पुण्यतिथि पर हेमवती नंदन बहुगुणा को अर्पित किये श्रद्धासुमन

देहरादून। भारतीय राजनीति के विराट व्यक्तित्व, कुशल प्रशासक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्यतिथि पर एमडीडीए कॉम्प्लेक्स स्थित उनकी प्रतिमा में पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांसुमन अर्पित की।
इस अवसर पर कहा कि स्वर्गीय एच एन बहुगुणा का नाम केवल एक राजनीतिक नेता तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक ऐसे युगदृष्टा थे, जिन्होंने शासन को जनकल्याण का माध्यम बनाया और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए पूरी निष्ठा से कार्य किया गया।
इस अवसर पर महानगर कांग्रेस कमेटी के पूर्व महानगर कांग्रेस अध्यक्ष लाल चंद शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड की चेतना के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि उनका जीवन संघर्ष और सिद्धांतों की मिसाल था। उन्होंने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि वह शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी विकास को हर नागरिक तक पहुंचाना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि आज हमें उनकी नीतियों को आत्मसात कर उत्तराखंड के सुनहरे भविष्य के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा का राजनीतिक जीवन जनसेवा की अनूठी मिसाल है। उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण हथियार के रूप में देखा।
हेमवती नंदन बहुगुणा का जीवन दर्शन जाति, धर्म और क्षेत्रवाद की सीमाओं से परे था। उन्होंने कहा कि वह समावेशी विकास के पक्षधर थे और उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों तक आधुनिक विकास की रोशनी पहुंचे।
इस अवसर पर इसी क्रम में पूर्व विधायक राजकुमार ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वर्गीय एच एन बहुगुणा केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उन्होंने कहा कि वह राजनीति में नैतिकता, पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही के पक्षधर थे। उन्होंने पर्वतीय समाज के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए जो नीतियां बनाई थीं, और वह आज भी मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि उनकी दृष्टि में सत्ता, सेवा का एक माध्यम थी, न कि विशेषाधिकार का साधन।
उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की रणनीतियां उनकी सोच की परिपक्वता को दर्शाती हैं। उन्होंने उत्तराखंड के लिए विशेष औद्योगिक नीति की वकालत की और पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई योजनाओं की नींव रखी। उन्होंने कहा कि उनकी नीतियों का ही परिणाम है कि आज उत्तराखंड शैक्षिक और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने हमेशा कहा था कि अगर लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखना है, तो सत्ता को जनता की सेवा का माध्यम बनाना होगा। उन्होंने कहा कि आज जब देश और विशेष रूप से उत्तराखंड, विकास की नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब स्वर्गीय बहुगुणा के विचार पहले से भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनके बताए गए मार्ग पर चलकर ही हम एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और प्रगतिशील उत्तराखंड की कल्पना को साकार कर सकते हैं। इस अवसर पर अनेक कांग्रेसजन उपस्थित रहे।



