देहरादून

उत्तराखंड में महिला सुरक्षा और संगठनात्मक असहजता पर भाजपा में संकट की लकीर

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहे हैं। हर राजनीतिक दल इस समय अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में लगा है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बार चुनावी तैयारियों में पिछड़ती नजर आ रही है। कारण सिर्फ राजनीतिक विरोध ही नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर और जनता के बीच बढ़ती असहजता है।
पिछले कुछ दिनों में उत्तराखंड में महिला सुरक्षा के मामलों ने भाजपा की राजनीतिक छवि को चुनौती दी है। अंकिता भंडारी हत्याकांड के ताजा घटनाक्रम और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के विवादित बयान ने पार्टी को जनता के गुस्से का सामना करने के लिए मजबूर कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध के स्वर तेज हैं।
बीजेपी के छोटे नेता और पार्टी से जुड़े कई लोग भी गलती या विवाद के कारण पार्टी की किरकिरी कर रहे हैं। ऐसे हालात में पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों पर भी असर पड़ा है। पहले जो कार्यक्रम सुचारू रूप से चल रहे थे, अब उनमें जनता के विरोध और असहमति का सामना करना पड़ रहा है।
पार्टी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं तक के विरोध की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आम हो गई हैं। कार्यकर्ता अब या तो कार्यक्रमों में केवल खानापूर्ति कर रहे हैं या बैठ कर इंतजार कर रहे हैं। पार्टी की रणनीति और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें अभी तक प्रभावी साबित नहीं हुई हैं।
त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या और हल्द्वानी में भाजपा पार्षद अमित बिष्ट पर हत्या का आरोप लगने के बाद पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ऐसे घटनाक्रम भाजपा को लगातार बैकफुट पर ला रहे हैं।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि बीजेपी पिछले चार सालों से केवल धार्मिक तुष्टिकरण की राजनीति करती रही, जिसके कारण जनता के वास्तविक मुद्दे नजरअंदाज हुए। उनका कहना है कि यही वजह है कि पार्टी का संगठन डिरेल हो चुका है और कार्यक्रम फ्लॉप हो रहे हैं।
भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि सभी कार्यक्रम बिना किसी रूकावट के चल रहे हैं। पार्टी का दावा है कि कांग्रेस झूठ और षड्यंत्र फैलाकर माहौल बिगाड़ रही है। प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा कि कार्यकर्ताओं का कोई विरोध नहीं है और जल्द ही इस षड्यंत्र का पर्दाफाश होगा।
उत्तराखंड में भाजपा जिस राजनीतिक मजबूती के लिए जानी जाती है, वह इस समय महिला सुरक्षा, विवादित बयान और संगठनात्मक असहजता के चलते संकट में है। अंकिता भंडारी केस, स्थानीय विवाद और नेताओं के बयानों ने पार्टी को केवल विपक्षी नहीं, बल्कि जनता के सामने भी कमजोर कर दिया है।

Show More

Related Articles