सशक्त भू कानून व यूसीसी के खिलाफ आंदोलनकारियों का धरना

देहरादून,
राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा पूर्व घोषणा के तहत सशक्त भू-कानून व मूल निवास की अनदेखी और यूसीसी के दो बिन्दुओं कें दुष्परिणाम को लेकर जोरदार नारेबाजी के बीच प्रदर्शन कर धरना दिया गया और आंदोलनकारियों ने अपना विरोध दर्ज किया।
यहां गांधी रोड़ स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी के नेतृत्व में आंदोलनकारी इकटठा हुए और वहां पर उन्होंने भू-कानून व मूल निवास की अनदेखी और यूसीसी के दो बिन्दुओं कें दुष्परिणाम को लेकर जोरदार नारेबाजी के बीच प्रदर्शन कर धरना दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने सख्त नाराज दिखाई दी कि महिलाएं लगातार छोटी सरकार हो या बड़ी सरकार उसमें वोट डालकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही हैं लेकिन हम पिछले छह वर्षों से 2018 के भू कानून को समाप्त करने की मांग कर रही हैं।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इसके साथ ही सशक्त भू कानून एवं मूल निवास की मांग को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन एवं वार्ताएं कर चुकी हैं लेकिन सरकार किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं कर पा रही है और हर भाषण में सख्त भू कानून की लागू करने का आश्वासन देते आ रहें हैं लेकिन सरकार की प्राथमिकता यूसीसी रही। वक्ताओं ने कहा कि देवभूमि की महिलाएं अब आक्रोश में हैं कि आखिर कि ’लिविंग इन रिलेशनशिप देवभूमि की संस्कृति कें खिलाफ हैं।
इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारी मंच की वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुलोचना भट्ट ने सीधे तौर पर सरकार द्वारा थोपा गया यूसीसी कानून को महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि हमारे लोगों ने एक अच्छे प्रदेश की कल्पना की थी कि हमारी अपनी बोली भाषा संस्कृति और सशक्त भू कानून और जल जंगल जमीन को संवारेंगे भी और राजस्व भी कमाएंगे।
उन्होंने कहा कि लेकिन सरकार व शासन ठीक उसके उलट कार्य कर रही हैं। इस अवसर पर युद्धवीर सिंह चौहान एवं अधिवक्ता अभिनव थापर राज्य आंदोलनकारी व दून डॉयलोग के संयोजक अभिनव थापर ने कहा कि उत्तराखंड का यूसीसी असंवैधानिक है । उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के भाग चार एवं डायरेक्टव प्रिंसिपल ऑफ स्टेट पालिसी के अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि राज्य (भारत सरकार) अपने नागरिकों के लिए भारत के पूरे क्षेत्र में एक समान नागरिक संहिता प्रदान करने का प्रयास करेगा। इस अवसर पर अनेक आंदोलनकारी धरने पर रहे।



