
देहरादून। राजधानी देहरादून में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी और अन्य सरकारी सुविधाएं हासिल करने का मामला सामने आया है। मंगलवार को आरटीआई क्लब की उपाध्यक्ष रीटा सूरी ने प्रेस वार्ता कर मामले का खुलासा करते हुए नगर निगम और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में कई ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जो अभिलेखों की सत्यता पर संदेह पैदा करती हैं।
रीटा सूरी के अनुसार, एक ही परिवार के बच्चों की जन्मतिथियों में असामान्य अंतर दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों में दूसरी पुत्री रेनू का जन्म वर्ष 1987 दर्शाया गया है, जबकि तीसरी पुत्री सपना की जन्मतिथि 1 जनवरी 1988 अंकित है। दोनों जन्मतिथियों के बीच महज पांच से सात महीने का अंतर होने का दावा करते हुए उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताया।
प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि चौथी पुत्री बरखा को नगर निगम देहरादून में मृतक आश्रित के आधार पर नौकरी दिलाने के लिए अलग-अलग दस्तावेजों में भिन्न जन्मतिथियों का उपयोग किया गया। शिकायत के अनुसार शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और आधार कार्ड में जन्मतिथि अलग-अलग होने के बावजूद नियुक्ति होना सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
रीटा सूरी ने कहा कि यदि दस्तावेजों में इतनी स्पष्ट विसंगतियां मौजूद थीं तो सत्यापन के दौरान उन्हें नजरअंदाज कैसे किया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही उस स्थानीय पार्षद की भूमिका पर भी सवाल उठाए, जिसने कथित रूप से परिवार के सदस्यों के चरित्र सत्यापन दस्तावेजों को प्रमाणित किया था।
आरटीआई क्लब ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है और विभागीय जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। रीटा सूरी का कहना है कि उनके द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज नगर निगम देहरादून से आरटीआई के माध्यम से प्राप्त किए गए हैं।



