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एक्शन मुड़ में धामी जमीन के फर्जीवाड़े के खुलासो के लिए एसआईटी का गाथा

तीन सदस्यीय एसआईटी गठित, रावत होंगे अध्यक्ष

देहरादून ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर वित्त विभाग ने राजधानी दून में जमीन की खरीद बिक्री में हुए फर्जीवाड़े की जांच को एसआईटी का गठन कर दिया है। इसमें अध्यक्ष समेत तीन सदस्य बनाये गये हैं। इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। एसआईटी का कार्यकाल चार माह निर्धारित किया गया है।

वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने मंगलवार को एसआईटी गठन का आदेश जारी किया है। इसमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एसएस रावत को अध्यक्ष बनाया गया है। डीआईजी कानून व्यवस्था पी रेणुका देवी और सहायक महा निबंधक अतुल कुमार शर्मा को सदस्य बनाया गया है। यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि एसआईटी चाहे और जरूरत समझे तो विशेष सदस्यों को आवश्यकता अनुसार आमंत्रित कर सकता है। इस टीम को देहरादून जिले में पिछले दिनों जमीन संबंधी खरीद बिक्री में की गयी जालसाजी की समयबद्ध और गहनता से जांच करने को कहा गया है। इस प्रकरण में देहरादून के थानों में दर्ज मुकदमों की मॉनिटरिंग का अधिकार भी इसी टीम के पास रहेगा। एसआईटी स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के तहत काम करेगी। टीम के सदस्यों को रिटायरमेंट की स्थिति में उतना ही वेतन मिलेगा जो उन्होंने कार्यकाल के अंतिम समय में आहरित किया था। इसमें से पेंशन की राशि घटा दी जाएगी। परिवहन विभाग की गाइडलाइन के तहत वाहनों की सुविधा दी जाएगी।

एसआईटी को मिली है ये जिम्मेदारी

1-संबंधित अभिलेखागार और कार्यालय में पत्रावलियों की जांच।

2-भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति ना हो, इस विषय पर सुझाव।

3-फर्जीवाड़े में शामिल रहे विभागीय अधिकारियों को चिह्नित करना और उसकी जवाबदेही तय करना।

4-मौजूदा एफआईआर और भविष्य में होने वाली पुलिस कार्यवाही की मॉनिटरिंग।

सीएम ने किया था उप निबंधक कार्यालय क निरीक्षण

गौरतलब है कि सीएम ने 16 जुलाई को देहरादून में रजिस्ट्री कार्यालय और रिकॉर्ड रूम का औचक निरीक्षण किया था। जिलाधिकारी एवं अन्य अधिकारियों से चर्चा एवं निरीक्षण के बाद पाया गया कि रिकार्ड रूम के रखरखाव, सुरक्षा एवं सामग्रियों को नष्ट होने से बचाने के उपाय, जिसमें कई वर्षों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी शामिल हैं, मानकों के अनुरूप नहीं थे। रिकार्ड रूम में प्रवेश और उसकी कॉपी सुरक्षित करने की प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि जमीन से संबंधित धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए पुराने बिक्री कार्यों की प्रतियों वाले फाइल बाइंडर्स के साथ छेड़छाड़ की गई है। इससे पहले डीएम की जांच में भी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था और कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

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