वन मंत्री सुबोध उनियाल बोले- किताबें समाज का दर्पण, आने वाली पीढ़ियों को इतिहास और विरासत से जोड़ने का माध्यम
कॉर्बेट। कॉर्बेट लैंडस्केप में आयोजित लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने साहित्य और प्रकृति के रिश्ते को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किताबें समाज का दर्पण होती हैं। इनके माध्यम से आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास, संस्कृति और विरासत को जानती हैं और भविष्य के निर्माण की दिशा भी तय करती हैं।
वन मंत्री ने कहा कि कॉर्बेट में आयोजित यह लिटरेचर फेस्टिवल देश-दुनिया तक कॉर्बेट की कहानी और इसकी समृद्ध प्राकृतिक विरासत को पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के जरिए दुनिया कॉर्बेट और आसपास के क्षेत्रों को नए नजरिए से जान और समझ सकेगी।
उन्होंने कहा कि कॉर्बेट सिर्फ वन्यजीवों और जंगलों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी संस्कृति, प्रकृति, स्थानीय जीवन और यहां के लोगों की भी अपनी अलग कहानी है। फेस्टिवल के माध्यम से इन सभी पहलुओं को साहित्य और रचनात्मकता के जरिए सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुबोध उनियाल ने कहा कि इस आयोजन को सफल बनाने में कॉर्बेट से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स, स्थानीय लोगों, नेचर गाइड, नेचुरलिस्ट, लेखकों और साहित्य से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी के समन्वय और सहयोग से पहली बार कॉर्बेट की धरती पर साहित्य को केंद्र में रखकर इस तरह का आयोजन किया गया है।
उन्होंने कहा कि लिटरेचर फेस्टिवल केवल पुस्तकों और साहित्य तक सीमित नहीं रहेगा। कॉर्बेट को देखने और समझने वाले लोग अपने अनुभवों और भावनाओं को कविता, कहानी और शब्दों के माध्यम से व्यक्त कर सकेंगे। इससे कॉर्बेट की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को साहित्यिक दस्तावेज के रूप में आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
फेस्टिवल में प्रमुख वन संरक्षक, चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बिडोला समेत वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा कॉर्बेट और आसपास के क्षेत्र से जुड़े स्टेकहोल्डर्स, लेखक, राइटर्स, नेचुरलिस्ट, प्रकृति प्रेमी और साहित्य से जुड़े लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
आयोजन के माध्यम से कॉर्बेट की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की कहानी को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के साथ ही साहित्य और प्रकृति के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया।






