अपराधदेहरादून

विक्रम हत्याकांड: शूटरों की तलाश में झारखंड तक छापेमारी, गैंगवार पर गहराया शक

झारखंड तक खाक छान रही पुलिस, हत्याकांड की परतें खुलनी शुरू

उत्तराखंड में बीते कुछ दिनों में आपराधिक घटनाओं का ग्राफ एकाएक बढ़ा है, जिसने कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न लगा दिए हैं। एक के बाद एक हत्याओं से देवभूमि दहल रहा है। खास बात ये है कि दो मामलों में गैंगस्टर की हत्या की गई है। चाहे वो हरिद्वार में गैंगस्टर विनय त्यागी गोलीकांड हो या अब देहरादून का गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड। इन दोनों के साथ अन्य वारदात भी दिनदहाड़े हुए। अब विक्रम शर्मा मामले को गैंगवार एंगल से जोड़कर देखा जा रहा है।
देहरादून गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड को हफ्ताभर होने को है, लेकिन अभी भी पुलिस शक शंकाओं और संभावनाओं पर ही बात कर रही है। जबकि, झारखंड के कुख्यात अपराधी ने उत्तराखंड में कैसे शरण ली हुई थी? ये सबसे बड़ा सवाल है।
सवाल इस बात पर भी उठ रहे हैं कि आखिरकार एक हिस्ट्रीशीटर को हथियार के लाइसेंस कैसे मिल गए? क्यों तमाम सुरक्षा एजेंसियों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया? अब इस हत्याकांड के घट जाने के बाद पुलिस जो बातें कह रही है, वो ठीक वैसा ही है, जैसा अन्य घटनाओं के बाद कहा जाता है।
देहरादून में विक्रम शर्मा की दिनदहाड़े हत्या ने उत्तराखंड पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कई दिन बीत जाने के बाद भी शूटरों का कोई ठोस सुराग हाथ न लगने से जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
देहरादून से लेकर उधम सिंह नगर और झारखंड के रांची, जमशेदपुर तक पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। प्रारंभिक जांच में गैंगवार का एंगल मजबूत होता नजर आ रहा है। जबकि, अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क की भूमिका भी खंगाली जा रही है। घटना 13 फरवरी की सुबह उस वक्त हुई, जब विक्रम शर्मा सिल्वर सिटी मॉल के जिम से बाहर निकल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाइक सवार हमलावरों ने नजदीक से उस पर कई राउंड फायरिंग की और मौके से फरार हो गए।
घायल अवस्था में विक्रम को अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने जांच पड़ताल कर डेड करार दिया। वारदात के बाद शहरभर में नाकेबंदी की गई, लेकिन हमलावर पुलिस को चकमा देकर निकल गए। यह वो समय था, जब देहरदून की सड़कें लोगों से भरी रहती है।
देहरादून पुलिस का मानना है कि शूटर पेशेवर हो सकते हैं और उन्हें बाहर से बुलाया गया था। लिहाजा, देहरादून पुलिस अब झारखंड जेल में बंद कुछ अपराधियों की भी कुंडली खंगाल रही है। ताकि, अपराधियों तक पहुंच बनाई जा सके।
सबसे बड़ी बात ये भी है कि गैंगस्टर विक्रम शर्मा उत्तराखंड में अपना कारोबार बड़े स्तर पर फैला चुका था। विक्रम के पास से मिले हथियार और लाइसेंस का लिंक उधम सिंह नगर से जुड़ने के बाद तराई क्षेत्र में जांच तेज कर दी गई है। वहां विक्रम के संपर्क में रहे कई लोगों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या हमलावरों को भागने में स्थानीय स्तर पर किसी ने सपोर्ट किया? इसके साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि कैसे विक्रम को हथियार का लाइसेंस मिल गया? लिहाजा, लाइसेंस की फाइल की भी जांच की जा रही है।
देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल का कहना है कि मामले में विक्रम के भाई से भी लंबी पूछताछ की गई। पुलिस ने उससे कई अहम सवाल किए। हालांकि, पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। क्योंकि, ऐसा कुछ पुलिस को मिला नहीं।
पुलिस की मानें तो है ये बात सही है कि कुछ तथ्यों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिले, लेकिन फिलहाल उसके खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं। एसएसपी प्रमेद्र डोबाल का कहना है कि फिर भी हम सभी पहलुओं पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
घटनास्थल और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच जारी है। कुछ संदिग्ध बाइक सवारों की पहचान की कोशिश की जा रही है। साइबर सेल की टीम कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी गहन पड़ताल कर रही है।

Show More

Related Articles