ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाकर ट्रोल हुए मंत्री गणेश जोशी
बिना वैध इंश्योरेंस स्कूटी चलाने पर उठे सवाल

देहरादून। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सोमवार को ईंधन संरक्षण और सादगी का संदेश देने के लिए स्कूटी चलाते नजर आए, लेकिन उनकी यह पहल सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गई। जिस स्कूटी पर मंत्री सवार होकर कैंप कार्यालय पहुंचे, उसका इंश्योरेंस वैध नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद लोगों ने उन्हें ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया।
मामला बढ़ने पर मंत्री गणेश जोशी को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि स्कूटी उनके ओएसडी की थी और उसका इंश्योरेंस रिन्यू की प्रक्रिया में था, जिसे अब नवीनीकृत करा दिया गया है।
दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता के बीच ऊर्जा संसाधनों और ईंधन संकट को लेकर चिंता जताते हुए मंत्री गणेश जोशी ने सोमवार को एक प्रतीकात्मक पहल की। गढ़ी कैंट क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्होंने सरकारी वाहन छोड़कर स्कूटी से कैंप कार्यालय पहुंचने का फैसला किया।
मंत्री ने इसे ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश बताया। उनका कहना था कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया कई चुनौतियों से गुजर रही है और ऐसे समय में हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह पेट्रोल-डीजल का अनावश्यक उपयोग न करे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ऊर्जा संरक्षण, आत्मनिर्भरता और संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल का संदेश देते रहे हैं। उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दोपहिया वाहन का उपयोग कर जनता को जागरूक करने का प्रयास किया।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यदि लोग छोटी दूरी के लिए चार पहिया वाहनों के बजाय दोपहिया वाहन, सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहनों का इस्तेमाल करें तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या में भी राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। मंत्री ने लोगों से स्थानीय कार्यक्रमों और कम दूरी की यात्राओं में वैकल्पिक साधनों के इस्तेमाल की अपील भी की।
हालांकि, मंत्री की यह पहल उस समय विवादों में आ गई जब सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि जिस स्कूटी पर मंत्री सवार थे, उसका इंश्योरेंस वैध नहीं था। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि जो मंत्री जनता को नियमों का पालन करने का संदेश दे रहे हैं, वही खुद ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते नजर आए।
इसके अलावा मंत्री के आगे-पीछे चल रही गाड़ियों के काफिले को लेकर भी लोगों ने सवाल खड़े किए। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना था कि एक ओर मंत्री स्कूटी चलाकर ईंधन बचत का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके साथ चल रहे कई वाहन और वीडियो शूट करने वाली गाड़ियां ईंधन खर्च कर रही थीं।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उन्होंने केवल प्रतीकात्मक संदेश देने के उद्देश्य से स्कूटी का इस्तेमाल किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूटी उनके ओएसडी की थी और उसका इंश्योरेंस रिन्यू की प्रक्रिया में था।
मंत्री ने कहा,
“आज मैंने अपने ओएसडी की स्कूटी उसी समय चलाने के लिए ली थी। जहां तक इंश्योरेंस की बात है तो उसका रिन्यूअल प्रक्रिया में था और अब इंश्योरेंस रिन्यू हो चुका है। मैंने केवल एक सिंबॉलिक संदेश देने का प्रयास किया है।”
उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही उनकी खुद की स्कूटी भी आ जाएगी और वे आसपास के स्थानीय कार्यक्रमों में दोपहिया वाहन का इस्तेमाल करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दूरस्थ यात्राओं के लिए कार का उपयोग करना जरूरी होगा।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकारी वाहनों का उपयोग कम करना और लोगों को ईंधन संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या भी कम करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा,“ऐसा नहीं है कि हर जगह स्कूटी से जाऊंगा, लेकिन स्थानीय दौरों में दोपहिया वाहन का इस्तेमाल करूंगा। कोशिश रहेगी कि गाड़ियों का कम से कम उपयोग हो और फ्लीट में भी वाहनों की संख्या घटाई जाए।”
मंत्री की इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सकारात्मक संदेश देने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे केवल प्रतीकात्मक राजनीति और प्रचार का हिस्सा करार दे रहे हैं।
फिलहाल, बिना वैध इंश्योरेंस वाहन चलाने और सरकारी काफिले के साथ ईंधन बचत का संदेश देने को लेकर उठे सवालों ने मंत्री की इस पहल को चर्चा और विवाद दोनों के केंद्र में ला दिया है।



