देहरादून

दिन प्रतिदिन बढ़ रहा अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी विवाद

सीबीआई जांच की मांग तेज

उत्तराखंड में पिछले 15 दिनों से अंकिता भंडारी हत्याकांड ने राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियों को जन्म दिया है। मामला अब वीआईपी विवाद और जांच प्रक्रिया तक पहुँच गया है।
बुधवार को अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की और अपना मांग पत्र सौंपा। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी बेटी के हत्यारे को केवल उम्रकैद ही नहीं बल्कि कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। साथ ही, वीआईपी के नाम का खुलासा हो और उसकी गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए।
मुख्यमंत्री धामी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंकिता के माता-पिता की मंशा का सम्मान किया जाएगा और सरकार जल्द ही निर्णय लेगी।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, आम आदमी पार्टी और कई सामाजिक संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन सभी संगठनों का मुख्य अनुरोध यही है कि हत्या के मामले में सीबीआई जांच हो और प्रारंभिक दौर में सामने आए वीआईपी के नाम का सार्वजनिक खुलासा किया जाए।
गुरुवार को राज्य आंदोलनकारी एवं उत्तराखंड महिला मंच की अध्यक्ष कमला पंत और भाकपा माले के प्रदेश सचिव इंद्रेश मैखुरी ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर समर्थन जताया। अंकिता के माता-पिता और सामाजिक संगठनों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि वीआईपी कौन है?। कमला पंत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि इस नाम को सार्वजनिक करने की मांग अभी भी जारी है। इसके बिना न्याय अधूरा है।
वे यह भी कहते हैं कि मामले की शुरुआती जांच में कई सबूत मिटाए गए हैं, और एसआईटी ने उचित तरीके से जांच नहीं की। इसलिए लोग अब सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच सामने आए।
अंकिता के माता-पिता ने यह भी कहा कि तीन साल की इस लड़ाई ने उन्हें कमजोर किया है, लेकिन वे तब तक संघर्ष करते रहेंगे जब तक वीआईपी का नाम सार्वजनिक नहीं होता। उनका मानना है कि न्याय केवल हत्यारे की सजा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों का खुलासा होना आवश्यक है।
कमला पंत ने भी दोहराया कि सीबीआई जांच की घोषणा के बाद भी उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनका लक्ष्य है कि वीआईपी का नाम सामने आए और रिसॉर्ट में मिटाए गए सबूतों की भी जांच हो।
कुल मिलाकर अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक हत्या का मामला नहीं रह गया है। यह अब वीआईपी विवाद, जांच प्रक्रिया और राजनीतिक दबाव का प्रतीक बन गया है। अंकिता के माता-पिता और सामाजिक संगठन यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं कि सच सामने आए और दोषियों को सजा मिले।

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