्द्वानी अमित सैनी और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची।
    घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया और घटनास्थल से वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए। मृतक की पहचान मेवा लाल पुत्र हरी लाल निवासी कौशांबी, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई, जो वन विभाग में रोपण रक्षक संविदा कर्मी के पद पर कार्यरत था। शुरुआती जांच में मौके पर मौजूद चौकीदार तिवारी सिंह के बयान संदिग्ध पाए गए। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने हत्या की बात कबूल कर ली। आरोपी ने बताया कि घटना वाली रात वो और मेवा लाल साथ में शराब पी रहे थे। इसी दौरान दोनों के बीच कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर तिवारी सिंह ने गुस्से में आकर कुल्हाड़ी से मेवा लाल पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी तिवारी सिंह निवासी गूलरभोज, दिनेशपुर को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • दो गुटों में खूनी संघर्ष मामला, पड़ताल में जुटी पुलिस

    रुड़की: हरिद्वार जनपद के मंगलौर कोतवाली क्षेत्र से एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। मंगलौर क्षेत्र के घोसीपुरा गांव में बीते दिन हुए दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष मामले में एक युवक हाथ में तमंचा लिए सरेआम घूमता हुआ नजर आया, जब लोगों ने उसे पकडा तो चौंकाने वाली बात सामने आई। पकड़े जाने पर युवक ने कैमरे के सामने उसे हत्या की सुपारी देकर भेजे जाने की बात कही। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच पड़ताल करने में लगी हुई है। मंगलौर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह ने कहा कि अभी तक की जांच में सामने आया है कि कुछ लोग युवक से जबरदस्ती ऐसा बयान दिला रहे हैं, मामले की जांच की जा रही है।
    दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, वायरल वीडियो मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के घोसीपुरा गांव का बताया जा रहा है। घोसीपुरा गांव में बीते दिन 7 फरवरी को दो पक्षों में पुरानी चुनावी रंजिश को लेकर खूनी संघर्ष हो गया था, वहीं इस खूनी संघर्ष में एक ही पक्ष के दो लोग घायल हो गए थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बिना देरी किए अपने सरकारी वाहन से घायलों को उपचार के लिए रुड़की के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां से एक की हालत को नाजुक मानते हुए डॉक्टरों ने हायर सेंटर के लिए रेफर किया था। हालांकि अभी इस बवाल की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि इस घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
    वहीं वीडियो सामने आने के बाद मामले में नया मोड़ ला दिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक युवक के हाथ में देशी तमंचा है और कुछ लोग उसे घेरे हुए हैं। ​बताया गया है कि ग्रामीणों ने जब युवक को दबोचा और उससे पूछताछ की तो उसने जो खुलासा किया वो दंग करने वाला था। दरअसल युवक ने कैमरे के सामने कबूला कि उसे ‘दिलशाद’ नाम के शख्स ने ‘सद्दाम’ को गोली मारने के लिए भेजा है। वहीं जब ग्रामीणों ने उसे पकड़ने की कोशिश की तो युवक तमंचा लहराते हुए मौके से फरार हो गया, वहीं इस वीडियो के वायरल होने के बाद से ही मंगलौर कोतवाली पुलिस एक्शन मोड में आ गई है। हालांकि पुलिस ने पहले ही घायलों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। लेकिन अब इस तमंचा वाला वायरल वीडियो को पुलिस ने बेहद गंभीरता से लिया है। फिलहाल पुलिस इस वायरल वीडियो की सत्यता तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
    मंगलौर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में है। वीडियो में तमंचे के साथ जो युवक दिखाई दे रहा है उसकी तलाश की जा रही है। उनका कहना है कि अभी तक की जांच में सामने आया है कि कुछ लोग युवक से जबरदस्ती ऐसा बयान दिला रहे हैं, लेकिन मामले की गंभीरता से जांच पड़ताल की जा रही।

     

     

     

     

     

  • राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के 18,146 छात्रों को दी दीक्षांत उपाधियाँ

    हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के दशम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुल 18,146 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा स्तर की उपाधियाँ प्रदान की गईं, जबकि 6 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि से सम्मानित किया गया।
    राज्यपाल ने विद्यार्थियों को युवा दिवस की बधाई देते हुए कहा कि सत्य, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों के साथ निरंतर सीखते रहने का संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान उच्च शिक्षा को घर-घर पहुँचाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा को पहुँचाने और समाज को जोड़ने में करें।
    राज्यपाल ने आगे कहा कि शिक्षा एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है, और जीवन में सीखने की वृत्ति हमेशा बनाए रखनी चाहिए। डिजिटल शिक्षा आज के युग में अनिवार्य है, और राष्ट्र की प्रगति शिक्षा प्रणाली के स्तर से तय होती है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए भी बधाई दी।
    इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 की प्रगति रिपोर्ट पेश की, जिसमें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार, शोध गतिविधियों एवं शिक्षण गुणवत्ता सुदृढ़ीकरण के प्रयासों की जानकारी दी गई।
    दीक्षांत समारोह में विद्यापरिषद एवं कार्यपरिषद के सदस्य, अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, महापौर, विधायक, दर्जा मंत्री, पूर्व सांसद और विश्वविद्यालय के निदेशक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
    यह समारोह शिक्षा के महत्व, छात्र-छात्राओं की उपलब्धियों और विश्वविद्यालय की योगदानशील भूमिका को उजागर करने का अवसर रहा।

  • सोशल मीडिया स्टार ज्योति अधिकारी पर मुकदमा

    अपनी बेबाकी और सोशल मीडिया पर सक्रियता के लिए जानी जाने वाली नैनीताल जिले की हल्द्वानी निवासी ज्योति अधिकारी कानूनी पचड़े में फंस गई हैं। मुखानी थाना पुलिस ने एक महिला की तहरीर के आधार पर ज्योति के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। ज्योति पर पहाड़ की महिलाओं और देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप है।
    जानकारी के अनुसार, हिम्मतपुर मल्ला ऊंचापुल मुखानी निवासी जूही चुफाल ने हरिपुर लालमणी, किशनपुर घुड़दौड़ा निवासी ज्योति अधिकारी के खिलाफ तहरीर दी। जूही ने आरोप लगाया कि ज्योति अधिकारी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सार्वजनिक स्थान पर दराती लहराते हुए उत्तराखंड की महिलाओं, संस्कृति और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक भाषा और अपमानजनक टिप्पणी की।
    मुखानी थानाध्यक्ष सुशील जोशी ने बताया कि तहरीर के आधार पर ज्योति अधिकारी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धाराओं 27, 192, 196, 299 और 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने नोटिस जारी कर ज्योति को अपना पक्ष रखने और पूछताछ के लिए बुलाया। गुरुवार को ज्योति से करीब साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की गई। उन्होंने भरोसा दिया कि जांच में आगे भी सहयोग करेंगी, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
    इस दौरान ज्योति लगातार लाइव वीडियो बनाती रहीं। जब वह अपने पति के साथ कार में बैठकर थाने के लिए निकलीं, तो उन्होंने फिर एक लाइव वीडियो बनाते हुए मुकदमा दर्ज करने वाली जूही को निशाने पर लिया। वीडियो में उन्होंने कहा कि जिन्होंने यह केस किया है, वह महिला ही है, बच्ची है। ज्योति ने सीधे तौर पर जूही को मैदान में आने की चुनौती दी और कहा कि ऑनलाइन केस करने की बजाय सामने आकर हिम्मत दिखाएं।
    ज्योति अधिकारी के इस व्यवहार और सोशल मीडिया लाइव के चलते मामला और भी सुर्खियों में आ गया है। हल्द्वानी के लोगों में इस घटना को लेकर चर्चा जारी है और पुलिस जांच में अभी और खुलासे की संभावना जताई जा रही है।

