देहरादून

प्रशासन बना सहारा: चार बेटियों की शिक्षा फिर जली उम्मीद की लौ

साल का पहला दिन कहीं मंदिरों में आरती, कहीं संकल्प और कहीं उम्मीद। देहरादून जिला प्रशासन ने नववर्ष 2026 की शुरुआत किसी औपचारिक कार्यक्रम से नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़ी बालिकाओं की शिक्षारूपी पूजा से की। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रोजेक्ट नंदा–सुनंदा के तहत चार बालिकाओं की बाधित शिक्षा को 1.55 लाख रुपये की सहायता से पुनर्जीवित किया गया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बालिकाओं को शिक्षा सहायता के चेक वितरित किए।
जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित प्रोजेक्ट नंदा–सुनंदा का यह 11वां संस्करण है। अब तक 93 बालिकाओं की शिक्षा 33.50 लाख रुपये की सहायता से पुनर्जीवित की जा चुकी है। उन्होंने कहा नववर्ष की शुरुआत पूजा-अर्चना से होती है, लेकिन अगर पूजा शिक्षा की हो, तो उसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। जरूरतमंद बालिकाओं की पढ़ाई बचाना, यही सच्ची पूजा है।
डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन का लक्ष्य तय है बालिकाओं को सशक्त बनाना ही है। निर्धनता, बीमारी, दुर्घटना या पारिवारिक संकट किसी भी मेधावी बालिका की पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों तक योजनाएं पहुंचे और जिला प्रशासन स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नवाचार करे।
इस कार्यक्रम में चार ऐसी बालिकाएं नंदा–सुनंदा बनीं, जिनके जीवन में परिस्थितियों ने पढ़ाई पर विराम लगा दिया था इनमें
नंदनी राजपूत, जिनके पिता का वर्ष 2018 में दुर्घटना में निधन हो गया। तीन बहनों का परिवार, मां सिलाई-बुनाई कर घर चलाती हैं। 11वीं की फीस न भर पाने से पढ़ाई रुकने लगी थी प्रशासन ने हाथ बढ़ाया।
नव्या नैनवाल, पिता की मृत्यु के बाद परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। शिक्षा बोझ बनती जा रही थी प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई।
दिव्या, जिनके पिता दुर्घटना में दिव्यांग हो गए, 18 महीने तक बिस्तर पर रहे। घर की आर्थिकी चरमरा गई, 9वीं की पढ़ाई खतरे में थी शिक्षा को नया जीवन मिला।
आकांशी धीमान, जिनकी 8वीं की पढ़ाई दयनीय आर्थिक हालात की भेंट चढ़ रही थी प्रशासन ने फिर से राह खोली।
कार्यक्रम में एक और कहानी थीbजीविका अंथवाल की। दून विश्वविद्यालय में स्नातक कर रही जीविका के पिता गंभीर बीमारी के चलते आईसीयू में भर्ती हैं। आर्थिक संकट ने उच्च शिक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे। मंच पर अपनी बात रखते हुए वह भावुक हो गईं। जिला प्रशासन के सहयोग से उनकी पढ़ाई फिर संभव हो सकी।
जिलाधिकारी ने बालिकाओं से कहा परिस्थितियां आती हैं, लेकिन उनसे डरना नहीं है। लक्ष्य तय कर मेहनत करें। प्रशासन आपका साथ देगा, लेकिन सफलता आपके संकल्प से आएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सक्षम होकर ये बालिकाएं भी किसी और की शिक्षा की रोशनी बनेंगी।
कार्यक्रम के अंत में लाभार्थी बालिकाओं ने सरकार, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। सभागार में मौजूद हर व्यक्ति जानता था यह सिर्फ चेक वितरण नहीं था, यह उन सपनों को बचाने की कोशिश थी, जो अक्सर गरीबी की फाइलों में दब जाते हैं।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, सीडीपीओ, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और बालिकाओं के अभिभावक उपस्थित रहे।

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