अंकिता भंडारी हत्याकांड: सीबीआई कार्यालय का घेराव, जांच की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल
संयुक्त संघर्ष मंच का प्रदर्शन, छह महीने बाद भी जांच में प्रगति को लेकर मांगा जवाब

देहरादून: बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच को लेकर एक बार फिर लोगों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। गुरुवार को अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने देहरादून के सीमा द्वार स्थित सीबीआई कार्यालय का घेराव कर जांच की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने मामले में पारदर्शिता और शीघ्र न्याय की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की।
भारी बारिश के बावजूद आंदोलनकारी सीबीआई कार्यालय पहुंचे और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इसके बावजूद कुछ महिला प्रदर्शनकारी दूसरे प्रवेश द्वार तक पहुंच गईं और वहां प्रतीकात्मक तालाबंदी कर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान संयुक्त संघर्ष मंच के प्रतिनिधियों और सीबीआई अधिकारियों के बीच वार्ता भी हुई। इस दौरान मंच से जुड़े लोगों ने जांच की वर्तमान स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए और अधिकारियों से मामले में हुई प्रगति की जानकारी मांगी। हालांकि अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।
संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने कहा कि अंकिता भंडारी मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति हुए लगभग छह महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक जांच की दिशा और प्रगति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि मंच पहले भी सीबीआई अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठा चुका है, लेकिन जांच की स्थिति को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
मोहित डिमरी ने कई अहम सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में कथित वीआईपी की पहचान क्या है और क्या उससे पूछताछ की गई है? रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर संभावित साक्ष्यों को नष्ट करने के आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंची है? छह महीने बाद भी जांच में क्या ठोस प्रगति हुई है? इसके अलावा अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब तक सीबीआई ने पूछताछ या बयान दर्ज कराने के लिए क्यों नहीं बुलाया? उन्होंने कहा कि इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए लोगों को फिर सड़कों पर उतरना पड़ा है।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, कानून व्यवस्था में जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा भी है। उनका कहना था कि जब तक मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है। मामले की जांच को लेकर समय-समय पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं। अब सीबीआई जांच को लेकर बढ़ते जनदबाव के बीच लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसी कब तक मामले में अपनी प्रगति और निष्कर्षों को सार्वजनिक करती है।