  • मनरेगा से गारंटी गायब: यशपाल आर्य

    देहरादून/ हल्द्वानी: कभी गांव का मजदूर काम मांगता था और सरकार को काम देना पड़ता था। इसे कानून कहते थे। इसे अधिकार कहते थे। इसे मनरेगा कहते थे। अब कहा जा रहा है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)। नाम लंबा है, मगर मजदूर का हक छोटा हो गया है।
    नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य कहते हैं यह सिर्फ नाम बदलने की कहानी नहीं है, यह उस अधिकार को खत्म करने की कहानी है, जिसे संसद ने कानून बनाकर गरीब को दिया था। मनरेगा में काम मांगना मजदूर का अधिकार था। नई योजना में काम मांगने का अधिकार ही नहीं है। काम मिलेगा या नहीं, यह अब बजट तय करेगा। फंड खत्म, तो अधिकार खत्म।
    पहले केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाती थी, राज्य 10 प्रतिशत। अब केंद्र 60 प्रतिशत देगा, 40 प्रतिशत राज्य को देना होगा। यानी योजना केंद्र की, प्रचार केंद्र का, लेकिन खर्च राज्य करेंगे। और अगर तय बजट से ज्यादा मजदूर ने काम कर लिया, तो उसका भुगतान भी राज्य करे।
    मनरेगा की आत्मा ग्राम सभा और पंचायत थीं। गांव तय करता था कि उसे क्या काम चाहिए तालाब, रास्ता, पानी, मिट्टी। अब काम तय होंगे दिल्ली के डैशबोर्ड पर। जीआईएस, बायोमेट्रिक्स, जियो-टैगिंग, पीएम गति शक्ति और डिजिटल नेटवर्क। सवाल यह है जिस मजदूर के पास आज भी स्मार्टफोन नहीं है, जो अंगूठा मशीन पर ठीक से नहीं रख पाता, वह इस विकसित भारत में कहां खड़ा होगा?
    यशपाल आर्य कहते हैं नई स्कीम में खेती के सीजन में दो महीने काम की कोई गारंटी नहीं है। यानी जब खेतों में काम नहीं होगा, तब सरकार भी हाथ खड़े कर देगी। मजदूर अपने भाग्य के भरोसे होगा या तो कम अनाज पर काम करे, या शोषण सहे। सरकार को फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि अब यह अधिकार नहीं, योजना है। नाम बदलने में करोड़ों रुपये खर्च होंगे। पोस्टर बदलेंगे, बोर्ड बदलेंगे, प्रचार बदलेगा। लेकिन क्या मजदूर की जिंदगी बदलेगी? क्या बेरोजगारी कम होगी? क्या महंगाई घटेगी? या फिर यह सब उस कानून को कमजोर करने की कवायद है, जिसने गरीब को पहली बार कहा था काम मांगो, मिलेगा।
    यशपाल आर्य का आरोप है कि बजट का बंटवारा भी केंद्र तय करेगा। किस राज्य को कितना मिलेगा, यह तय होगा लेकिन विपक्ष शासित राज्यों को क्या मिलेगा, यह हम सब जानते हैं। वे कहते हैं देश में गरीबी खत्म करने की जगह गरीबों को ही खत्म करने की कोशिश हो रही है। धन का केंद्रीकरण हो रहा है। 10 प्रतिशत लोगों की आय के आंकड़ों से 90 प्रतिशत लोगों को विकसित भारत का सपना दिखाया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने इस बदलाव का पुरजोर विरोध करने का ऐलान किया है। सवाल सीधा है क्या नाम बदलने से भूख मिटेगी?
    क्या पोस्टर बदलने से रोजगार आएगा? और क्या ‘गारंटी’ हटाकर विकास हो जाएगा?
    यह खबर सिर्फ एक योजना की नहीं है। यह खबर उस मजदूर की है, जिसके पास सवाल पूछने की ताकत भी अब धीरे-धीरे छीनी जा रही है।

