उत्तराखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं पर संकट: सीबीआई की एंट्री

उत्तराखंड में युवाओं की मेहनत, मां-बाप की उम्मीदें और रोजगार के ख्वाब सबकुछ एक बार फिर परीक्षा केंद्र के बाहर फोटो खिंचवाते हुए प्रश्नपत्र की एक तस्वीर में ढह गया। इस बार केंद्र बना यूकेएसएसएससी, यानी उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग। तारीख थी 21 सितंबर, और परीक्षा थी स्नातक स्तरीय 416 पदों की भर्ती।
लेकिन परीक्षा शुरू होते ही कुछ ही मिनटों में प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। और फिर वही पुरानी स्क्रिप्ट पेपर लीक, गिरफ्तारी, निलंबन, जांच, विरोध, और परीक्षाएं रद्द।
पेपर लीक अब उत्तराखंड के नौजवानों के लिए कोई नई बात नहीं रही। मगर इस बार युवाओं का गुस्सा सरकार के दरवाज़े तक पहुंचा। पुलिस, आयोग और शिक्षा विभाग की मिलीभगत के सवाल फिर से उठे। सीएम धामी को खुद परेड ग्राउंड में युवाओं के बीच जाना पड़ा, यह बताने के लिए कि अब की बार कड़ी कार्रवाई होगी।
क्या कार्रवाई हुई? वही जो हर बार होती है परीक्षा केंद्र पर तैनात सेंटर मजिस्ट्रेट, पुलिसकर्मी, और प्रोफेसर सस्पेंड, कुछ गिरफ्तारियाँ और सबूतों की झड़ी के बीच सीबीआई जांच की घोषणा।
अब बात करें भविष्य की। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने जून 2026 तक का परीक्षा कैलेंडर जारी किया था लेकिन अब वही कैलेंडर अनिश्चितताओं से भर गया है।
अब सवाल उठता है कि जब सीबीआई जांच चल रही है, सिस्टम पर भरोसा डगमगाया है, और पारदर्शिता संदेह के घेरे में है, तो क्या ये कैलेंडर केवल दिखावा है?
लेकिन एक तरफ सीबीआई जांच, दूसरी तरफ नकल माफिया की सक्रियता ये बताता है कि ये तारीखें कैलेंडर पर भले टिक जाएं, ज़मीन पर होना आसान नहीं।
आयोग अब क्यूआर कोड वाले प्रश्नपत्र, एआई निगरानी और सुरक्षा की कई लेयर लगाने की बात कर रहा है। लेकिन प्रश्न ये है क्या तकनीक से नीयत सुधरती है?
या फिर ये सिर्फ एक नई मार्केटिंग स्कीम है जिससे युवाओं को दोबारा उम्मीद बंधे?
आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया कहते हैं हमारी कोशिश है कि बेरोजगार युवाओं को तय किए गए समय पर ही परीक्षा का मौका दिया जाए। यह कोशिश पिछले कई सालों से जारी है। पर युवाओं की उम्र नहीं रुकती, सपने नहीं थमते। पेपर लीक उनके लिए महज एक न्यूज हेडलाइन नहीं वो असल ज़िंदगी की विफलता है, जिसे वे बार-बार झेलते हैं।
उत्तराखंड में जब नकल विरोधी कानून लाया गया था, तो सरकार ने दावा किया कि इससे 13 परीक्षाएं बिना विवाद के कराई गईं। लेकिन अब वही कानून भी संघर्ष करता दिख रहा है। क्या ये कानून सिर्फ जुमला था? या फिर अब वक्त है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से इसे प्रभावी बनाया जाए?
स्थगित हुई परीक्षाएं
5 अक्टूबर 2025: सहकारी निरीक्षक वर्ग-2 और सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता)।
12 अक्टूबर 2025: कृषि विभाग के तकनीकी पद (580 अभ्यर्थी, 25 पद)।
21 सितंबर 2025: स्नातक स्तरीय परीक्षा पहले ही रद्द।
क्या होंगी ये परीक्षाएं?
28 अक्टूबर 2025: 124 पद, वन दरोगा।
15 दिसंबर 2025: 20 पद, उपभोक्ता विवाद प्रतिरोध आयोग।
18 जनवरी 2026: 128 पद, सहायक अध्यापक।
22 फरवरी 2026: 62 पद, तकनीकी सहायक।
15 मार्च 2026: 212 पद, कृषि सहायक।
29 मार्च 2026: 36 पद, सहायक लेखाकार।
10 मई 2026: 386 पद, कनिष्ठ सहायक।
31 मई 2026: 41 पद, आईटीआई डिप्लोमा।
21 जून 2026: 48 पद, स्नातक स्तरीय।



