देहरादून

भोजनमाताओं ने रैली निकालकर किया मुख्यमंत्री आवास कूच

भोजनमाताओं को राजकीय कर्मचारी का दर्जा दिये जाने, भोजनमाताओं को न्यूनतम वेतन लागू किये जाने सहित अनेक मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी के बीच बारिश में जमकर प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच किया।

यहां गांधी रोड स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन उत्तराखंड की अध्यक्ष शारदा के नेतृत्व में सभी भोजनमातायें एकत्रित हुई और अपनी मांगों के समाधान के लिए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी के बीच बारिश में जमकर प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच किया और हाथीबड़कला के पास पुलिस ने बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया और इस बीच पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर नोंकझोंक व धक्का मुक्की हुई और बाद में सभी वहीं पर धरने में बैठ गई।

इस अवसर पर संगठन की अध्यक्ष शारदा ने कहा कि लगातार मांगों के समाधान के लिए संघर्षरत है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है लेकिन केवल कोरे आश्वासन ही मिले है जिससे भोजनमाताओं में रोष है। उन्होंने कहा कि भोजनमाताओं को विद्यालयों से निकालना बंद किया जाये। उन्होंने कहा कि इसके लिए व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया जायेगा।

उन्होंने कहा कि मिड डे मील वर्कर्स जिन्हें उत्तराखंड सरकार भोजन माता कहती हैं उन्हें न्यूनतम वेतनमान से काफी कम मानदेय मात्र तीन हजार रुपए देती है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा उत्तराखंड सरकार भोजन माताओं के इस काम को भी छीनकर बेरोजगार बनाने की साजिश रच रही है। एक ओर विधायकों की पेंशन, भत्ते और तनख्वाह में बढ़ोत्तरी हो रही है तो दूसरी तरफ भोजनमाताओं को मात्र तीन हजार रुपए देने के बावजूद अब अक्षयपात्र फाउंडेशन जैसी संस्थाओं से स्कूलों में बच्चों के भोजन उपलब्ध करवाकर, रोजगार छीनने की योजना पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि हमारे काम को छीनने के लिए तमाम तौर तरीके अपनाए जा रहे हैं। कभी स्कूल में कम बच्चे होने, तो कभी भोजनमाता के बच्चे स्कूल में न होने के नाम पर भोजनमाताओं को स्कूल से निकाल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली बार भाजपा सरकार ने और शिक्षा मंत्री ने पांच हजार रुपए मानदेय देने की घोषणा की थी मगर वास्तव में सरकार इसके बिल्कुल उलट काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अधिकांश भोजन माताएं पिछले बीस-इक्कीस सालों से स्कूलों में सेवा दे रही है।

  uttarakhand-van-vikas-nigam-auction  

उनका कहना है कि इसके बावजूद भी कभी भी स्कूल से निकाले जाने का देश हम भोजनमाता झेल रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय ने कुछ साल पहले इस संबंध में भोजनमाताओं से इतने बेहद कम मानदेय पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह बंधुआ मजदूरी है जो संविधान का उल्लंघन है। इस अवसर पर अनेकों भोजनमातायें शामिल रहे।

Show More

Related Articles