आखिरकार लव जिहाद कानून में कहाँ मिली पहली सजा ?

आखिरकार लव जिहाद कानून में सजा मिलने का पहला मामला आया है यूपी के कानपुर से | जहां लव जिहाद के आरोपी को वहाँ की जिला कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई है। इस सारे मामले में पीड़िता ने धार्मिक पहचान छुपा कर फरेब कर शादी करने और उसके साथ जबरदस्ती रेप करने का आरोप लगाया था ।

क्या था यह लव जिहाद का पूरा मामला ?

मामला 15 मई, 2017 का है जब कानपुर के जूही थाना क्षेत्र की कच्ची बस्ती में एक किशोरी के मातापिता ने गुमशुदगी की FIR कारवाई | इस पूरे मामले में जावेद नाम के युवक ने खुद को हिंदू बताते हुए उनकी बेटी से नजदीकियां बढ़ायी और फिर आरोपी किशोरी को शादी का झांसा देकर अपने साथ भगा ले गया। शिकायत दर्ज होने पर पुलिस ने अगले ही दिन आरोपी को गिरफ्तार कर किशोरी को बरामद कर लिया था। पीड़िता ने बताया कि जावेद ने खुद को हिंदू बनाकर उससे दोस्ती की थी। इसके बाद शादी का झांसा देकर साथ ले गया। जब वह उसके घर पहुंची, तो उसे अपना असली धर्म बताकर निकाह करने के लिए दबाव बनाया गया। इस पर लड़की ने इनकार कर दिया।

क्या है लव जिहाद कानून
दरअसल यूपी में 24 फरवरी, 2021 में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2021’ नाम से कानून लागू हुआ था। इसमें बहला-फुसला कर, जबरन, छल-कपट कर, लालच देकर या विवाह के लिए एक धर्म से दूसरे धर्म में किया गया परिवर्तन गैरकानूनी माना गया है। ऐसा करने पर अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है। यूपी से पहले मध्यप्रदेश में इसके खिलाफ कानून बन चुका था। इसके अलावा कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात में भी यह कानून लागू है। हालांकि इस कानून को लेकर बरेली में लव जिहाद का पहला मामला दर्ज किया गया था। उत्तर प्रदेश में कानून बनने के सिर्फ 4 दिन बाद ही दर्ज इस मामले के बाद अब तक कुल 162 केस दर्ज हो चुके हैं |

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