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राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से सरेंडर करने के आदेश के बाद आसाराम ने सेंट्रल जेल में किया सरेंडर,

हाईकोर्ट ने नहीं बढ़ाई थी अंतरिम जमानत

जोधपुर :आसाराम पर साल 2013 में नाबालिग ने यौन दुराचार का आरोप लगा था, जिस पर कार्यवाही करते हुए जोधपुर पुलिस ने आसाराम को छिंदवाडा आश्रम से गिरफ्तार कर के जोधपुर ले कर आई और यहाँ से आसाराम को सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।आसाराम को 25 अप्रैल 2018 में जोधपुर की अदालत द्वारा यौन दुराचार के आरोप सिद्ध होने पर में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी । इसके बाद आसाराम की ओर से सजा स्थगन याचिका पेश की, लेकिन राहत नहीं मिली तो आसाराम ने साल 2025 में उपचार के लिए अंतरिम जमानत का सहारा लिया। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात केस में आसाराम को 7 जनवरी 2025 को उपचार के लिए अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने भी आसाराम को अंतरिम जमानत दी, जिसे समय समय पर आगे बढ़ाया गया। 27 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को अंतरिम जमानत को बढ़ाने से इनकार करते हुए सरेंडर करने का आदेश दिया।

आसाराम ने शनिवार को जोधपुर की सेंट्रल जेल में एक बार फिर से अपने आपको सरेंडर कर दिया है। जेल में सरेंडर करने पहुंचे आसाराम ने व्हील चेयर में बैठ कर जेल में सरेंडर करने पहुंचे । सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद राजस्थान हाईकोर्ट से 14 जनवरी 2025 को उपचार के लिए आसाराम को अंतरिम जमानत दी गई थी, तब से लेकर आसाराम लगातार अंतरिम जमानत पर सेंट्रल जेल से बाहर था । 27 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत का आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए 30 अगस्त 11 बजे तक सरेंडर करने के आदेश दिए थे।
सिविल अस्पताल अहमदाबाद की रिपोर्ट में आसाराम की तबीयत को स्थिर बताते हुए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता से इनकार कर दिया था, आसाराम की रिपोर्ट को देखते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया और सरेंडर करने का आदेश दिया था। शनिवार को आसाराम अपने अधिवक्ताओं एवं समर्थकों के साथ पाल आश्रम से सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचा।
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में मेडिकल बोर्ड की ओर से दी गई रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि आसाराम ने पिछले कई महीनों में इलाज के लिए कई यात्राएं भी की हैं। उसने कई शहरों में अलग-अलग अस्पताल में इलाज भी कराया है, लेकिन किसी भी अस्पताल में नियमित फॉलोअप नहीं कराया है।
राजस्थान हाईकोर्ट में 27 अगस्त की सुनवाई में आसाराम के अधिवक्ता निशांत बोड़ा ने कहा था कि- 21 अगस्त को आसाराम को एम्स जोधपुर ले जाया गया था। वहां के डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट दी है, लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया ।
राजस्थान हाईकोर्ट व गुजरात हाईकोर्ट दोनों ही स्थनों पर आसाराम को यौन उत्पीड़न के आरोप में आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है । ऐसे में राजस्थान हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत को आगे नहीं बढ़ाया, लेकिन अभी गुजरात हाईकोर्ट से 3 सितम्बर तक अंतरिम जमानत मिली हुई है। ऐसे में 30 अगस्त को आसाराम ने सरेंडर कर दिया है।

 

 

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