तबादलों की राजनीति: दीपावली से पहले धामी सरकार ने अफसरों की कुर्सियों को फिर से सजाया

दीपावली से पहले उत्तराखंड में रोशनी की जगह अफसरों के तबादलों ने जगमग कर दिया है। एक बार फिर सरकार ने साफ कर दिया है कि कुर्सियाँ स्थायी नहीं होतीं, नीतियाँ भी नहीं सिर्फ तबादले स्थायी होते हैं।
उत्तराखंड की धामी सरकार ने एक लंबी तबादला सूची जारी की, जिसमें 23 आईएएस, 11 पीसीएस , 3 सचिवालय सेवा, और 1आईएफएस अधिकारी की जिम्मेदारियाँ बदली गई हैं। यानी कुल 38 अफसरों को ‘दीपावली गिफ्ट’ मिला है कुछ को नई जिलाधिकारी की कुर्सी तो कुछ को पुरानी जिम्मेदारी से छुट्टी।
उत्तराखंड में नैनीताल, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा जैसे पाँच जिलों के जिलाधिकारियों को बदला गया है। जैसे हर बार होता है जनता वही रहेगी, फाइलें वही रहेंगी, पर हस्ताक्षर करने वाले बदल दिए जाएंगे। आईएएस ललित मोहन रयाल अब नैनीताल के डीएम होंगे, जबकि वंदना सिंह को वहाँ से हटाकर महानिदेशक कृषि एवं उद्यान बनाया गया है। गौरव कुमार अब चमोली के डीएम होंगे, वहीं संदीप तिवारी को निदेशक समाज कल्याण की जिम्मेदारी मिली है। आशीष कुमार भटगाई को पिथौरागढ़ भेजा गया है और विनोद गिरि गोस्वामी को वहाँ से शहरी विकास विभाग में शिफ्ट किया गया है। आकांक्षा कोंडे को बागेश्वर, और अंशुल को अल्मोड़ा का जिलाधिकारी बनाया गया है।
सरकार की तबादला नीति अब एक स्थायी रणनीति बन चुकी है। ये समझना ज़रूरी है कि यहाँ तबादले किसी विशेष ‘विफलता’ या ‘सफलता’ पर नहीं, बल्कि सत्ता की रणनीति और संतुलन पर आधारित होते हैं। दिलीप जावलकर से ग्राम विकास और ग्रामीण निर्माण विभाग लिया गया। बीवीआरसी पुरुषोत्तम से मत्स्य निदेशक का पद हटा लिया गया। चंद्रेश यादव से सचिव पंचायती राज और आयुक्त खाद्य की जिम्मेदारी छीनी गई। रणवीर सिंह चौहान को आयुक्त खाद्य बनाया गया है। धीराज गर्ब्याल को सचिव ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी मिली है। सरकारी भाषा में इसे प्रशासनिक समायोजन कहा जाता है। असल में यह वो खेल है जिसमें विभागों को ट्रांसफर कर अफसरों की ताकत की सीमा तय की जाती है। इस बार आईएफएस पराग मधुकर को विशेष सचिव पंचायती राज बनाया गया है। यानी जंगल से सीधा पंचायत तक का सफर।
वहीं पीसीएस अधिकारियों की लिस्ट में गिरधारी सिंह रावत को अपर सचिव कार्मिक एवं सतर्कता, चंद्र सिंह धर्मशक्तु को मत्स्य विभाग का निदेशक, ललित नारायण मिश्र को सीडीओ हरिद्वार, सुंदरलाल सेमवाल को निदेशक उद्यान विभाग और जय भारत सिंह को सीडीओ उत्तरकाशी की जिम्मेदारी मिली है।
तबादलों से असली फायदा किसे हुआ, ये समझने के लिए हमें ये देखना होगा कि किसे कौन सी कुर्सी दी गई, और उससे पहले वो किसके पास थी। तबादले, सिर्फ प्रशासनिक नहीं होते राजनीतिक संकेत भी होते हैं। क्या सरकार प्रशासनिक दक्षता को प्राथमिकता दे रही है या फिर संतुलन साधने की कोशिश है? क्या किसी अफसर को इनाम दिया गया या किसी को सजा? जवाब साफ नहीं होते, लेकिन संकेत मिलते हैं।
उत्तराखंड में अफसरों के बदलने से सड़कों के गड्ढे नहीं भरेंगे, स्कूलों में शिक्षक नहीं आएंगे, और न ही अस्पतालों की हालत सुधरेगी। मगर हर तबादले की खबर अखबार के पहले पन्ने पर ज़रूर छपती है।
इस तबादले से जनता को यही सीख मिलती है शासन चलता रहेगा, अफसर आते-जाते रहेंगे। बाकी आप वही हैं, आपके सवाल वही हैं, आपके मुद्दे वही हैं। बस एक फर्क है अब आप उनसे नए नाम से शिकायत कर सकते हैं।



