हरिद्वार जमीन घोटाले में धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई 2 IAS और 1 PCS समेत कुल 12 अधिकारी सस्पेंड
डीएम, एसडीएम और पूर्व नगर आयुक्त पर भी गिरी गाज, अब विजिलेन्स करेंगे जमीन घोटाले की जांच

15 करोड़ की ज़मीन 54 करोड़ मे खरीदने का है मामला,
टीआरएस के समय NH घोटाले में IAS चंद्रेश यादव और पंकज पांडे के बाद ,दो IAS भी पांच साल मे एक साथ सस्पेंड,
हरिद्वार में बहुचर्चित जमीन घोटाले में धामी सरकार ने दोनों बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी है. डीएम कामेंद्र सिंह और आईएएस वरुण चौधरी को निलंबित कर दिया गया है.
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में हुए 2 हेक्टेयर से ज्यादा के भूमि खरीद घोटाले में जिलाधिकारी पर गाज गिर गई है. शहरी विकास विभाग ने प्रारंभिक जांच के लिए आईएएस रणवीर सिंह चौहान को जांच अधिकारी बनाया था. जांच अधिकारी ने अपनी जांच में हरिद्वार के जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह जो नगर निगम के प्रशासन भी थे, उन्होंने अपने दायित्वों की अनदेखी कर प्रशासक के रूप में भूमि की अनुमति प्रदान करते हुए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और नगर निगम के हितों को ध्यान में नहीं रखने, शासनादेशों की अनदेखी करने का उत्तरदायी पाया है।
इसके बाद उनके खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही आईएएस कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ अनुशासनिक/कार्रवाई भी की जा रही है।
हरिद्वार नगर निगम द्वारा कूड़े के ढेर के पास स्थित सस्ती कृषि भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदने के मामले ने राज्यभर में हलचल मचा रखी थी। न तो भूमि की किसी प्रकार से आवश्यकता थी, न ही उसके खरीदने में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई। शासन के नियमों को दरकिनार कर यह ऐसा सौदा किया गया ।
कर्मेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी (डीएम), हरिद्वार: भूमि क्रय की अनुमति देने और प्रशासनिक स्वीकृति देने में उनकी भूमिका संदेहास्पद पाई गई।
वरुण चौधरी, पूर्व नगर आयुक्त, हरिद्वार: उन्होंने बिना उचित प्रक्रिया के भूमि क्रय प्रस्ताव पारित किया और वित्तीय अनियमितताओं में प्रमुख भूमिका निभाई।
अजयवीर सिंह, एसडीएम: जमीन के निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती गई, जिससे गलत रिपोर्ट शासन तक पहुंची।
इन तीनों अधिकारियों को वर्तमान पद से हटाया गया है और शासन स्तर पर आगे की विभागीय और दंडात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री की शून्य सहनशीलता की नीति का स्पष्ट प्रमाण है। इसके साथ ही निकिता बिष्ट वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार , विक्की वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक, राजेश कुमार रजिस्ट्रार कानूनगों , कमलदास मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार को भी जमीन घोटाले में संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत प्रभाव से निलंबित किया है।
जांच अधिकारी नामित करने के बाद इस घोटाले में नगर निगम के प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट व अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया था। संपत्ति लिपिक वेदवाल का सेवा विस्तार भी समाप्त कर दिया गया था। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सेवा विस्तार दिया गया था।



