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नैनीताल हाईकोर्ट में यूकेपीएससी भर्ती रिजल्ट में गड़बड़ी को लेकर की सुनवाई,

आयोग ने इस मामले में भर्ती परीक्षा कराने वाली एजेंसी को बताया जिम्मेदार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सचिवालय व राजस्व विभाग में समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी पदों के भर्ती परिणाम में गड़बड़ी के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई की। सुनवाई के बाद अगली तिथि 9 सितम्बर की तय की गई है। इस याचिका की सुनवाई वरिष्ठ न्यायधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई।

याचिकाकर्ता अशोक कुमार तोमर व अन्य ने याचिका दायर कर कहा है कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने समीक्षा अधिकारी व सहायक समीक्षा अधिकारी के सौ से अधिक पदों के लिये हुई भर्ती परीक्षा का परिणाम 28 मार्च 2025 को घोषित किया। जिसमें वे सफल घोषित हुए थे, लेकिन 4 अप्रैल 2025 को यह परीक्षाफल तकनीकी त्रुटि के नाम पर निरस्त कर दि गई थी।12 अप्रैल को नया परीक्षाफल जारी कर सफल 6 अभ्यर्थियों के नाम हटाकर अन्य 6 लोगों को सफल घोषित कर दिया गया।

उन्होंने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। तब न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने नियुक्त प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने तब आयोग से तकनीकी त्रुटि व किसके आदेश से स्क्रूटनी हुई उस आदेश की प्रति देने को कहा था। आयोग ने इस मामले में भर्ती परीक्षा कराने वाली एजेंसी को जिम्मेदार बताया। उसके खिलाफ कार्यवाही किये जाने का तर्क दिया था। आज हुई सुनवाई में कोर्ट ने यह जानकारियां कोर्ट में देने को कहा है।

वहीं, एक दूसरे मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने एफ़आईआर रद्द करने सम्बन्धी एक याचिका पर सुनवाई की। जिसमें याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। याचिकाकर्ता संदीप सिंह निवासी ग्रेटर नोएडा ने 22 जून 2025 को थाना रायपुर, देहरादून में उसके खिलाफ आईटी एक्ट व अन्य में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 25 सितंबर तय की गई है साथ ही कहा गया है कि इस बीच जांच की कार्यवाही जारी रहेगी, लेकिन याचिकाकर्ता को न तो गिरफ्तार किया जाएगा और न ही उसके विरुद्ध किसी प्रकार की जबरदस्ती की जाएगी। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता जांच अधिकारी के साथ पूरा सहयोग करेगा। आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने तथा बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित रहेगा।

ऐसे में हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब गड़बड़ी करने वालों की परेशानी बढ़ सकती है,लेकिन अधिकारियों ने पहले ही इसका सारा ठीकरा भर्ती परीक्षा करवाने वाली एजेंसी पर फोड़ दिया है, अब सवाल ये पैदा होता है कि अगर परीक्षा में धांधली नहीं हुई तो एजेंसी को आयोग क्यो जिम्मेदार बना रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी किया पूर्व की तरह इस बार भी इस मामले में कोई लीपा पोती कर कोर्ट मामले

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