राजकीय महाविद्यालय मोरी में भवन की भारी कमी
छात्र-छात्राएं मंदिर व टिन शेड में ले रहे कक्षाएं, निर्माण कार्य पर भारी बारिश का असर

राजकीय महाविद्यालय मोरी में शैक्षणिक ढांचे की भारी कमी के चलते छात्र-छात्राओं को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थायी भवन न होने के कारण कक्षाएं कभी टिन शेड तो कभी मंदिर परिसर में संचालित की जा रही हैं। यहां तक कि कई बार कॉलेज प्राचार्य को अपने कार्यालय में भी छात्रों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है।
कॉलेज में पुस्तकालय, रेडक्रॉस कक्ष और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। छात्र-छात्राएं मजबूरी में मंदिर परिसर के शौचालयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि महाविद्यालय में अध्ययनरत लगभग 75 प्रतिशत छात्राएं हैं, जिनकी सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण से यह स्थिति अत्यंत गंभीर है।
वर्तमान शैक्षणिक सत्र में अब तक 63 नए छात्रों ने प्रवेश लिया है, जबकि गत वर्ष यह संख्या 72 थी। महाविद्यालय में बी.ए. और एम.ए. की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, वहीं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की भी कक्षाएं प्रस्तावित हैं, जिसमें अब तक 4 छात्र नामांकित हो चुके हैं।कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.के. वर्मा ने बताया कि स्थायी भवन न होने के कारण यूजीसी से मिलने वाली ग्रांट भी रुकी हुई है। मैं खुद कई बार अपने कार्यालय में छात्रों को पढ़ाता हूं, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो, उन्होंने कहा कॉलेज भवन का निर्माण कार्य चौहान कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी के स्वामी जय राम चौहान ने बताया कि क्षेत्र में हो रही लगातार भारी बारिश और अप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के कारण निर्माण कार्य रोकना पड़ा है। साथ ही टोंस नदी किनारे प्रोटेक्शन वॉल का निर्माण भी जरूरी है, जिससे निर्माण स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है,स्थानीय जनप्रतिनिधि विष्णु चौहान, विपिन चौहान, डॉ. राजेंद्र राणा, राजेंद्र सिंह रावत और हरीश चौहान सहित अन्य लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए निर्माण संस्था और ठेकेदार जिम्मेदार होंगे।
अवस्थापना निर्माण खंड उत्तरकाशी की अधिशासी अभियंता मंजू भास्कर ने कहा कि भवन निर्माण कार्य प्रगति पर है और बारिश के कारण अस्थायी रूप से रोका गया था। उन्होंने आश्वस्त किया कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और साइट पर अवर अभियंता की निगरानी निरंतर जारी है। अब तक हुए कार्य का समय पर भुगतान किया जा रहा है।छात्रों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा यह मसला प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की गंभीरता की परीक्षा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।



