अंकिता भंडारी हत्याकांड और राजनीतिक घमासान
राज्य सरकार ने दी सीबीआई जांच की मंजूरी, विपक्ष और भाजपा में बयानबाजी जारी

उत्तराखंड में अंकित भंडारी हत्याकांड ने प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक गर्मी को बढ़ा दिया है। सामाजिक आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच, राज्य सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले करने की मंजूरी दे दी है। हालांकि यह पहला ऐसा मामला नहीं है, जब प्रदेश में गंभीर मामलों की जांच के लिए पहले एसआईटी गठित की गई और फिर सीबीआई की सिफारिश की गई।
पिछले सात महीने में राज्य सरकार ने तीन अलग-अलग मामलों में सीबीआई जांच की सिफारिश की है। इनमें 2025 में यूकेएसएसएससी पेपर लीक और एलयूसीसी कंपनी के 100 करोड़ से अधिक ठगी के मामले प्रमुख रहे। इन मामलों में एसआईटी ने प्रारंभिक जांच की थी, लेकिन जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन के कारण सीबीआई जांच को मंजूरी दी गई।
अंकित भंडारी हत्याकांड में कुछ ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, प्रदेश में 15–20 दिनों से राजनीतिक और सामाजिक घमासान मचा हुआ है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और अन्य संगठनों ने लगातार सीबीआई जांच की मांग की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 जनवरी को अंकित के माता-पिता से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना और 9 जनवरी को राजनीतिक और सामाजिक दबाव को देखते हुए जांच को सीबीआई को सौंपने की मंजूरी दी।
मुख्यमंत्री का कहना था कि यह फैसला जनभावनाओं और माता-पिता की मांगों का सम्मान करते हुए लिया गया। राज्य में यह पहला मामला है, जब सरकार ने ऐसे महत्वपूर्ण तथ्यों की जांच के लिए सीबीआई की मंजूरी दी है।
राज्य में पहले भी कई मामले सामने आए हैं, जहां एसआईटी जांच के बाद सीबीआई जांच को मंजूरी दी गई।
यूकेएसएसएससी पेपर लीक (2025): 21 सितंबर को स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के दौरान पेपर लीक हुआ। एसआईटी जांच के बावजूद युवाओं के धरनों और जन आक्रोश के चलते 29 सितंबर को परीक्षा रद्द कर सीबीआई जांच को मंजूरी दी गई।
एलयूसीसी कंपनी ठगी (2025): पर्वतीय क्षेत्रों में कंपनी के खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज होने और जन आक्रोश को देखते हुए 23 जुलाई को राज्य सरकार ने सीबीआई जांच को मंजूरी दी। इस क्रम से देखा जाए तो राज्य सरकार का रुख स्पष्ट है पहले एसआईटी जांच, फिर जनता और विपक्षी दबाव पर सीबीआई जांच।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि विपक्ष का काम ही सरकार पर दबाव बनाना है। उनका कहना है कि एसआईटी जांच में अपराधियों को बचाने का प्रयास हुआ और समय आने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि विपक्ष मुद्दा विहीन हो गया है और राज्य सरकार की कठोरता के बावजूद माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि सीबीआई जांच के नतीजे वही होंगे जो एसआईटी की जांच में आए।
कुल मिलाकर य़ह उत्तराखंड में अंकित भंडारी मामला केवल एक हत्याकांड का मामला नहीं है, बल्कि यह राजनीति, जनभावना और प्रशासनिक प्रक्रिया का परस्पर जटिल खेल बन चुका है। पिछले सालों के उदाहरण बताते हैं कि सरकार और प्रशासन तब कार्रवाई करते हैं जब जन आक्रोश चरम पर होता है।
यहां वास्तविक सवाल यह है कि क्या सीबीआई जांच सिर्फ राजनीतिक दबाव के जवाब में होगी या निष्पक्षता और न्याय की दिशा में कदम बढ़ाएगी? उत्तराखंड में जनता की निगाहें अब केवल जांच की प्रक्रिया और उसके परिणाम पर टिकी हैं।



