भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी ने अर्धकुंभ की तैयारियों पर उठाए सवाल
निर्माण टेंडर से लेकर धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप पर जताई आपत्ति

देहरादून प्रेस क्लब में बोले त्रिपाठी—धार्मिक आयोजनों की परंपराओं और रीति-रिवाजों में सरकार को नहीं करना चाहिए हस्तक्षेप,
अहमदाबाद की कंपनी को काम देने पर भी उठाए सवाल
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा के नेता एवं पूर्व दर्जाधारी राज्य मंत्री अशोक त्रिपाठी ने हरिद्वार में वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले की तैयारियों और आयोजन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रविवार को देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने अर्धकुंभ के लिए किए जा रहे निर्माण कार्यों के टेंडर, मेले के स्वरूप तथा धार्मिक परंपराओं में सरकारी हस्तक्षेप को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।
अशोक त्रिपाठी ने कहा कि हरिद्वार में अर्धकुंभ को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं और निर्माण कार्यों के लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अर्धकुंभ से संबंधित एक निर्माण कार्य का ठेका अहमदाबाद की किसी कंपनी को दिया गया है। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई निर्माण कंपनी या निर्माणदायी संस्था नहीं थी, जो इस कार्य को कर सकती थी।
उन्होंने कहा कि राज्य में मौजूद स्थानीय निर्माण एजेंसियों और संस्थाओं को काम दिए जाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, ऐसे बड़े धार्मिक आयोजन से जुड़े कार्यों में स्थानीय संस्थाओं और स्थानीय संसाधनों को प्राथमिकता मिलने से प्रदेश के लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
प्रेस वार्ता में त्रिपाठी ने अर्धकुंभ के आयोजन के स्वरूप को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि अर्धकुंभ को कुंभ के रूप में आयोजित किए जाने की दिशा में क्यों आगे बढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुंभ और अर्धकुंभ केवल सरकारी आयोजन नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं, मान्यताएं और रीति-रिवाज जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का कार्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना है, लेकिन धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप करना सरकार का अधिकार क्षेत्र नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि अर्धकुंभ की धार्मिक प्रक्रिया और परंपराओं से जुड़े निर्णय धार्मिक संस्थाओं एवं संबंधित संत समाज पर छोड़े जाने चाहिए।
अशोक त्रिपाठी ने कहा कि हरिद्वार में होने वाला धार्मिक आयोजन देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। ऐसे में सरकार को आयोजन के दौरान मूल धार्मिक परंपराओं और प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पेयजल, बिजली और अन्य नागरिक सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए, जबकि धार्मिक स्वरूप एवं परंपराओं से जुड़े मामलों में धार्मिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
भाजपा नेता ने प्रेस वार्ता के दौरान अपने ऊपर दबाव बनाए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अर्धकुंभ की तैयारियों और उससे जुड़े विषयों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करानी शुरू कीं तो हरिद्वार विकास प्राधिकरण के अधिकारी उनके घर के नक्शे को लेकर सवाल उठाने लगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की ओर से उनके घर के नक्शे के वैध अथवा अवैध होने को लेकर पूछताछ की जाती रही। त्रिपाठी ने इसे उनके द्वारा उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर पेश किया। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित विभाग या अधिकारियों की ओर से कोई पक्ष सामने नहीं आया है।
प्रेस वार्ता के दौरान अशोक त्रिपाठी ने अपने जीवन के संकट में होने की बात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अर्धकुंभ से जुड़े विषयों पर सवाल उठाने के बाद जिस तरह की परिस्थितियां सामने आई हैं, उन्हें लेकर वह चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि हरिद्वार के धार्मिक स्वरूप और सदियों पुरानी परंपराओं की रक्षा करना है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अर्धकुंभ की तैयारियों में पारदर्शिता बरती जाए और निर्माण कार्यों के टेंडर से लेकर धार्मिक आयोजन की प्रक्रिया तक सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाए।
त्रिपाठी ने कहा कि हरिद्वार केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में अर्धकुंभ की तैयारियों में सरकार, प्रशासन, धार्मिक संस्थाओं और संत समाज के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सरकार से अपनी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।


