टर्म्स ऑफ रेफरेंस सार्वजनिक क्यों नहीं?: गोदियाल
अंकिता भंडारी केस में सीबीआई जांच, कांग्रेस ने उठाए सवाल

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस में सीबीआई जांच की सिफारिश हो चुकी है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा जांच के लिए भेजे गए टर्म्स ऑफ रेफरेंस को सार्वजनिक न करने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि पूरे प्रदेश की मातृशक्ति, सामाजिक संगठन और विपक्षी दल लगातार तटस्थ जांच की मांग कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शुरू से ही जांच को दबाने और भटकाने का प्रयास किया और यह प्रयास आज भी जारी है।
गोदियाल ने कहा, बीते रोज मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सीबीआई जांच की संस्तुति की घोषणा की है, लेकिन अब भी जांच को भटकाने का प्रयास हो रहा है। जब संस्तुति हो गई है, तो राज्य सरकार ने जो टर्म्स ऑफ रेफरेंस भारत सरकार को भेजा है, उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जांच के दायरे को सीमित कर रही है और संभवतः इसमें किसी वीआईपी की संलिप्तता को छुपाने की कोशिश की जा रही है। गोदियाल ने सरकार से मांग की कि वह आज ही टर्म्स ऑफ रेफरेंस को जारी करे, ताकि जनता जान सके कि सीबीआई जांच के दायरे में क्या-क्या शामिल है।
गोदियाल ने यह भी कहा कि सीबीआई को यह पता लगाना चाहिए कि अंकिता के रिजॉर्ट में नौकरी करने से लेकर हत्या होने तक किन-किन लोगों ने उसके साथ फोन और चैट पर संपर्क किया। उन्होंने सीबीआई जांच में सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करने की मांग की।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि 11 जनवरी को तमाम सामाजिक संगठन, विपक्षी पार्टियां और जनता मिलकर तटस्थ और पारदर्शी जांच की पुरजोर मांग करेंगे। कांग्रेस वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भी टर्म्स ऑफ रेफरेंस को सार्वजनिक करने की मांग की और कहा कि सीबीआई जांच की सिफारिश अधूरी न्याय है।



