युवा और महिला सशक्तिकरण से बनेगा विकसित भारत : रेखा आर्या
विधानसभा के विशेष सत्र में पेश की सात विभागों की उपलब्धियां, 2047 तक लैंगिक भेदभाव शून्य करने का संकल्प, उत्तराखंड को खेल भूमि के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने की कही बात

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि वर्ष 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने की दिशा में युवाओं और महिलाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज में लैंगिक भेदभाव को शून्य करना और हर महिला को सशक्त बनाना है। बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र में रेखा आर्या ने अपने अधीन कुल सात विभागों की उपलब्धियां सदन के समक्ष रखीं।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय प्रदेश में 4243 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित थे, जो अब बढ़कर 20,067 हो गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं। इसी वर्ष लगभग 7000 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं की निष्पक्ष भर्ती की गई है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लैंगिक अनुपात 2001 में 962 था, जो अब बढ़कर 984 हो गया है। कोविड काल में प्रभावित 6544 बच्चों को 3000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
रेखा आर्या ने कहा कि महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण और समान नागरिक संहिता लागू करना महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय शिशु मृत्यु दर 52 प्रति हजार थी, जो अब 20 प्रति हजार रह गई है, यानी इसमें 61 प्रतिशत की कमी आई है।
मातृ मृत्यु दर 450 से घटकर 91 प्रति लाख लाइव बर्थ पर आ गई है।
संस्थागत प्रसव दर 21 प्रतिशत से बढ़कर 83.2 प्रतिशत हो चुकी है।
राज्य में अब तक 5 राजकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं, जिनमें 625 एमबीबीएस और 239 पीजी सीटें हैं। पिथौरागढ़ और रुद्रपुर में दो नए मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। वर्तमान में 12 राजकीय नर्सिंग कॉलेज और 82 निजी नर्सिंग कॉलेज, साथ ही 84 पैरामेडिकल कॉलेजों में 13,332 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
वर्ष 2000 में समाज कल्याण पेंशन 125 रुपये प्रति माह थी, जिसे बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
राज्य में पेंशनधारकों की संख्या 1.20 लाख से बढ़कर 9.38 लाख हो गई है।
राज्य में तीलू रौतेली, बौना, किसान एवं परित्यकता पेंशन योजनाएं जैसी नई योजनाएं भी शुरू की गई हैं।



