अपराधरुद्रपुर

छात्रसंघ चुनाव बना ‘गैंग वॉर’

रुद्रपुर कॉलेज बना रणक्षेत्र, चलीं गोलियां

जिस रुद्रपुर के एसबीएस राजकीय पीजी कॉलेज को शिक्षा का मंदिर कहा जाना था, वहां छात्रसंघ चुनाव के नामांकन में न तो लोकतंत्र था, न ही अनुशासन सिर्फ असलहे थे, गोलियों की आवाज थी और अराजकता का खुला तांडव।
24 सितंबर को अध्यक्ष पद के दो प्रत्याशियों के समर्थकों में ऐसी भिड़ंत हुई कि कॉलेज का गेट रणभूमि बन गया। मारपीट हुई, और भीड़ में दो हथियारबंद युवकों ने हवाई फायरिंग कर दी। गनीमत रही कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन जो घायल हुआ, वो लोकतंत्र और शिक्षा का विश्वास था।
इस झगड़े ने रुद्रपुर-रामपुर हाईवे को जाम कर दिया। स्कूली बसें, ऐम्बुलेंस तक फंसी रहीं। मौके पर पुलिस देर से पहुंची, और जब पहुंची, तब तक छात्र तितर-बितर हो चुके थे और गोलियों की गूंज पूरे शहर में फैल चुकी थी।
एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने खुद इस लापरवाही को गंभीरता से लिया और रम्पुरा चौकी इंचार्ज प्रदीप कोहली, एएसआई अमित कुमार, और कॉन्स्टेबल गणेश धानिक को निलंबित कर दिया। एक बार फिर वही सवाल पुलिस पहले कहां थी?
ये वही चुनाव हैं जिनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे। लेकिन जब कॉलेज के बाहर माफिया-क्लचर की तस्वीरें सामने आती हैं, तब लगता है कि न कॉलेज बचे, न दिशा-निर्देश। कहाँ है विश्वविद्यालय प्रशासन? क्यों नहीं थी कॉलेज के अंदरूनी परिसर में सुरक्षा? पुलिस ने 15 नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

तीन आरोपी हुए गिरफ्तार

रखवीर सिंह (27 वर्ष) – बरेली से, दानिश (29 वर्ष) – आदर्श कॉलोनी, रुद्रपुर (जिसके पास से अवैध तमंचा बरामद), गुरपेज सिंह (40 वर्ष) – विजय नगर, दिनेशपुर

 

13 लोग को नामजद, चल रहे फरार

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बाकी जिन 13 से अधिक लोगों को नामजद किया गया है और जो फरार है उनमें जस्सी कचूरा, मनप्रीत उर्फ गोपी, अभय सक्सेना, चेतन मागढ़, सत्यम, गगन रतनपुरिया, विक्रम जानी भाटिया, प्रिंस शर्मा, हेमंत मिश्रा, चंदन यादव, रवि रावत, आकाश यादव, आशीष यादव और अन्य अज्ञात। पुलिस का दावा है कि ब्लॉक रोड और किच्छा रोड से दबिश देकर गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन असली सवाल तो यही है कि ये अपराधी पहले कॉलेज गेट तक कैसे पहुंचे?
कभी छात्रसंघ चुनाव नेतृत्व की नर्सरी माने जाते थे, आज ये गुंडई की गैलरी बनते जा रहे हैं। क्या कोई छात्र अपने कॉलेज के बाहर फायरिंग करता है? क्या कोई छात्र हथियार लेकर नामांकन करने जाता है? या फिर अब ‘छात्र’ शब्द केवल एक पहचान पत्र भर रह गया है जिसके पीछे राजनीति, बाहुबल, और अपराध का गठजोड़ पनप रहा है?

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