कांग्रेस नेता ने दिल्ली में शिला ले जाने का आरोप लगाया, बीजेपी ने किया खारिज, मानहानि का मुकदमा भी तैयार
केदारनाथ धाम की स्वर्णमंडन विवाद पर गरमाई राजनीति

विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की आस्था और स्वर्णिम आभा पर छिड़ा विवाद राजनीतिक रूप ले चुका है। इस बार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया है कि केदारनाथ की पवित्र शिला को दिल्ली ले जाने की तैयारी की गई थी। वहीं, बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और राजनीति प्रेरित करार दिया है। विवाद अब मानहानि के मुकदमे तक पहुंचने की कगार पर है।
साल 2022 में केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह का स्वर्णमंडन हुआ था। तब से लेकर अब तक सोने के नाम पर पीतल लगाने जैसे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार कांग्रेस नेता ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। गणेश गोदियाल का दावा है कि केदारनाथ धाम से मंदिर के लिए एक पवित्र शिला को दिल्ली ले जाया गया, जिसे तत्कालीन बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर उठवाया और सड़क मार्ग से अपनी गाड़ी में डालकर दिल्ली भेजा।
गोदियाल ने कहा यह शिला केदारनाथ की आस्था और सम्मान का प्रतीक है। जब तक यह वापस नहीं लाया जाएगा, मैं इस मुद्दे को उठाते रहूंगा।
दूसरी ओर अजेंद्र अजय ने स्पष्ट किया है कि ये सभी आरोप राजनीतिक भड़काने वाले हैं और किसी भी तथ्य से रहित हैं। उन्होंने कहा, गणेश गोदियाल बार-बार बिना प्रमाण मीडिया में सनसनी फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर उनके पास कोई सबूत है तो वे सक्षम प्राधिकरण या अदालत में पेश करें।
अजय ने यह भी बताया कि अब इस मामले में उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोदियाल चुनाव में हारने के बाद पार्टी से अलग-थलग हो चुके हैं और इसलिए बौखलाहट में इस तरह के आरोप लगा रहे हैं।
अजेंद्र अजय ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच कमिश्नर की अध्यक्षता में की गई थी। जांच रिपोर्ट में सभी आरोपों को खारिज कर दिया गया था। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि यदि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह के आरोप लगाएगा, तो बदरी केदार मंदिर समिति उसके खिलाफ सनातन धर्म और मंदिर की छवि खराब करने के लिए कड़ी कार्रवाई करेगी।
यह विवाद फिर से केदारनाथ धाम को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा कर दिया है। कांग्रेस इसे मंदिर की आस्था से जुड़ा मुद्दा बता रही है और लगातार भाजपा पर आरोप लगा रही है। वहीं बीजेपी इसे राजनीतिक हताशा और निराधार आरोपों से जोड़ी हुई लड़ाई बता रही है।
केदारनाथ जैसे पवित्र स्थान को लेकर यह बहस केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों का भी बड़ा हिस्सा बन गई है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की पूरी संभावना है, खासकर जब आगामी चुनाव नजदीक हैं।



