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उत्तराखंड की वित्तीय स्थिति तय करेगा 16वां वित्त आयोग

उत्तराखंड के लिए 16वें वित्त आयोग का अहम दौरा, केंद्रीय बजट में राज्य की हिस्सेदारी को लेकर तैयारियां तेज

देहरादून: केंद्रीय बजट में उत्तराखंड की हिस्सेदारी कितनी होगी, यह तय करने के लिए 16वें वित्त आयोग की टीम जल्द उत्तराखंड का दौरा करने वाली है। इस दौरे को लेकर राज्य सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। वित्त विभाग ने इस संदर्भ में आवश्यक जानकारी जुटाने और प्रस्तुतीकरण तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आयोग के सामने राज्य की वित्तीय जरूरतें और योजनाएं मजबूती से रखी जा सकें।

16वां वित्त आयोग उत्तराखंड राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन करेगा और यह तय करेगा कि अगले 5 वर्षों में केंद्रीय बजट में राज्य को कितनी सहायता मिल सकती है। इस दौरान वित्त आयोग की टीम राज्य की विभिन्न योजनाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र से मिलने वाली मदद का आकलन करेगी।

वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में एक 12 सदस्यीय टीम उत्तराखंड का दौरा करेगी। इस टीम में आयोग के चार सदस्य, सचिव ऋत्विक पांडे और संयुक्त सचिव के के मिश्रा भी शामिल हो सकते हैं। यह टीम 19 और 20 मई को उत्तराखंड आने की संभावना है, और इस दौरान राज्य की वित्तीय जरूरतों पर गहन चर्चा की जाएगी।

वित्त विभाग राज्य की विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं और उनके लिए केंद्र से मिलने वाली मदद को लेकर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण तैयार कर रहा है। यह प्रस्तुतीकरण आयोग के सामने राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं और योजनाओं के महत्व को स्पष्ट रूप से रखेगा, ताकि वित्त आयोग राज्य के बजट के लिए उचित सिफारिशें कर सके।

इस दौरान वित्त आयोग यह भी जानने की कोशिश करेगा कि केंद्र से पहले जो बजट आवंटित किया गया था, उसे राज्य ने कितनी अच्छी तरह से उपयोग किया। इससे आयोग को यह अंदाजा लगेगा कि राज्य ने केंद्रीय मदद का कितना सकारात्मक उपयोग किया है और आगे की मदद के लिए राज्य की तैयारियों का क्या स्तर है।

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उत्तराखंड को अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं के लिए केंद्रीय मदद की अत्यधिक आवश्यकता होती है। इसलिए, राज्य सरकार को इस मौके का लाभ उठाते हुए आयोग के सामने अपने दावे को मजबूत तरीके से प्रस्तुत करना होगा, ताकि अगले 5 वर्षों के लिए राज्य को केंद्रीय बजट में उचित हिस्सा मिल सके।

16वें वित्त आयोग का उत्तराखंड दौरा राज्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इसके माध्यम से राज्य को केंद्रीय बजट में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सिफारिशें प्राप्त हो सकती हैं। राज्य सरकार की यह कोशिश रहेगी कि वह आयोग के सामने अपनी जरूरतों को इस तरीके से पेश करे, जिससे केंद्रीय मदद की आवंटन में राज्य को लाभ हो सके।

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