  • एससी के फैसले से पहले पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

    नैनीताल जिले के बनभूलपुरा में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 10 दिसंबर को सुनवाई होने जा रही है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और रेलवे विभाग ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।
    मंगलवार को बनभूलपुरा क्षेत्र में पुलिस और रेलवे पुलिस बल द्वारा फ्लैग मार्च निकाला गया। इस दौरान एडीएम विवेक राय, सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल चौहान और एसपी सिटी मनोज कत्याल मौजूद रहे। पुलिस प्रशासन ने इस दौरान लोगों से अपील की कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें और कानून व्यवस्था बनाए रखें।
    पूर्व की घटनाओं से सबक लेते हुए जिला पुलिस ने अराजकतत्वों और सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखी है। अतिक्रमण क्षेत्र में 4 ड्रोन कैमरे और अन्य सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा अन्य जिलों से भी फोर्स बुलाया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
    मामले का इतिहास देखें तो वर्ष 2022 में नैनीताल हाईकोर्ट में इस संबंध में एक पीआईएल दायर की गई थी। रेलवे विभाग ने दावा किया था कि बनभूलपुरा की लगभग 30 हेक्टेयर भूमि रेलवे की है। हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 में अतिक्रमणकारियों को हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद रेलवे विभाग ने प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया, लेकिन स्थानीय लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
    अब सुप्रीम कोर्ट 10 दिसंबर को अंतिम फैसला सुना सकता है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत की गई है और किसी भी तरह से कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही, अराजकतत्वों के खिलाफ कड़ाई से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह तैयार है।

  • मगरमच्छों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि सुरई रेंज में अकेले 138 चिह्नित,

    देहरादून/हल्द्वानी : उत्तराखंड के तराई क्षेत्र और शारदा नदी बेसिन के हल्के धुंधले सवेरे में, सुरई रेंज की नहरों और जलाशयों के किनारे खड़ी वन विभाग की टीम की आंखें हर पानी की सतह पर टिकी थीं। 2 दिसंबर से शुरू हुई इस गणना अभियान में, 35 सदस्यीय टीम ने दिन और रात दोनों समय में मगरमच्छों की निगरानी की। परिणाम उत्साहजनक थे, कुल 212 मगरमच्छों को चिह्नित किया गया, और अकेले सुरई रेंज में ही 138 मगरमच्छ पाए गए।
    2014 में इसी रेंज में मात्र 74 मगरमच्छ देखे गए थे। यह 11 वर्षों में लगभग 86.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है एक ऐसा संकेत जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वस्थ होने का प्रतीक है।
    यहां बता दें कि सर्वेक्षण का दायरा नौ रेंजों में फैला हुआ है जिसमें शारदा सागर जलाशय, बेगुल, धोरा, नानकमत्ता डैम, काकड़ा कोडाइल ट्रेल और शारदा की विभिन्न नहरें शामिल है। हर क्षेत्र में पानी के किनारे मगरमच्छों की उपस्थिति को ध्यान से नोट किया गया।
    वन विभाग ने उन स्थानों को भी जियो-टैग किया, जहाँ पिछले वर्षों में मगरमच्छों ने मानव पर हमला किया। ये डेटा अब स्थानीय पंचायतों और ग्रामवासियों के साथ साझा किया जाएगा ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके।
    डीएफओ हिमांशु बागरी ने कहा यह पहली बार है जब दिन और रात दोनों समय में मगरमच्छों की गणना की गई। जियो-टैगिंग से हमें समझ में आएगा कि किन क्षेत्रों में सावधानी सबसे अधिक जरूरी है। हमारा लक्ष्य मगरमच्छों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, मगरमच्छों की बढ़ती संख्या पर्यावरण की सेहत और जल-जीवों के संतुलन का स्पष्ट संकेत है। लेकिन उन्होंने स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और जल स्रोतों के किनारे हमेशा सावधानी बरतने की अपील भी की।
    सुरई की नहरों में पानी की लहरों के बीच जब सूरज की किरणें पड़ती हैं, तो हर छुपा मगरमच्छ किसी कहानी को बयां करता प्रतीत होता है और अब यह कहानी स्थानीय वन्यजीव संरक्षण की सफलता का एक नया अध्याय बन चुकी है।

