उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में दो चरणों में क्यों हो रहे पंचायत चुनाव?

धामी सरकार उत्तराखंड में महाराष्ट्र का मॉडल लेकर आई , जिससे धांधली की जा सके: माहरा

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। हरिद्वार जनपद को छोड़कर 12 जिलों में यह चुनाव होने हैं। निर्वाचन दो चरणों में होने हैं। जिसको लेकर राजनैतिक पारा गर्माने लगा है ।उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने दो चरणों में कराये जा रहे पंचायत चुनाव को लेकर सरकार पर कटाक्ष किया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा केवल 12 जिलों के चुनाव सरकार एक साथ कराने में भी सक्षम नहीं है। इसका तात्पर्य यह है कि सरकार महाराष्ट्र का मॉडल यहां लेकर आ रही है। इधर के वोटर उधर करके, और उधर के वोटर इधर करके भाजपा चुनाव जीतना चाहती है। करन माहरा ने आरोप लगाया कि चुनाव को प्रभावित करने की नीयत से सरकार दो चरणों में चुनाव कराने जा रही है। उन्होंने इसे मजाक बताते हुए कहा कि धामी सरकार और इलेक्शन कमिशन से 12 जिले भी नहीं संभल पा रहे हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा धामी सरकार उनके मंत्री और प्रवक्ता उनकी इस बात का जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर होने जा रहे हैं, किंतु रोस्टर जीरो कर दिया गया है। कानूनी रूप से यह पहले से ही तय है कि चुनाव कैसे होंगे और आरक्षण की क्या व्यवस्था होगी, लेकिन आज जनसंख्या के हिसाब से आरक्षण तय कर दिया जा रहा है। कई ब्लॉक ऐसे हैं जिसमें पूरी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। किसी ब्लॉक में सभी सीटें सामान्य कर दी गई हैं।

उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा सरकार जान बुझकर कुछ ऐसा कर रही है कि आपत्तियां दर्ज हों, लोग उद्वेलित हों, व कोर्ट में मामला लटक जाये। जिससे चुनाव नहीं कराने पड़ें। करन माहरा ने कहा 24 जून को कोर्ट में तारीख है।जिसका कांग्रेस भी इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में पहली बार कुछ ऐसा घटित हुआ कि सरकार ने पंचायतों में प्रशासक बैठा दिए। इस दौरान चार-पांच दिन ऐसे भी रहे जिसमें पंचायतों मे प्रशासक, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष यहां तक की प्रधान तक नहीं थे।

 

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