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उत्तराखंड वन विभाग 12 साल पुराना शासनादेश बदलने की तैयारी, शासन को भेजे 6 बिल 

देहरादून: प्रदेश में अब जल्द ही वन विभाग का 12 साल पुराना शासनादेश को बदलने की तैयारी हो रही है। दरअसल महकमे में टेरिटोरियल रेंज को लेकर कुछ अहम बदलाव होने हैं, जिसके बाद डिप्टी रेंजर्स को भी टेरिटोरियल रेंज दी जाने की कवायद चल रही है । इसमें खास बात यह है कि इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार हो चुका है और अब बस इस पर अंतिम आदेश होने बाकी है। उत्तराखंड में टेरिटोरियल रेंज यानी प्रादेशिक सीमा में पोस्टिंग का नया फार्मूला तैयार हो चुका है। हालांकि अभी ये लेखा जोखा ड्राफ्ट के स्वरूप में तैयार है। लेकिन जल्द ही इस पर अंतिम मोहर लगने की उम्मीद जताई जा रही है है। दरअसल शासन में 6 बिंदुओं पर टेरिटोरियल रेंज को लेकर चिंतन किया जा रहा है। इसमें वन क्षेत्राधिकारियों (रेंजर) और उपवन क्षेत्राधिकारियों (डिप्टी रेंजर) को पोस्टिंग देने से जुड़े नियम तय हैं।

उत्तराखंड सरकार ने सितंबर 2013 में टेरिटोरियल रेंज को लेकर एक आदेश दिया था, जिसमें वन क्षेत्राधिकारियों को ही इसमें तैनाती दिए जाने का जिक्र था। लेकिन प्रदेश में वन क्षेत्राधिकारियों की कमी के चलते टेरिटोरियल रेंज जैसी अहम पोस्टिंग या तो अतिरिक्त चार्ज पर चल रही है, या फिर खाली है। ऐसे में पिछले  2013 के इस शासनादेश को संशोधित करने की कोशिश चल रही है। इस पर अब वन विभाग अंतिम कदम की तरफ बढ़ रहा है।

इस मामले में शासन को विचार करने के बाद कुछ अहम छह बिंदु भेजे गए हैं, जिसके आधार पर टेरिटोरियल रेंज की जिम्मेदारी भविष्य में दिए जाने की तैयारी है। टेरिटोरियल रेंज को लेकर यह माना गया है कि वन क्षेत्राधिकारियों की कमी के चलते कई जगहों पर दोहरी और तीन जगह की जिम्मेदारी भी एक ही वन क्षेत्राधिकारी को दी गई है। इसके चलते इन संवेदनशील क्षेत्रों में वनाग्नि, मानव वन्य जीव संघर्ष, अवैध रूप से वृक्षों के कटान और अवैध खनन जैसे मामलों पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा पा रहे हैं

टेरिटोरियल रेंज को लेकर अब जिन बिंदुओं पर विचार अंतिम चरण में है, उनमें पहला बिंदु वन क्षेत्राधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर टेरिटोरियल रेंज दिए जाने और जरूर पूरी होने पर नॉन टेरिटोरियल फॉरेस्ट रेंज में तैनाती दिए जाने से जुड़ा है।

इसके अलावा प्रशासनिक कारणों से फील्ड में प्रभार के लिए उपयुक्त नहीं पाए जाने वाले वन क्षेत्राधिकारियों को टेरिटोरियल रेंज में तैनाती नहीं दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। जबकि टेरिटोरियल रेंज के लिए उपयुक्त नहीं होने वाले वन क्षेत्राधिकारियों को नॉन टेरिटोरियल रेंज में तैनाती दिए जाने पर सहमति बनाने की कवायद की जा रही है।

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वन क्षेत्राधिकारियों की तैनाती के बाद भी विभिन्न टेरिटोरियल और नॉन टेरिटोरियल फॉरेस्ट रेंज में तैनाती के लिए जगह उपलब्ध होने पर पदोन्नति की पात्रता रखने वाले उपवन क्षेत्र अधिकारियों (डिप्टी रेंजर) की तैनाती प्रभारी रेंज अधिकारी के रूप में यहां की जा सकती है।

यह भी तय किया जा रहा है कि उपवन क्षेत्राधिकारियों का प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी के रूप में चयन केवल प्रभारी रेंज अधिकारी के लिए होगा और भविष्य में इस चयन को किसी भी प्रकार के सेवा संबंधित लाभ के लिए आधार नहीं बनाया जा सकेगा।

इसके अलावा फील्ड की जरूरत के हिसाब से टेरिटोरियल क्षेत्र का अतिरिक्त कार्यभार किसी भी वन क्षेत्राधिकारी को नहीं दिया जाएगा।यदि किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा करना जरूरी होगा, तो 30 दिन के अंदर वहां पूर्ण कालिक वन क्षेत्राधिकारी या चयनित प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी की तैनाती की जाएगी। फिलहाल इन सभी विषयों पर करीब-करीब सहमति बना ली गई है और अब शासन इस पर विचार करने के बाद अंतिम मोहर लगा सकता है।

प्रमुख वन संरक्षक हॉफ ने बताया की इसके लिए काफी समय से विचार चल रहा था।शासन स्तर से संबंधित मामले पर प्रस्ताव मांगा गया था। प्रस्ताव अब शासन को भेज दिया गया है।

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