    मगरमच्छ का विवरण

    सुरई: 138

    गौला: 21

    बाराकोली: 17

    डौली: 17

    किलपुरा: 5

    खटीमा: 5

    दक्षिणी जौलासाल: 1

    रनसाली: 2

    काशीपुर: 7

  • हर सैनिक जीवनपर्यंत सैनिक, आप राष्ट्र की शान

    केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल कैंप मुख्यालय हल्द्वानी में आयोजित पूर्व अर्धसैनिक बल सम्मेलन प्रदेश के पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के सम्मान का सशक्त मंच बना। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अर्धसैनिक बलों के जवान देश की वीरता, साहस और राष्ट्रभक्ति के चिरस्थायी प्रतीक हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल तक देश की सुरक्षा में उनका योगदान अद्वितीय है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक कभी भूतपूर्व नहीं होता बल्कि जीवनपर्यंत सैनिक ही रहता है। उन्होंने कहा आप सभी भूतपूर्व नहीं, अभूतपूर्व हैं। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि वे स्वयं सैनिक परिवार से आते हैं और सैनिक परिवारों की भावनाओं और चुनौतियों को भलीभांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का दायित्व है कि किसी भी शहीद परिवार को कठिनाई न झेलनी पड़े।
    मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने अर्धसैनिक बलों और शहीद परिवारों के सम्मान में अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया है। शौर्य चक्र, कीर्ति चक्र एवं अशोक चक्र से अलंकृत वीरों की पुरस्कार राशि एवं वार्षिक अनुदान में भी बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि शहीदों की स्मृति को संरक्षित करने के लिए राज्य में स्मारक एवं शहीद द्वारों के निर्माण को गति दी गई है। इस वर्ष 10 नए स्मारकों को स्वीकृति प्रदान की गई है, साथ ही शहीद परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था भी लागू है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना के आधुनिकीकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर है और कई देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने स्वदेशी हथियारों की क्षमता को वैश्विक स्तर पर सिद्ध किया है।
    प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अवैध बसावट और लैंड जिहाद के खिलाफ अभियान तेज़ी से चल रहा है। 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के साथ 550 से अधिक अवैध संरचनाएं ध्वस्त की गई हैं। समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-रोधी कानून और भू-कानून लागू कर राज्य में सामाजिक समरसता और सुरक्षा को मजबूत किया गया है।
    उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वीरभूमि भी है और इसकी संस्कृति तथा परंपराओं की रक्षा हम सभी का उत्तरदायित्व है। राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में काम कर रही है।
    कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी पूर्व सैनिकों के कल्याण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
    इस अवसर पर मेयर गजराज सिंह बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, विधायक राम सिंह कैड़ा, दायित्वधारी डॉ. अनिल डब्बू, शंकर कोरंगा, रेनू अधिकारी, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीआरपीएफ डीआईजी शंकर दत्त पांडे, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित अनेक गणमान्य अधिकारी, पूर्व सैनिक और नागरिक मौजूद रहे।

    मुख्यमंत्री धामी ने की अर्धसैनिक बलों के लिए घोषणाएं

    प्रेजिडेंट पुलिस मेडल-गैलेंट्री प्राप्त अर्धसैनिक को 5 लाख रुपये की अनुदान राशि।

    जिन पूर्व अर्धसैनिकों एवं वीर नारियों के पास अपनी अचल संपत्ति नहीं है, उन्हें सम्पत्ति क्रय पर 25 प्रतिशत तक स्टाम्प शुल्क में छूट।

    उत्तराखंड राज्य अर्धसैनिक बल कल्याण परिषद को सक्रिय करते हुए पुलिस मुख्यालय में कार्यालय आवंटित किया जाएगा।

