उत्तराखंड में मौसम का स्वागत ठंडी हवा के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का नजारा,
दीपावली के बाद पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ठंडक का अहसास

दीपावली के पर्व के बाद उत्तराखंड के मौसम ने एक नया रंग दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई इलाकों में बादलों ने डेरा डालना शुरू कर दिया है, जिससे धूप और बादलों के बीच एक खुशनुमा खेल चल रहा है। राजधानी देहरादून और मैदानी क्षेत्रों में सुबह-शाम की ठंड ने लोगों को सुकून देने वाली राहत दी है, जबकि पहाड़ी जिलों में तापमान में गिरावट के साथ बर्फबारी के संकेत उम्मीदों को जगा रहे हैं।
यह बदलाव न केवल प्राकृतिक सौंदर्य में इजाफा कर रहा है, बल्कि ठंडी हवा के साथ स्वास्थ्य और ऊर्जा दोनों के लिए भी लाभदायक साबित हो रहा है। मौसम विभाग की ताजा भविष्यवाणी से पता चलता है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश और पहाड़ों पर हिमपात की संभावना है। रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे जिलों में बारिश के साथ मौसम और भी तरोताजा होगा। लगभग 4000 मीटर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब और औली में बर्फबारी से पर्वतीय इलाकों में ठंडक और बढ़ेगी, जो सैलानियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।
देहरादून में मंगलवार को न्यूनतम तापमान 17.02 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, टिहरी में 10.6, मुक्तेश्वर में 11.5 और उधम सिंह नगर में 19.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि दीपावली से पहले तक धूप के कारण दिन में गर्मी महसूस हो रही थी, लेकिन त्योहार के बाद मौसम ने ठंडी हवा के साथ एक नया स्वरूप लिया है।
राजधानी में वीरवार को भी धूप देर से निकली और दिनभर बादल छाए रहे, जिससे मौसम में बदलाव का स्पष्ट अनुभव हुआ। मौसम विभाग का कहना है कि यह प्राकृतिक परिवर्तन मौसम के मौसमी चक्र का हिस्सा है, जो नवंबर के शुरुआती सप्ताह तक और भी स्पष्ट हो जाएगा। पहाड़ों में बर्फबारी शुरू होते ही मैदानों में भी ठंड का असर बढ़ेगा, जो खेतों और फसलों के लिए भी अनुकूल है।
यह मौसम परिवर्तन न केवल प्रकृति की नई ऊर्जा का संकेत है, बल्कि हमारे जीवन में भी ताजगी और उत्साह लेकर आता है। ठंडी हवा, बादलों की चादर और बर्फबारी का आगमन उत्तराखंड के लोगों के लिए एक सुखद एहसास है, जो हमें प्राकृतिक बदलावों के साथ सामंजस्य स्थापित करने की याद दिलाता है।



