ऋषिकेश में वन भूमि चिन्हीकरण की कार्रवाई का विरोध, रेलवे ट्रैक पर बैठे लोग, पथराव से तनावपूर्ण हुआ माहौल
ऋषिकेश में वन विभाग की कार्रवाई से खौफजदा लोग रेलवे ट्रैक पर जमे, अचानक पथराव से माहौल गरमाया, पुलिस ने भांजी लाठियां

ऋषिकेश: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऋषिकेश के आसपास के इलाकों में वन भूमि चिन्हीकरण की कार्रवाई को लेकर लोग काफी आशंकित और खौफ में हैं। लिहाजा, लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी कड़ी में सैकड़ों लोग सड़क छोड़ रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं। जिससे मामला गरमा गया उधर, शिवाजी नगर में बैठक आहूत की गई। जिसमें पार्षद सुरेंद्र सिंह नेगी, अभिनव सिंह मलिक के नेतृत्व में कई लोग शामिल हुए। बैठक में लोगों ने वन विभाग की कार्रवाई को लेकर अपने-अपने विचार रखे।
वन विभाग की कब्जे वाली भूमि हाथ से जाते देख लोगों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। आक्रोशित लोगों ने सड़क तो छोड़ अब रेल मार्ग को भी जाम करना शुरू कर दिया है। मनसा देवी रेलवे फाटक पर सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्रित होकर ट्रैक पर बैठ गए हैं, जिसमें महिलाएं सबसे ज्यादा शामिल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जान जाए पर भूमि हाथ से न जाए।
लोगों ने प्रदर्शन करते हुए वन विभाग की कार्रवाई का विरोध किया है। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है, जो लोगों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर समझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं है। स्थिति गंभीर बनी हुई है। लोग अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
इस वजह से कोच्चिवली से आने वाली और योग नगरी स्टेशन से जाने वाली गंगानगर एक्सप्रेस करीब डेढ़ घंटे से ट्रैक पर रुकी हुई है। जिससे मुसाफिरों को फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। इन दोनों ट्रेन की वजह से अन्य ट्रेनों के संचालक पर भी असर पड़ता हुआ नजर आ रहा है।
वन विभाग की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई से नाराज लोग सड़क छोड़ रेलवे ट्रैक पर जान देने के लिए बैठ गए। इस दौरान पुलिस के साथ प्रशासन की टीम ने लोगों को समझने का प्रयास किया। स्थिति तनावपूर्ण हुई तो मौके पर जीआरपी की टीम भी पहुंची। इस दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में भीड़ से किसी ने पुलिस पर पत्थर फेंक दिया और देखते ही देखते पथराव होने से स्थिति गंभीर हो गई।
बचाव में पुलिस और अन्य सुरक्षा कर्मी पीछे हटे और लाठियां फटकार कर भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन भीड़ मौके पर डटी रही। फिलहाल, स्थिति बेकाबू होती हुई दिखाई दे रही है। मौके पर पीएसी की टीम को भी बुलाया गया है. घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंची हुई है। फिलहाल, कई शासनिक और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे हुए हैं।
बता दें कि एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग की खाली पड़ी भूमि का सर्वे कर उन्हें कब्जे में लेने के आदेश वन विभाग और जिला कलेक्टर को जारी किए हैं। इसी कड़ी में वन विभाग की कार्रवाई खाली पड़ी वन भूमि पर चल रही है, जिसका लोग विरोध कर रहे हैं।
इसके अलावा जल्द ही एक विशाल जनसभा आयोजित कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल को जन संवाद के लिए आमंत्रित किया जाएगा। फिलहाल, लोगों ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से तत्काल विशेष सत्र बुलाकर वन भूमि पर काबिज क्षेत्र को विशेष कानून के तहत हक देने की मांग की है।
दरअसल, यह मामला ऋषिकेश क्षेत्र की करीब 2,866 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसे 26 मई 1950 को 99 साल की लीज पर पशु लोक सेवा मंडल संस्थान को दिया गया था। इस लीज की अवधि साल 2049 तक निर्धारित है. लीज की शर्तों के मुताबिक, इस भूमि का इस्तेमाल पशुपालन, उद्यान, चारा उत्पादन और अन्य निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया जाना था।
लेकिन समय के साथ यह बात सामने आई कि लीज पर दी गई इस भूमि का इस्तेमाल तय उद्देश्यों के बजाय अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किया गया। लीज को कथित रूप से सबलेट (किसी किराए की संपत्ति को उसके मूल किरायेदार की ओर से किसी और तीसरे व्यक्ति को थोड़े समय के लिए फिर से किराए पर देना) भी कर दिया गया।
इन गंभीर तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाल में ही सर्वोच न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने वन भूमि पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण को लेकर राज्य सरकार पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों में हो रहे अवैध कब्जों की गहनता से जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सर्वोच न्यायालय के इस रुख के बाद उत्तराखंड शासन ने इस पूरे मामले की जांच के लिए औपचारिक रूप से समिति का गठन किया है। शासन से गठित इस पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) धीरज पांडे को सौंपी गई है। समिति में सीएफ शिवालिक, देहरादून डीएफओ, एडीएम (वित्त) और ऋषिकेश एसडीएम को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
यह समिति आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए गूगल मैप के जरिए जमीन की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करेगी। साथ ही लीज से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स भी खंगालेगी। इसके अलावा समिति भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर रही है। ताकि, धरातल पर वास्तविक स्थिति का आकलन कर जानकारी जुटाई जा सके।



