बीजेपी विधायक और के कई मंडल अध्यक्ष अपने ही प्रत्याशियों को हारने में नहीं छोड़ रहे कसर,
कब होगी पार्टी के ऐसे कार्यकर्ताओं पर कार्यवाही

देहरादून,
अंजू बिष्ट खुले आम वार्ड 38 में निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थन में घुमती हुई ,अभी तक कोई भी संगठनात्मक कार्यवाई नहीं ? क्या मंडल अध्यक्ष संगठन से बड़ा पद होता है या फिर जानबुझ कर आंखें मूंद ली गई है????
गरिमा मेहरा दसोनी
प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर माहौल गर्म है ,निकाय चुनाव में दोनों ही पार्टी के प्रत्याशी और कार्यकर्ता जीत के लिए ऐडी चोटी का जोर लगा रहे है वही सत्ता दल पार्टी के सभी बड़े नेता भी अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाने में कई कई रेलियां और जन सभाएं कर रहे है वही प्रदेश के मुखिया सीएम धामी भी इस निकाय चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है,पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ रहे पार्टी प्रत्याशियों के लिए जनसभाएं कर रहे है,वही पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा और नामांकन के बाद से ही पार्टी में भगदड़ मच गई थी जिसको संगठन के नेताओं द्वारा इस भगदड़ को संभाला और जिसमें पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ाने के लिए मैदान में उतरे है ,कई को संगठन द्वारा मनाया गया और जो नहीं माने उनको पार्टी के विरुद्ध जाने पर और पार्टी से विद्रोह करने पर 6 वर्ष के लिए निष्काशित कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष लगातार सत्ता पक्ष में आपसी फुट को लेकर लगातार हमलावर हो रहा है , बीजेपी द्वारा कई वार्डो में अपने जिताऊ कार्यकर्ताओं को दुबारा टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है,जिससे भाजपा के विधायक और पार्टी में अपनी हनक रखने वाले नेताओं ने भी कई जगहों पर अपने चहीतो को निर्दलीय चुनाव उतारा है और कई मंडल अध्यक्ष भी पार्टी में रह कर पार्टी के लिए काम न करके अपने परिचितों और निर्दलीय जो पूर्व में पार्टी में थे और अब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है उनके लिए पार्टी में रह कर ही दूसरे प्रत्याशियों के लिए जीतोड़ काम ओर मेहनत कर रहे है,जो कि पार्टी प्रत्याशियो के लिए जीत हासिल करने में रोड़ा साबित हो सकता है, वही विपक्ष द्वारा भाजपा की प्रेमनगर कवाली मंडल अध्यक्षा अंजू बिष्ट को लेकर भाजपा के अंदरूनी मतभेद और फुट बता कर चुटकी लेरहा है, विपक्ष द्वारा सोशल मीडिया पर वार्ड 38 पंडितवाड़ी से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे अतुल बिष्ट के लिए मंडल अध्यक्षा अंजू बिष्ट और उनके परिवार के लोगों द्वारा जनता से वोट अपील कर रहे और वहीं उन्होंने कहा है मण्डल अध्यक्षा लगातार पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाई हुई है,विपक्ष के कटाक्ष से संगठन के नेताओं के पार्टी में रह कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और जानकारी होते हुए भी कोई कार्यवाही न करने पर सवाल खड़े कर रहा है या तो संगठन के वरिष्ठ नेता इसे जानबुझ कर नजरअंदाज कर रहे है या पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के दबाव के चलते ऐसे कार्यकर्ताओं जो पार्टी में रह कर पार्टी विरोधी गतिविधियों पर कोई कार्यवाही करने से बच रहे है।
वहीं पार्टी के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने वाले कई कार्यकर्ताओ और नेताओं द्वारा इसकी जानकारी प्रमाण सहित संगठन के नेताओं को दी है लेकिन अभी तक कोई कारवाही नही की गई है और अब देखने वाली बात रहेगी कि संगठन नियमों को लेकर कितना गंभीर है और ऐसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ कब कार्यवाही करेगा ,वही पार्टी के कई कार्यकर्ता इसके खिलाफ एक जुट हो कर चुनाव के बाद मोर्चा भी खोलने की तैयारी में है।