    सैनिक कल्याण निदेशालय में उपनिदेशक (अर्धसैनिक) और बड़े जिलों में सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी (अर्धसैनिक) के पद स्वीकृत किए जाएंगे।

    अर्धसैनिक बलों के बच्चों के विवाह हेतु सैनिकों के समान आर्थिक सहायता दी जाएगी।

    सीजीएचएस भवन के निर्माण हेतु तत्काल भूमि चयन के निर्देश।

  • नैनीताल-हल्द्वानी में एनआईए का छापा

    देहरादून/ हल्द्वानी: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट के मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम ने शनिवार को हल्द्वानी और नैनीताल में छापेमारी और पूछताछ की। हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में की गई छापेमारी में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था। इनके इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर एनआईए की टीम नैनीताल के तल्लीताल हरीनगर वार्ड में पहुंची और मस्जिद के इमाम से करीब तीन घंटे तक विस्तृत पूछताछ की।
    जानकारी के अनुसार, नैनीताल और हल्द्वानी से मिले सुराग दिल्ली धमाके के संदर्भ में अहम माने जा रहे हैं। हालांकि, एनआईए और स्थानीय पुलिस ने हिरासत में लिए गए संदिग्धों और उनसे प्राप्त जानकारी के संबंध में कोई खुलासा नहीं किया है।
    स्थानीय पुलिस ने नैनीताल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शहर के मुख्य मार्गों, एंट्री पॉइंट्स और संवेदनशील इलाकों में चेकिंग अभियान तेज कर दिया गया है। पुलिस अधिकारी बता रहे हैं कि पहचान सत्यापन, वाहनों की तलाशी और संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। नागरिकों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को देने की अपील की गई है।
    देहरादून में एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर पूरे जनपद में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस की टीमों ने सीमावर्ती चेक पोस्टों और आंतरिक मार्गों पर आने-जाने वाले 1400 से अधिक वाहनों और 2700 से अधिक व्यक्तियों की तलाशी ली। बाहरी राज्यों से आने वाले व्यक्तियों से पूछताछ कर आवश्यक सत्यापन किया गया।
    एनआईए की टीम ने दिल्ली ब्लास्ट में संदिग्ध आतंकी उमर की कॉल डिटेल्स भी खंगाली हैं। इस कॉल डिटेल से मिले सुराग के आधार पर हल्द्वानी के दो लोगों को हिरासत में लिया गया। नैनीताल में पूछताछ किए गए एक अन्य संदिग्ध से जानकारी जुटाई जा रही है।

    दिल्ली ब्लास्ट की जांच में उत्तराखंड की भूमिका अहम

    10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार ब्लास्ट में आठ लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक घायल हुए। इसमें उत्तराखंड का एक युवक भी घायल हुआ था। एनआईए इस मामले की गहन जांच कर रही है और अभी तक कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। हल्द्वानी और नैनीताल से प्राप्त इनपुट को जोड़कर पूरे मामले की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।

    3 मस्जिद इमाम और एक इलेक्ट्रीशियन हिरासत में

    हल्द्वानी: सूत्रों की जानकारी के अनुसार दिल्ली ब्लास्ट मामले में जांच के दायरे नैनीताल जिले तक फैल रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), दिल्ली पुलिस, एसटीएफ और जिले की पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र में स्थित बिलाल मस्जिद के इमाम मौलाना मो. आसिम कासमी और इलेक्ट्रीशियन नजर कमाल को हिरासत में लिया है।
    इसी क्रम में नैनीताल के तल्लीताल पुलिस ने बूचड़खाना स्थित मस्जिद के मौलाना मोहम्मद नईम को भी हिरासत में लिया है। अधिकारी इस कार्रवाई को मामले की गंभीरता और जांच के व्यापकता के हिस्से के रूप में बता रहे हैं।
    अधिकारियों का कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है और दिल्ली ब्लास्ट की जांच में उनके किसी भी संभावित कनेक्शन को तल्लीनता से खंगाला जा रहा है।