राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा: 25 वर्ष की यात्रा विकास, शौर्य और अध्यात्म का प्रतीक

उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजतोत्सव वर्ष के अवसर पर सोमवार को आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड की 25 वर्षों की विकास यात्रा को अभिनव उपलब्धियों का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह देवभूमि अध्यात्म, पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन और शौर्य की धारा से ओतप्रोत है, और अब विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में अग्रसर है।
राष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तराखंड विधान सभा के पूर्व और वर्तमान सदस्यों तथा सभी राज्यवासियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने स्मरण कराया कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में नवंबर 2000 में उत्तराखंड का गठन जनमानस की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया था। उन्होंने कहा इन 25 वर्षों में उत्तराखंड ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में सराहनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
राष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तराखंड विधान सभा के पूर्व और वर्तमान सदस्यों तथा सभी राज्यवासियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने स्मरण कराया कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में नवंबर 2000 में उत्तराखंड का गठन जनमानस की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया था। उन्होंने कहा इन 25 वर्षों में उत्तराखंड ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में सराहनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास पूरे देश के लिए मिसाल हैं। उन्होंने सुशीला बलूनी, बछेन्द्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी महान महिलाओं की परंपरा को नमन करते हुए कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं हमेशा समाज में परिवर्तन की अग्रदूत रही हैं।
उन्होंने विधान सभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण को राज्य की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए कहा कि वे भविष्य में सदन में महिलाओं की संख्या बढ़ते हुए देखना चाहेंगी।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि से शौर्य और अध्यात्म की परंपराएं प्रवाहित होती रही हैं। कुमाऊं और गढ़वाल रेजीमेंट के नाम से ही यहां के लोगों के साहस और समर्पण का परिचय मिलता है। उन्होंने कहा यहां के युवा मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। यह शौर्य परंपरा पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता लागू करने की परिकल्पना को साकार करते हुए उत्तराखंड विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया है, जिसकी वह सराहना करती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 550 से अधिक विधेयक पारित किए गए हैं, जिनमें लोकायुक्त, भूमि व्यवस्था, और नकल विरोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं। इससे शासन में पारदर्शिता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की भावना मजबूत हुई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता है कि उत्तराखंड विधानसभा ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन को लागू कर डिजिटल विधायिका की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस माध्यम से दो सत्र सफलतापूर्वक संचालित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विधायकों को देश की अन्य विधानसभाओं की बेस्ट प्रैक्टिस अपनाने में सहायता मिलेगी।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विधायक जनता और शासन के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विधायक के रूप में नौ वर्ष तक जनसेवा का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने जाना कि यदि जनप्रतिनिधि सेवा भाव से जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहें, तो विश्वास का बंधन अटूट रहता है। उन्होंने कहा विकास और जनकल्याण के कार्य दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि राज्य की प्राकृतिक संपदा और सौंदर्य को संरक्षित रखते हुए इसे विकास के मार्ग पर आगे ले जाना समय की मांग है। उन्होंने सभी विधायकों से राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से कार्य करने का आह्वान किया।
समृद्धि और सुशासन का स्वर्णिम कालखंड: राज्यपाल
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने अपने अभिभाषण में कहा कि बीते 25 वर्ष उत्तराखंड के लिए आर्थिक समृद्धि, सुशासन, सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण का स्वर्णिम कालखंड रहे हैं। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड समृद्ध और सशक्त राज्य की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आगामी 25 वर्षों में उत्तराखंड को आध्यात्मिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, जैविक कृषि और हरित ऊर्जा के आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने समृद्ध गाँव, सशक्त युवा, सशक्त नारी और सुरक्षित पर्यावरण का मंत्र देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से राज्य विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
राष्ट्रपति का अभिभाषण इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्रपति का यह अभिभाषण उत्तराखंड के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने कहा राष्ट्रपति का जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्रसेवा का अद्भुत उदाहरण है। उनके शब्द उत्तराखंड की आने वाली 25 वर्ष की विकास यात्रा का मार्गदर्शन करेंगे।
मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन के ज्ञात-अज्ञात वीरों को नमन करते हुए कहा कि जिन माताओं, बहनों और युवाओं ने अपने बलिदान से इस राज्य को जन्म दिया, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाया जाएगा।
ग्रीन विधानसभा की दिशा में कदम : खण्डूडी
विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु भूषण खंडूडी ने स्वागत भाषण में कहा कि राज्य के लिए यह गर्व का क्षण है कि राष्ट्रपति स्थापना दिवस पर विशेष सत्र को संबोधित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा ने सदैव लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए जनता की आकांक्षाओं को मूर्त रूप दिया है।
उन्होंने बताया कि विधानसभा ने ग्रीन इनिशिएटिव के तहत पेपरलेस विधायिका की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। देहरादून और भराड़ीसैंण दोनों परिसरों में नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन लागू किया गया है और ई-लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि भराड़ीसैंण में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी द्वारा स्वीकृत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज, रिसर्च एंड ट्रेनिंग भी संचालित किया जा रहा है, जो विधायी और नीतिगत अध्ययन का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा।
चिपको की भूमि से नई प्रेरणा: नेता प्रतिपक्ष आर्य
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड हिमालय की गोद में बसा एक विशिष्ट राज्य है, जिसकी सीमाएँ तिब्बत और नेपाल से मिलती हैं। उन्होंने कहा कि यह राज्य न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि जल, जंगल, जमीन की रक्षा की परंपरा भी निभाता है। उन्होंने कहा विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन इसका उदाहरण है।
आर्य ने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति के प्रेरणादायी संबोधन से राज्य के जनप्रतिनिधियों में नई ऊर्जा और दिशा का संचार होगा।



